13 अक्टूबर 2026
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वारिस पठान का सवाल: इमरान खान पर एलओसी की मांग, कहा- नाम से नहीं, निष्पक्ष जांच से होनी चाहिए कार्रवाई

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वारिस पठान का सवाल: इमरान खान पर एलओसी की मांग, कहा- नाम से नहीं, निष्पक्ष जांच से होनी चाहिए कार्रवाई

सारांश

AIMIM के वारिस पठान ने इमरान खान पर LOC की मांग को 'नाम-आधारित निशानेबाज़ी' बताया और पाकिस्तान फंडिंग के आरोपों की निष्पक्ष जांच की माँग की। साथ ही SIR और मतदाता सूची से नाम हटाने पर भी सवाल उठाए — यह बयान राष्ट्रीय राजनीति में धर्म, पहचान और लोकतांत्रिक अधिकारों की बहस को और तेज़ करता है।

मुख्य बातें

AIMIM प्रवक्ता वारिस पठान ने 13 अक्टूबर 2026 को मुंबई में इमरान खान पर LOC की मांग और पाकिस्तान फंडिंग के आरोपों पर सवाल उठाए।
पठान ने कहा कि 'खान' या 'पठान' उपनाम होने मात्र से किसी को निशाना बनाना उचित नहीं।
उन्होंने कथित फंडिंग आरोपों की निष्पक्ष जांच की माँग की, कहा— सरकार के पास साधन हैं।
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की 'ब्लैक डे' टिप्पणी पर पठान ने पलटवार किया और बाबरी मस्जिद ध्वंस का उल्लेख किया।
SIR और मतदाता सूची से नाम हटाए जाने पर पठान ने कहा कि AIMIM ने बिहार में सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दाखिल की है।

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रवक्ता वारिस पठान ने 13 अक्टूबर 2026 को मुंबई में मीडिया से बात करते हुए इमरान खान के खिलाफ लुकआउट सर्कुलर (LOC) जारी करने की मांग और कथित पाकिस्तान फंडिंग के आरोपों पर सवाल उठाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि लोकतंत्र में संविधान के तहत शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन का अधिकार प्रत्येक नागरिक को प्राप्त है। साथ ही पठान ने यह भी कहा कि यदि फंडिंग के आरोप लगाए गए हैं तो उनकी उचित और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

नाम के आधार पर निशाना बनाने का आरोप

पठान ने आरोप लगाया कि जब किसी व्यक्ति के नाम के साथ 'खान' या 'पठान' जुड़ा होता है, तो उसे अनावश्यक रूप से निशाना बनाया जाने लगता है। उन्होंने सवाल किया कि क्या केवल नाम के आधार पर किसी को संदिग्ध या आतंकवादी करार दिया जाना उचित है।

पठान के अनुसार किसी भी प्रदर्शन में अलग-अलग राजनीतिक विचारधाराओं के लोग शामिल हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि जैसे ही कुछ विशेष नाम सामने आए, भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेताओं की ओर से तत्काल विरोध शुरू हो गया, जो उनके अनुसार एक पूर्वाग्रही रवैये को दर्शाता है।

मुस्लिम समुदाय पर भेदभाव के आरोप

पठान ने कहा कि मुस्लिम समुदाय को कई बार भेदभाव और प्रशासनिक कार्रवाई का सामना करना पड़ता है। उन्होंने लाठीचार्ज, महिलाओं के नकाब और हिजाब खींचे जाने, गोलीबारी और गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (UAPA) के तहत कार्रवाई जैसे कथित मामलों का उल्लेख किया।

उन्होंने कहा कि इन अनुभवों के कारण ऐसे मामलों में समुदाय के भीतर गहरी चिंता बनी रहती है। दिल्ली में हाल के प्रदर्शन के दौरान मेट्रो, ट्रेनों और सड़कों के प्रभावित होने तथा पत्रकारों, युवाओं और महिलाओं को कथित तौर पर हिरासत में लिए जाने की भी उन्होंने निंदा की।

पाकिस्तान फंडिंग के आरोपों पर पठान का रुख

इमरान खान से जुड़े कथित पाकिस्तान फंडिंग के आरोपों पर पठान ने संतुलित रुख अपनाते हुए कहा कि यदि किसी ने आरोप लगाए हैं, तो सरकार को उनकी सच्चाई सामने लाने के लिए उचित जांच करानी चाहिए। उन्होंने कहा कि सत्ता में बैठी सरकार के पास इसके पर्याप्त साधन हैं।

गौरतलब है कि यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब राष्ट्रीय स्तर पर विरोध प्रदर्शनों में शामिल प्रतिभागियों की पहचान और उनकी कथित संबद्धताओं को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो चुकी है।

एकनाथ शिंदे की टिप्पणी और 'ब्लैक डे' का सवाल

महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की 'ब्लैक डे' संबंधी टिप्पणी पर पठान ने कहा कि BJP सरकार के सत्ता में आने के बाद से उन्हें कई घटनाएं काले दिन जैसी प्रतीत होती हैं। उन्होंने 6 दिसंबर को बाबरी मस्जिद ध्वंस का उल्लेख करते हुए सवाल किया कि उस दिन को किस रूप में देखा जाना चाहिए।

पठान ने जोर देकर कहा कि संविधान नागरिकों को शांतिपूर्ण विरोध की अनुमति देता है और यह अधिकार किसी के भी नाम या धर्म के आधार पर नहीं छीना जा सकता।

SIR और मतदाता सूची पर चिंता

पठान ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के मुद्दे पर कहा कि उनकी पार्टी इसका विरोध करती रही है। उन्होंने बताया कि बिहार में SIR को लेकर AIMIM के प्रदेश अध्यक्ष ने सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दाखिल की थी।

पठान ने दावा किया कि मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने को लेकर देशभर में नाराजगी है। उन्होंने न्यायाधीशों के बयानों और मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों पर सवाल उठाए और कहा कि किसी भी वास्तविक मतदाता का नाम सूची से नहीं हटना चाहिए, क्योंकि मताधिकार लोकतंत्र की आधारशिला है।

यह ऐसे समय में आया है जब मतदाता सूची पुनरीक्षण को लेकर विपक्षी दल लगातार सवाल उठा रहे हैं और मामला न्यायिक समीक्षा के दायरे में है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और जांच की माँग भी — जो AIMIM की उस रणनीतिक स्थिति को दर्शाता है जहाँ पार्टी 'पीड़ित' और 'जवाबदेही समर्थक' दोनों की भूमिका एक साथ निभाती है। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर इस दोहरेपन को चूक जाती है। SIR और मतदाता सूची का प्रसंग जोड़कर पठान ने एक स्थानीय विवाद को व्यापक लोकतांत्रिक प्रश्नों से जोड़ने की कोशिश की है — यह रणनीति विपक्षी राजनीति में बढ़ती प्रवृत्ति का हिस्सा है। असली सवाल यह है कि क्या सरकार पारदर्शी जांच प्रक्रिया अपनाएगी, या आरोप-प्रत्यारोप का यह सिलसिला बिना किसी निष्कर्ष के जारी रहेगा।
RashtraPress
13 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वारिस पठान ने इमरान खान पर LOC की मांग पर क्या कहा?
AIMIM प्रवक्ता वारिस पठान ने कहा कि इमरान खान पर लुकआउट सर्कुलर (LOC) जारी करने की मांग और कथित पाकिस्तान फंडिंग के आरोप नाम-आधारित पूर्वाग्रह से प्रेरित लगते हैं। उन्होंने मांग की कि यदि आरोप हैं तो सरकार उचित और निष्पक्ष जांच कराए।
पठान ने मुस्लिम समुदाय पर भेदभाव के बारे में क्या कहा?
पठान ने आरोप लगाया कि मुस्लिम समुदाय को लाठीचार्ज, हिजाब-नकाब खींचे जाने, गोलीबारी और UAPA के तहत कार्रवाई जैसे कथित भेदभाव का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि इन्हीं अनुभवों के कारण ऐसे विवादों में समुदाय में गहरी चिंता रहती है।
एकनाथ शिंदे की 'ब्लैक डे' टिप्पणी पर वारिस पठान की क्या प्रतिक्रिया थी?
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की 'ब्लैक डे' टिप्पणी पर पठान ने कहा कि BJP सरकार के सत्ता में आने के बाद कई घटनाएं उन्हें काले दिन जैसी लगती हैं। उन्होंने 6 दिसंबर को बाबरी मस्जिद ध्वंस का हवाला देते हुए सवाल किया कि उस दिन को किस रूप में देखा जाना चाहिए।
SIR और मतदाता सूची पर पठान का क्या रुख है?
AIMIM विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का विरोध करती है और पार्टी के बिहार प्रदेश अध्यक्ष ने इस मामले में सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दाखिल की है। पठान ने कहा कि मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने को लेकर देशभर में नाराजगी है और किसी भी वास्तविक मतदाता का अधिकार नहीं छीना जाना चाहिए।
AIMIM का इमरान खान से जुड़े पाकिस्तान फंडिंग विवाद में क्या रुख है?
AIMIM प्रवक्ता वारिस पठान ने न तो आरोपों को सीधे खारिज किया और न ही उनका समर्थन किया। उन्होंने कहा कि सरकार के पास जांच के पर्याप्त साधन हैं और यदि आरोप सच हैं तो जांच से सच्चाई सामने आनी चाहिए — यह पार्टी का संतुलित लेकिन सतर्क रुख है।
राष्ट्र प्रेस
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