पीटीआई लॉन्ग मार्च से पहले पंजाब सरकार का बड़ा फैसला: 13 दिन सार्वजनिक सभाओं पर रोक, रेंजर्स तैनात
सारांश
मुख्य बातें
पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के प्रस्तावित इस्लामाबाद लॉन्ग मार्च से पहले पंजाब सरकार ने पूरे प्रांत में 13 दिनों के लिए सार्वजनिक सभाओं, जुलूसों और पाँच या अधिक लोगों के एकत्रित होने पर पाबंदी लगा दी है। 24 सितंबर 2026 को स्थानीय मीडिया रिपोर्टों में सामने आई इस कार्रवाई के तहत अटक और रावलपिंडी के आसपास की सड़कें व व्यापारिक प्रतिष्ठान बंद कर दिए गए हैं, और प्रांत के चार जिलों में रेंजर्स अर्धसैनिक बल तैनात किए गए हैं।
प्रतिबंध की मुख्य शर्तें
पंजाब सरकार की आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, सार्वजनिक स्थलों, खुली सड़कों और मैदानों पर पाँच या उससे अधिक लोगों के जमा होने पर 13 दिन की रोक लगाई गई है। इसके साथ ही प्रांत में हथियार ले जाना और प्रदर्शित करना, तथा लोगों को गैर-कानूनी सभाओं में शामिल होने के लिए उकसाना भी प्रतिबंधित है।
हालाँकि, इस आदेश में शादियों, अंतिम संस्कार की रस्मों और मस्जिदों व अन्य धार्मिक स्थलों पर होने वाली सभाओं को छूट दी गई है। अधिसूचना में कहा गया है कि कानून प्रवर्तन और खुफिया एजेंसियों को आतंकवादी समूहों द्वारा सार्वजनिक सभाओं को निशाना बनाने की योजना की जानकारी मिली थी।
इमरान खान की बहनों की गिरफ्तारी
यह प्रतिबंध ऐसे समय लगाया गया है जब पंजाब पुलिस ने पीटीआई संस्थापक इमरान खान की तीन बहनों — अलीमा खान, नौरीन नियाजी और उज्मा खान — को लाहौर के डिप्टी कमिश्नर द्वारा 'मेंटेनेंस ऑफ पब्लिक ऑर्डर' (एमपीओ) अध्यादेश की धारा 3 के तहत 30 दिन की हिरासत के आदेश पर गिरफ्तार किया है। अलीमा खान के बेटे शाहराज खान ने लाहौर हाई कोर्ट (एलएचसी) में इस हिरासत आदेश को चुनौती देते हुए याचिका दायर की है।
याचिका में शाहराज खान ने तर्क दिया कि हिरासत का आदेश गैर-कानूनी और अवैध था, और अलीमा खान को उस समय हिरासत में लिया गया जब वह अपने ड्राइवर के साथ निजी काम से जा रही थीं — उस स्थान पर कोई सार्वजनिक सभा नहीं थी और न ही कोई ऐसी परिस्थिति थी जो सार्वजनिक व्यवस्था के लिए खतरा हो।
इमरान के बेटे कासिम खान की अंतरराष्ट्रीय अपील
इमरान खान के बेटे कासिम खान ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए अपनी दोनों बुआ की गिरफ्तारी को 'आपराधिक व्यवहार' करार दिया और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से हस्तक्षेप की माँग की। अपने पोस्ट में उन्होंने लिखा, 'यह शर्मनाक है। अब मेरी दोनों बुआ डॉ. उज्मा और नौरीन, और मेरे फुफेरे भाई शेरशाह और शाहराज को भी उठा लिया गया है। वे उनके घरों में जबरदस्ती घुसे और बिना किसी वजह के उन्हें गाड़ियों में बिठाकर ले गए।'
उन्होंने आगे कहा, 'उन्हें कहाँ ले जाया गया है, इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई है। पाकिस्तान के लोग अपने ही नेताओं से डरे हुए हैं। किसी भी अच्छे देश को इस आपराधिक व्यवस्था को बर्दाश्त नहीं करना चाहिए। दुनिया को जरूर कदम उठाना चाहिए।'
राजनीतिक पृष्ठभूमि और आगे की राह
गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब पीटीआई के मार्च से पहले पंजाब में धारा 144 जैसे प्रतिबंध लगाए गए हों। 2022 और 2023 के लॉन्ग मार्च के दौरान भी इसी तरह की पाबंदियाँ लगाई गई थीं, जो बाद में तनावपूर्ण टकराव में बदल गई थीं। इस बार प्रतिबंध की व्यापकता और रेंजर्स की तैनाती यह संकेत देती है कि सरकार किसी भी बड़े जन-आंदोलन को राजधानी तक पहुँचने से रोकने के लिए पहले से ही कदम उठा रही है। लाहौर हाई कोर्ट में याचिका पर सुनवाई और पीटीआई के अगले कदम पर अब सबकी निगाहें टिकी हैं।