पाकिस्तान: वकीलों ने पीटीआई के मार्च को 'ऐतिहासिक संघर्ष' बताया, इमरान खान की रिहाई की माँग
सारांश
मुख्य बातें
ऑल पाकिस्तान लॉयर्स एक्शन कमेटी ने 9 अक्टूबर 2026 को पाकिस्तान तहरीक ए इंसाफ (पीटीआई) के जारी मार्च और उसकी माँगों के प्रति पूर्ण समर्थन व्यक्त किया है। वकीलों के इस संगठन ने कहा कि पीटीआई का यह मार्च पाकिस्तान में लोकतंत्र और कानून के शासन को मज़बूत करने की दिशा में एक निर्णायक कदम है।
वकीलों की माँगें और समर्थन का आधार
कमेटी के चेयरमैन अली अहमद कुर्द ने विभिन्न बार एसोसिएशनों और बार काउंसिलों के प्रतिनिधियों के साथ एक संयुक्त बयान में कहा कि पीटीआई का यह मार्च संविधान की सर्वोच्चता, स्वतंत्र न्यायपालिका, स्वतंत्र संसद तथा देश में व्याप्त आर्थिक एवं राजनीतिक संकट के विरुद्ध है। वकीलों ने मुद्रास्फीति, बिगड़ती कानून व्यवस्था और राजनीतिक व मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की कथित अवैध गिरफ्तारियों को भी इस मार्च की प्रमुख वजह बताया।
वकीलों ने पीटीआई के संस्थापक इमरान खान और हिरासत में बंद पार्टी के अन्य नेताओं की तत्काल रिहाई की माँग भी की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि पाकिस्तानी अधिकारियों ने खैबर पख्तूनख्वा में गवर्नर शासन लागू किया या कोई 'अलोकतांत्रिक कदम' उठाया, तो वकील बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन करेंगे।
काफ़िले का पाँचवाँ दिन: पेशावर पहुँची पीटीआई
गुरुवार को खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी ने पुष्टि की कि पीटीआई का लंबा मार्च जारी रहेगा। पार्टी का काफ़िला यात्रा के लगातार पाँचवें दिन पेशावर पहुँचा। अफरीदी ने खैबर, पेशावर और दक्षिणी जिलों के प्रतिभागियों को मार्च में शामिल होने के लिए आभार जताया और उनसे उत्साह बनाए रखने का आग्रह किया।
गौरतलब है कि यह मार्च ऐसे समय में हो रहा है जब पाकिस्तान गंभीर आर्थिक दबाव और राजनीतिक अस्थिरता से जूझ रहा है। विपक्षी दलों और नागरिक समाज के बीच बढ़ता समन्वय सत्तारूढ़ गठबंधन के लिए एक नई चुनौती बनकर उभर रहा है।
अफरीदी का 'सच्ची आज़ादी' का आह्वान
मुख्यमंत्री अफरीदी ने इस मार्च को 'सच्ची आज़ादी' की लड़ाई बताते हुए कहा कि पीटीआई के संस्थापक इमरान खान मुश्किलों का सामना करने के बावजूद दबाव के आगे नहीं झुके। उन्होंने जोर देकर कहा, "वापसी का कोई रास्ता नहीं है। सच्ची आज़ादी का सपना निश्चित रूप से पूरा होगा। वे गोलियाँ चलाएँगे और हम अपना सीना आगे करेंगे।"
यह बयान ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान में विपक्षी दलों और सरकार के बीच तनाव चरम पर है। पीटीआई ने स्पष्ट किया है कि पार्टी संविधान और कानून के दायरे में रहकर अपना लोकतांत्रिक संघर्ष जारी रखेगी।
मार्च की माँगें और राजनीतिक असर
पीटीआई की प्रमुख माँगों में इमरान खान की रिहाई, न्यायपालिका की स्वायत्तता की बहाली, राजनीतिक बंदियों की मुक्ति और आर्थिक संकट के समाधान के लिए सरकार के साथ संवाद शामिल हैं। वकीलों के इस समर्थन से पीटीआई के आंदोलन को एक संवैधानिक एवं कानूनी वैधता मिली है, जो इसे केवल राजनीतिक रैली से कहीं अधिक व्यापक बनाती है।
आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि पाकिस्तानी सरकार इस बढ़ते दबाव पर क्या प्रतिक्रिया देती है और क्या वकीलों एवं पीटीआई के बीच यह समन्वय किसी बातचीत की ज़मीन तैयार कर पाता है।