वंदे मातरम विवाद पर चिदंबरम का हमला: संशोधन विधेयक 'शरारतपूर्ण', सिर्फ 5 मिनट में पास
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद पी. चिदंबरम ने 29 अगस्त 2026 को मदुरै में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने राष्ट्रीय सम्मान का अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026 को 'अनावश्यक' और 'शरारतपूर्ण' करार दिया, जो वंदे मातरम को कानूनी संरक्षण देने के उद्देश्य से लाया गया है। चिदंबरम के अनुसार, यह विधेयक किसी वास्तविक राष्ट्रीय समस्या का समाधान नहीं करता, बल्कि एक अनावश्यक विवाद को जन्म देता है।
विधेयक पर उठाए सवाल
संसद के मानसून सत्र पर आयोजित कार्यक्रम में चिदंबरम ने कहा कि मानसून सत्र के दौरान कुल 12 विधेयक पारित किए गए, जिनमें यह संशोधन विधेयक भी शामिल था। उन्होंने आरोप लगाया कि इस विधेयक को दोपहर 1:30 बजे पेश किया गया और मात्र पाँच मिनट में पारित कर दिया गया, जिससे सांसदों को पर्याप्त चर्चा का अवसर नहीं मिला। उन्होंने इसे संसदीय प्रक्रिया की अनदेखी बताया।
यह संशोधन राष्ट्रीय सम्मान का अपमान निवारण अधिनियम, 1971 की धारा 3 का दायरा बढ़ाकर वंदे मातरम को भी उसमें शामिल करने का प्रस्ताव करता है। इसके तहत जानबूझकर वंदे मातरम के गायन में बाधा डालने या ऐसी सभा में व्यवधान उत्पन्न करने पर दंड का प्रावधान किया गया है।
ऐतिहासिक संदर्भ और वैचारिक प्रश्न
चिदंबरम ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) और उसके वैचारिक पूर्ववर्ती संगठनों की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान हिंदू महासभा, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) या जनसंघ द्वारा वंदे मातरम गाए जाने का कोई प्रमाण उपलब्ध नहीं है, जबकि उस दौर के कई दस्तावेज मौजूद हैं।
वंदे मातरम के इतिहास का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह गीत तब व्यापक रूप से लोकप्रिय हुआ जब रवींद्रनाथ टैगोर ने इसे गाया और सुब्रमण्यम भारती ने दक्षिण भारत में इसका प्रचार किया।
गीत की संरचना और कांग्रेस कार्यसमिति का निर्णय
चिदंबरम ने वंदे मातरम की संरचना पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, 'वंदे मातरम के पहले दो अंतरे राष्ट्र की वंदना करते हैं, जबकि बाकी चार अंतरों में हिंदू देवी-देवताओं का उल्लेख है। इसी कारण स्वतंत्रता से पहले इस बात को लेकर मतभेद थे कि इसका कौन-सा हिस्सा आधिकारिक रूप से गाया जाना चाहिए।'
उन्होंने बताया कि इस विषय पर कांग्रेस कार्यसमिति ने महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, सुभाष चंद्र बोस, सरदार वल्लभभाई पटेल, डॉ. राजेंद्र प्रसाद और मौलाना अबुल कलाम आजाद की उपस्थिति में विचार-विमर्श किया था। रवींद्रनाथ टैगोर की सलाह पर सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया था कि केवल पहले दो अंतरे ही गाए जाएँ, क्योंकि वे पर्याप्त हैं।
व्यावहारिक पहलू पर टिप्पणी
चिदंबरम ने यह भी कहा कि बहुत कम राजनीतिक कार्यकर्ता वंदे मातरम के दोनों स्वीकृत अंतरों को पूरी तरह गा सकते हैं, जबकि सभी छह अंतरे जानने वालों की संख्या और भी कम है। उन्होंने कहा कि यदि सभी छह अंतरे गाए जाएँ तो इसमें करीब तीन मिनट लगेंगे, और तमिल थाई वाझ्थु तथा राष्ट्रगान के साथ जोड़ने पर लोगों को लगभग पाँच मिनट तक खड़ा रहना पड़ेगा।
उन्होंने खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 को भी 'शरारतपूर्ण' बताया और कहा कि केंद्र सरकार गैर-जरूरी मुद्दों को हवा दे रही है जबकि देश के सामने वास्तविक चुनौतियाँ खड़ी हैं। आने वाले दिनों में इस विधेयक पर विपक्षी दलों का विरोध और तेज होने की संभावना है।