24 जुलाई 2026
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वंदे मातरम अपमान को दंडनीय बनाने वाला विधेयक राज्यसभा में पेश, वामपंथी विरोध के बाद कार्यवाही 27 जुलाई तक स्थगित

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वंदे मातरम अपमान को दंडनीय बनाने वाला विधेयक राज्यसभा में पेश, वामपंथी विरोध के बाद कार्यवाही 27 जुलाई तक स्थगित

सारांश

राज्यसभा में 'वंदे मातरम' के अपमान को तीन साल की सजा के दायरे में लाने वाला संशोधन विधेयक पेश हुआ — और साथ ही छिड़ी वह पुरानी बहस: क्या कानून से देशभक्ति थोपी जा सकती है? वामपंथी दलों के तीखे विरोध ने सदन को 27 जुलाई तक स्थगित करा दिया।

मुख्य बातें

गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने 24 जुलाई 2026 को राज्यसभा में 'राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक, 2026' पेश किया।
विधेयक में 'वंदे मातरम' के अपमान पर तीन वर्ष तक की कारावास का प्रावधान — राष्ट्रध्वज और राष्ट्रगान के समान।
सीपीआई (एम) नेता जॉन ब्रिटास ने नियम 67 के तहत नोटिस दिया; विधेयक को असंवैधानिक और मौलिक अधिकारों का उल्लंघन बताया।
रहीम और संतोष कुमार पी.
ने भी विरोध में नोटिस दिए।
हंगामे के बाद उपसभापति हरिवंश सिंह ने सदन की कार्यवाही 27 जुलाई तक स्थगित की।
यह मानसून सत्र का पाँचवाँ दिन था, जो पहले से नीट पेपर लीक जैसे मुद्दों पर व्यवधानों से प्रभावित रहा है।

गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने 24 जुलाई 2026 को राज्यसभा में 'राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक, 2026' पेश किया, जिसमें राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' के अपमान को दंडनीय अपराध बनाने का प्रावधान है। वामपंथी दलों के तीखे विरोध और सदन में हंगामे के बाद उपसभापति हरिवंश सिंह ने कार्यवाही 27 जुलाई तक के लिए स्थगित कर दी।

विधेयक में क्या है

प्रस्तावित संशोधन राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम अधिनियम, 1971 में बदलाव लाएगा। मौजूदा कानून के तहत राष्ट्रीय ध्वज, संविधान और राष्ट्रगान के अपमान पर तीन वर्ष तक की कारावास की सजा का प्रावधान है। नया संशोधन 'वंदे मातरम' के गायन में बाधा डालने या किसी भी रूप में इसका अपमान करने पर भी इसी तरह की सजा लागू करेगा।

गृह राज्य मंत्री राय ने सदन को स्मरण कराया कि संविधान सभा ने राष्ट्रीय गीत और राष्ट्रगान को समान दर्जा दिया था। उन्होंने कहा कि 24 जनवरी 1950 से ही 'वंदे मातरम' को उचित सम्मान प्राप्त है और यह संशोधन उसे कानूनी संरक्षण की दृष्टि से और सुदृढ़ करेगा।

वामपंथी दलों का विरोध

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) — सीपीआई (एम) — ने इस विधेयक को असंवैधानिक और मौलिक अधिकारों का उल्लंघन बताया। राज्यसभा सदस्य और सीपीआई (एम) नेता जॉन ब्रिटास ने नियम 67 के तहत विधेयक पेश किए जाने पर आपत्ति जताते हुए नोटिस दिया। ब्रिटास ने कहा, 'वे किसी कानून के जरिए देशभक्ति और राष्ट्रवाद पैदा नहीं कर सकते।'

सीपीआई के सदस्यों ए. रहीम और संतोष कुमार पी. ने भी विरोध में नोटिस दिए। संतोष कुमार पी. ने आरोप लगाया कि यह विधेयक छात्र आंदोलन से जनता का ध्यान भटकाने के लिए लाया गया है। उन्होंने कहा, 'वंदे मातरम हमें एकजुट करता है, बांटता नहीं।' सीपीआई (एम) का तर्क है कि दंड के माध्यम से देशभक्ति थोपना लोकतांत्रिक मूल्यों और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के विरुद्ध है।

संसदीय संदर्भ और मानसून सत्र

यह विधेयक मानसून सत्र के पाँचवें दिन पेश किया गया। यह सत्र पहले से ही नीट पेपर लीक कांड जैसे मुद्दों पर बार-बार के व्यवधानों के कारण बाधित रहा है। गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब संसद में राष्ट्रीय प्रतीकों की कानूनी सुरक्षा को लेकर तीखी बहस छिड़ी हो — 1971 के मूल अधिनियम के समय भी इसी तरह के वैचारिक मतभेद उभरे थे।

विपक्ष के नरम पड़ने के कोई संकेत न मिलने पर उपसभापति हरिवंश सिंह ने कार्यवाही 27 जुलाई तक स्थगित कर दी।

आगे क्या होगा

जब 27 जुलाई को सदन की कार्यवाही फिर शुरू होगी, तो सरकार आम सहमति बनाने की कोशिश कर सकती है। हालाँकि, वामपंथी दलों और विपक्ष के अन्य घटकों के कड़े रुख को देखते हुए इस विधेयक का संसदीय मार्ग सहज नहीं दिखता। इस घटनाक्रम ने राष्ट्रीय प्रतीकों की कानूनी सुरक्षा बनाम अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर एक व्यापक राजनीतिक बहस छेड़ दी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी देशभक्ति का स्तर कानून से नहीं, सामाजिक चेतना से तय होता रहा है। असली सवाल यह है कि क्या सरकार इस विधेयक को पारित कराने के लिए पर्याप्त संख्या जुटा पाएगी, या यह मानसून सत्र की राजनीतिक भाषा का हिस्सा बनकर रह जाएगा। विपक्ष का 'ध्यान भटकाने' वाला तर्क भी जाँच माँगता है — यदि यह सच है, तो सरकार की रणनीति उल्टी पड़ सकती है।
RashtraPress
24 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक, 2026 क्या है?
यह विधेयक 1971 के मौजूदा कानून में संशोधन करके 'वंदे मातरम' के अपमान को भी दंडनीय अपराध बनाता है। इसके तहत राष्ट्रीय गीत के गायन में बाधा डालने या किसी भी रूप में अपमान करने पर तीन वर्ष तक की कारावास की सजा हो सकती है।
वर्तमान में 'वंदे मातरम' को कानूनी संरक्षण क्यों नहीं है?
1971 का मौजूदा कानून राष्ट्रीय ध्वज, संविधान और राष्ट्रगान 'जन गण मन' को कानूनी सुरक्षा देता है, लेकिन 'वंदे मातरम' इसमें शामिल नहीं था। सरकार का तर्क है कि संविधान सभा ने 24 जनवरी 1950 को दोनों को समान दर्जा दिया था, इसलिए यह संशोधन उस भावना को कानूनी रूप देता है।
वामपंथी दलों ने इस विधेयक का विरोध क्यों किया?
सीपीआई (एम) और सीपीआई ने इसे असंवैधानिक और मौलिक अधिकारों का उल्लंघन बताया है। उनका तर्क है कि दंड के माध्यम से देशभक्ति थोपना लोकतांत्रिक मूल्यों के विरुद्ध है और यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को कमज़ोर करता है।
राज्यसभा की कार्यवाही कब तक स्थगित हुई?
हंगामे के बाद उपसभापति हरिवंश सिंह ने 24 जुलाई 2026 को सदन की कार्यवाही 27 जुलाई तक के लिए स्थगित कर दी। 27 जुलाई को सदन फिर बैठेगा, जहाँ सरकार आम सहमति बनाने की कोशिश कर सकती है।
क्या यह विधेयक संसद में पारित हो पाएगा?
अभी यह कहना कठिन है। वामपंथी दलों और विपक्ष के अन्य घटकों के कड़े रुख को देखते हुए विधेयक का संसदीय मार्ग आसान नहीं दिखता। मानसून सत्र पहले से ही कई मुद्दों पर व्यवधानों से प्रभावित रहा है, जिससे सरकार के लिए आम सहमति बनाना और भी चुनौतीपूर्ण हो गया है।
राष्ट्र प्रेस
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