9 अक्टूबर 2026
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पाकिस्तान: वकीलों ने पीटीआई के मार्च को 'ऐतिहासिक संघर्ष' बताया, इमरान खान की रिहाई की माँग

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पाकिस्तान: वकीलों ने पीटीआई के मार्च को 'ऐतिहासिक संघर्ष' बताया, इमरान खान की रिहाई की माँग

सारांश

पाकिस्तान में वकीलों के शीर्ष संगठन ने पीटीआई के जारी मार्च को 'ऐतिहासिक लोकतांत्रिक संघर्ष' बताते हुए समर्थन दिया है। इमरान खान की रिहाई और संवैधानिक शासन की माँग के साथ यह मार्च अपने पाँचवें दिन पेशावर पहुँचा। सरकार के किसी भी 'अलोकतांत्रिक कदम' पर वकीलों ने विरोध की चेतावनी दी है।

मुख्य बातें

ऑल पाकिस्तान लॉयर्स एक्शन कमेटी ने 9 अक्टूबर 2026 को पीटीआई के मार्च और माँगों का समर्थन किया।
कमेटी के चेयरमैन अली अहमद कुर्द ने मार्च को लोकतंत्र एवं कानून के शासन के लिए 'ऐतिहासिक संघर्ष' बताया।
वकीलों ने इमरान खान और हिरासत में बंद अन्य पीटीआई नेताओं की रिहाई की माँग की।
पीटीआई का काफ़िला यात्रा के पाँचवें दिन पेशावर पहुँचा; मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी ने 'वापसी का कोई रास्ता नहीं' कहा।
वकीलों ने चेतावनी दी कि खैबर पख्तूनख्वा में गवर्नर शासन या कोई 'अलोकतांत्रिक कदम' उठाने पर विरोध प्रदर्शन होगा।

ऑल पाकिस्तान लॉयर्स एक्शन कमेटी ने 9 अक्टूबर 2026 को पाकिस्तान तहरीक ए इंसाफ (पीटीआई) के जारी मार्च और उसकी माँगों के प्रति पूर्ण समर्थन व्यक्त किया है। वकीलों के इस संगठन ने कहा कि पीटीआई का यह मार्च पाकिस्तान में लोकतंत्र और कानून के शासन को मज़बूत करने की दिशा में एक निर्णायक कदम है।

वकीलों की माँगें और समर्थन का आधार

कमेटी के चेयरमैन अली अहमद कुर्द ने विभिन्न बार एसोसिएशनों और बार काउंसिलों के प्रतिनिधियों के साथ एक संयुक्त बयान में कहा कि पीटीआई का यह मार्च संविधान की सर्वोच्चता, स्वतंत्र न्यायपालिका, स्वतंत्र संसद तथा देश में व्याप्त आर्थिक एवं राजनीतिक संकट के विरुद्ध है। वकीलों ने मुद्रास्फीति, बिगड़ती कानून व्यवस्था और राजनीतिक व मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की कथित अवैध गिरफ्तारियों को भी इस मार्च की प्रमुख वजह बताया।

वकीलों ने पीटीआई के संस्थापक इमरान खान और हिरासत में बंद पार्टी के अन्य नेताओं की तत्काल रिहाई की माँग भी की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि पाकिस्तानी अधिकारियों ने खैबर पख्तूनख्वा में गवर्नर शासन लागू किया या कोई 'अलोकतांत्रिक कदम' उठाया, तो वकील बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन करेंगे।

काफ़िले का पाँचवाँ दिन: पेशावर पहुँची पीटीआई

गुरुवार को खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी ने पुष्टि की कि पीटीआई का लंबा मार्च जारी रहेगा। पार्टी का काफ़िला यात्रा के लगातार पाँचवें दिन पेशावर पहुँचा। अफरीदी ने खैबर, पेशावर और दक्षिणी जिलों के प्रतिभागियों को मार्च में शामिल होने के लिए आभार जताया और उनसे उत्साह बनाए रखने का आग्रह किया।

गौरतलब है कि यह मार्च ऐसे समय में हो रहा है जब पाकिस्तान गंभीर आर्थिक दबाव और राजनीतिक अस्थिरता से जूझ रहा है। विपक्षी दलों और नागरिक समाज के बीच बढ़ता समन्वय सत्तारूढ़ गठबंधन के लिए एक नई चुनौती बनकर उभर रहा है।

अफरीदी का 'सच्ची आज़ादी' का आह्वान

मुख्यमंत्री अफरीदी ने इस मार्च को 'सच्ची आज़ादी' की लड़ाई बताते हुए कहा कि पीटीआई के संस्थापक इमरान खान मुश्किलों का सामना करने के बावजूद दबाव के आगे नहीं झुके। उन्होंने जोर देकर कहा, "वापसी का कोई रास्ता नहीं है। सच्ची आज़ादी का सपना निश्चित रूप से पूरा होगा। वे गोलियाँ चलाएँगे और हम अपना सीना आगे करेंगे।"

यह बयान ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान में विपक्षी दलों और सरकार के बीच तनाव चरम पर है। पीटीआई ने स्पष्ट किया है कि पार्टी संविधान और कानून के दायरे में रहकर अपना लोकतांत्रिक संघर्ष जारी रखेगी।

मार्च की माँगें और राजनीतिक असर

पीटीआई की प्रमुख माँगों में इमरान खान की रिहाई, न्यायपालिका की स्वायत्तता की बहाली, राजनीतिक बंदियों की मुक्ति और आर्थिक संकट के समाधान के लिए सरकार के साथ संवाद शामिल हैं। वकीलों के इस समर्थन से पीटीआई के आंदोलन को एक संवैधानिक एवं कानूनी वैधता मिली है, जो इसे केवल राजनीतिक रैली से कहीं अधिक व्यापक बनाती है।

आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि पाकिस्तानी सरकार इस बढ़ते दबाव पर क्या प्रतिक्रिया देती है और क्या वकीलों एवं पीटीआई के बीच यह समन्वय किसी बातचीत की ज़मीन तैयार कर पाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो यह टकराव केवल पार्टी बनाम सरकार नहीं रहेगा, बल्कि न्यायिक और नागरिक समाज का मोर्चा भी खुल सकता है।
RashtraPress
9 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ऑल पाकिस्तान लॉयर्स एक्शन कमेटी ने पीटीआई को समर्थन क्यों दिया?
कमेटी ने पीटीआई के मार्च को संविधान की सर्वोच्चता, स्वतंत्र न्यायपालिका और राजनीतिक बंदियों की रिहाई जैसे मुद्दों पर लोकतंत्र के पक्ष में एक ऐतिहासिक संघर्ष बताया। वकीलों के अनुसार, मुद्रास्फीति, कानून व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति और राजनीतिक कार्यकर्ताओं की कथित अवैध गिरफ्तारियाँ इस समर्थन की प्रमुख वजह हैं।
पीटीआई का लंबा मार्च अभी किस चरण में है?
पीटीआई का काफ़िला यात्रा के पाँचवें दिन पेशावर पहुँचा। खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी ने स्पष्ट किया है कि मार्च जारी रहेगा और 'वापसी का कोई रास्ता नहीं है'।
वकीलों ने गवर्नर शासन को लेकर क्या चेतावनी दी है?
ऑल पाकिस्तान लॉयर्स एक्शन कमेटी ने कहा कि यदि अधिकारी खैबर पख्तूनख्वा में गवर्नर शासन लागू करते हैं या कोई 'अलोकतांत्रिक कदम' उठाते हैं, तो वकील बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन करेंगे। यह चेतावनी पाकिस्तान में राजनीतिक तनाव को और गहरा कर सकती है।
पीटीआई के मार्च की प्रमुख माँगें क्या हैं?
पीटीआई की प्रमुख माँगों में इमरान खान और हिरासत में बंद पार्टी नेताओं की रिहाई, संविधान एवं न्यायपालिका की स्वायत्तता की बहाली, राजनीतिक व मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की अवैध गिरफ्तारियों का अंत, तथा बढ़ती मुद्रास्फीति और आर्थिक संकट के समाधान शामिल हैं।
सोहेल अफरीदी ने मार्च के प्रतिभागियों को क्या संदेश दिया?
खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी ने मार्च को 'सच्ची आज़ादी' की लड़ाई बताया और प्रतिभागियों से अपने जोश व उत्साह को बनाए रखने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि पीटीआई संविधान और कानून के दायरे में रहकर अपना लोकतांत्रिक संघर्ष जारी रखेगी।
राष्ट्र प्रेस
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