इमरान खान की बहनों की गिरफ्तारी 'असंवैधानिक': औरत मार्च ने पाकिस्तान सरकार की निंदा की
सारांश
मुख्य बातें
पाकिस्तान में महिला अधिकारों के लिए सक्रिय प्रमुख संगठन औरत मार्च ने 22 सितंबर 2026 को एक कड़े बयान में पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की बहनों अलीमा खान, उज्मा खान और नोरिन नियाजी समेत उनके परिवार के अन्य सदस्यों — भांजियों, भांजों और नाबालिग बच्चों — की गिरफ्तारी को 'असंवैधानिक और अमानवीय' करार दिया। संगठन ने इस कार्रवाई को असहमति की आवाज़ को कुचलने की एक 'खौफनाक' कोशिश बताते हुए हर पाकिस्तानी से इसकी निंदा करने की अपील की।
गिरफ्तारी का घटनाक्रम
पाकिस्तानी अखबार 'डॉन' की रिपोर्टों के अनुसार, लाहौर के डिप्टी कमिश्नर ने 30 दिन की हिरासत का आदेश जारी किया, जिसके बाद तीनों बहनों को हिरासत में लिया गया। यह कार्रवाई पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के उस विरोध प्रदर्शन और लॉन्ग मार्च से कुछ दिन पहले हुई, जिसकी घोषणा 13 सितंबर को की गई थी।
पीटीआई नेताओं ने 27 सितंबर को इस्लामाबाद में मार्च का ऐलान किया था — जिसका उद्देश्य इमरान खान की रिहाई के साथ-साथ लोकतंत्र की बहाली और संविधान के राज को सुनिश्चित करना बताया गया था।
औरत मार्च का तीखा बयान
औरत मार्च ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए कहा कि ये गिरफ्तारियाँ 'सत्तारूढ़ तंत्र (एस्टेब्लिशमेंट) समर्थित हिंसक कदमों' की एक लंबी कड़ी का हिस्सा हैं, जो पीटीआई और देशभर में विरोध कर रहे अन्य आंदोलनों, संगठनों और राजनीतिक समूहों के खिलाफ जारी हैं।
संगठन ने स्पष्ट किया, 'हालांकि हम किसी राजनीतिक पार्टी से नहीं जुड़े हैं और पिछले कुछ वर्षों में पीटीआई की कुछ नीतियों से असहमत भी रहे हैं, फिर भी हमारा मानना है कि असहमति के किसी भी रूप को कुचलने की सरकार की भयानक कोशिशें — इमरान खान के रिश्तेदारों को डराना-धमकाना और उठा ले जाना, और पीटीआई समर्थकों को इस्लामाबाद की सड़कों पर मार्च करने से रोकना — असंवैधानिक और अमानवीय है, और सभी नागरिकों को इसकी निंदा करनी चाहिए।'
व्यापक दमन का संदर्भ
गौरतलब है कि औरत मार्च ने अपने बयान में केवल इमरान खान के परिवार तक सीमित नहीं रही। संगठन ने पाकिस्तानी मानवाधिकार वकील ईमान जैनब मजारी-हाजिर और हादी अली चट्टा की दोबारा गिरफ्तारी का भी उल्लेख किया। साथ ही, बलोच यकजेहती कमेटी (BYC) के नेताओं महरंग बलोच, गुलजादी बलोच और अन्य सदस्यों को दी गई उम्रकैद की सज़ा, और बलूचिस्तान, खैबर पख्तूनख्वा तथा पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में कथित सैन्य अत्याचारों का हवाला देते हुए संगठन ने कहा कि ये घटनाएँ एक 'व्यापक दमन' की तस्वीर पेश करती हैं।
यह ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान में राजनीतिक तनाव अपने चरम पर है और नागरिक अधिकारों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सवाल उठ रहे हैं।
आम जनता पर असर
औरत मार्च ने जोर दिया कि 'हर पाकिस्तानी को शांतिपूर्ण विरोध करने और सरकार के सामने अपनी माँगें रखने का अधिकार है।' संगठन ने कहा कि पाकिस्तान 'लोकतंत्र, संविधान और प्रतिरोध के लिए बुरे दौर' से गुज़र रहा है।
आलोचकों का कहना है कि राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों के परिजनों को निशाना बनाने की यह प्रवृत्ति नागरिक स्वतंत्रताओं के लिए एक ख़तरनाक नज़ीर स्थापित करती है।
आगे क्या
पीटीआई का 27 सितंबर का लॉन्ग मार्च अब और भी निर्णायक हो गया है। गिरफ्तारियों और सरकारी प्रतिबंधों के बावजूद पार्टी नेतृत्व ने मार्च जारी रखने की घोषणा की है। अगले कुछ दिनों में इस्लामाबाद में राजनीतिक स्थिति कैसे करवट लेती है, यह पाकिस्तान में विपक्षी राजनीति के भविष्य के लिए अहम संकेत होगा।