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रावलपिंडी में सेना की तीन कंपनियाँ तैनात, पीटीआई के 27 सितंबर लॉन्ग मार्च से पहले शहबाज सरकार सतर्क

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रावलपिंडी में सेना की तीन कंपनियाँ तैनात, पीटीआई के 27 सितंबर लॉन्ग मार्च से पहले शहबाज सरकार सतर्क

सारांश

पीटीआई के 27 सितंबर लॉन्ग मार्च से हफ्तों पहले शहबाज सरकार ने रावलपिंडी में सेना की तीन कंपनियाँ छह महीने के लिए तैनात कर दीं। आधिकारिक वजह 'संवेदनशील सुरक्षा कार्य' बताई गई, लेकिन राजनीतिक संदर्भ कुछ और ही कहानी कहता है।

मुख्य बातें

पाकिस्तान के गृह मंत्रालय ने 21 अगस्त को रावलपिंडी में सेना की तीन कंपनियों को छह महीने के लिए तैनात करने का आदेश जारी किया।
तैनाती संविधान के अनुच्छेद 245 के तहत पंजाब गृह विभाग के अनुरोध पर की गई है।
11 अगस्त को मॉल रोड पर हुई गोलीबारी में एक कथित पीटीआई कार्यकर्ता मुहम्मद हुसैन सुरक्षा बलों की जवाबी कार्रवाई में मारा गया था।
पीटीआई ने 27 सितंबर को इस्लामाबाद की ओर लॉन्ग मार्च का ऐलान किया है, जिसमें इमरान खान की रिहाई और लोकतंत्र की बहाली की माँग है।
विपक्षी दलों ने इमरान के इलाज पर सर्वोच्च न्यायालय के आदेश को लागू न करने पर सरकार के खिलाफ अदालत जाने का फैसला किया।

पाकिस्तान की शहबाज शरीफ सरकार ने 21 अगस्त को संवेदनशील सैन्य शहर रावलपिंडी में पाकिस्तान सेना की तीन कंपनियों को छह महीने के लिए तैनात करने का आदेश जारी किया है। गृह मंत्रालय का यह आदेश संविधान के अनुच्छेद 245 के तहत जारी किया गया है, जो नागरिक प्रशासन की सहायता के लिए सशस्त्र बलों की तैनाती की अनुमति देता है। यह कदम ऐसे समय आया है जब विपक्षी दल पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) ने 27 सितंबर को इस्लामाबाद की ओर लॉन्ग मार्च का ऐलान किया हुआ है।

आधिकारिक आदेश में क्या कहा गया

प्रमुख पाकिस्तानी दैनिक डॉन ने आधिकारिक आदेश के हवाले से बताया कि यह तैनाती पंजाब गृह विभाग के अनुरोध पर की गई है। आदेश में कहा गया, "संघीय सरकार, संविधान के अनुच्छेद 245 के तहत मिली शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए, रावलपिंडी में 'संवेदनशील सुरक्षा कार्यों' के लिए पाकिस्तान सेना की तीन कंपनियों की तैनाती को मंजूरी देती है।" आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया कि इसका उद्देश्य "किसी भी अवांछित या अप्रत्याशित स्थिति में प्रभावी ढंग से कार्रवाई करना" है और यह तैनाती तत्काल प्रभाव से लागू मानी जाएगी।

11 अगस्त की गोलीबारी और राजनीतिक कनेक्शन

द एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, 11 अगस्त को रावलपिंडी के मॉल रोड पर एक हथियारबंद व्यक्ति ने सुरक्षा बलों पर कथित तौर पर गोलीबारी की और एक पेट्रोलिंग अधिकारी को घायल कर दिया। जवाबी कार्रवाई में उस व्यक्ति को मार गिराया गया। सुरक्षा सूत्रों के हवाले से पाकिस्तान टेलीविजन न्यूज (पीटीवी) ने बताया कि कथित हमलावर मुहम्मद हुसैन खैबर जिले का रहने वाला था और पीटीआई का सक्रिय सदस्य था। हालाँकि, इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।

इस घटना के बाद सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार ने पीटीआई की कड़ी आलोचना की और पार्टी पर हिंसा व अशांति फैलाने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि हिंसक विरोध-प्रदर्शन पीटीआई के लिए एक "पैटर्न" बन चुका है और पार्टी कार्यकर्ता प्रदर्शनों के दौरान हथियार साथ रखते हैं।

पीटीआई का 27 सितंबर लॉन्ग मार्च

इसी महीने पीटीआई ने घोषणा की कि 27 सितंबर को रावलपिंडी से इस्लामाबाद की ओर एक बड़ा लॉन्ग मार्च निकाला जाएगा। खैबर पख्तूनख्वा (केपी) के सूचना और जनसंपर्क मंत्री शफी जान ने बताया कि यह फैसला पार्टी के सहयोगियों से विस्तृत बातचीत के बाद लिया गया है। यह लॉन्ग मार्च पार्टी के संस्थापक इमरान खान की जेल की सजा के तीन साल पूरे होने के अवसर पर 'ब्लैक डे' के रूप में मनाए गए देशव्यापी विरोध-प्रदर्शनों के ठीक बाद आया है।

पीटीआई की माँगों में इमरान खान और उनकी पत्नी की तत्काल रिहाई, संवैधानिक शासन की बहाली, महंगाई से राहत और लोकतंत्र की वापसी शामिल हैं। पार्टी ने इसे 'जनता का जनादेश' करार दिया है।

विपक्ष की कानूनी रणनीति

विपक्षी दलों ने शुक्रवार को एक बार फिर स्पष्ट किया कि वे लॉन्ग मार्च को लेकर पूरी तरह गंभीर हैं। इसके साथ ही उन्होंने इमरान खान के इलाज से जुड़े सर्वोच्च न्यायालय के आदेश को लागू करने में सरकार की विफलता के मुद्दे पर अदालत का दरवाज़ा खटखटाने का निर्णय भी लिया। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान में राजनीतिक तनाव अपने चरम पर है और सेना-नागरिक संबंधों पर भी सवाल उठ रहे हैं।

आगे क्या होगा

रावलपिंडी में सेना की तैनाती और पीटीआई के लॉन्ग मार्च के बीच टकराव की आशंका बढ़ती जा रही है। आलोचकों का कहना है कि अनुच्छेद 245 का इस्तेमाल राजनीतिक प्रदर्शनों को नियंत्रित करने के लिए किया जा रहा है, जो संवैधानिक मूल्यों पर सवाल खड़े करता है। 27 सितंबर की तारीख जैसे-जैसे नज़दीक आएगी, पाकिस्तान की राजनीतिक स्थिति और अधिक जटिल होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और क्यों रावलपिंडी जैसे शहर में जो इस्लामाबाद का प्रवेशद्वार भी है। सेना की तैनाती और लॉन्ग मार्च के बीच की यह टाइमिंग महज संयोग मानना कठिन है। यदि सरकार वास्तव में कानून-व्यवस्था को लेकर गंभीर है, तो उसे यह भी स्पष्ट करना होगा कि संवैधानिक विरोध-प्रदर्शन को रोकने के लिए सैन्य बल का उपयोग लोकतांत्रिक मानदंडों के अनुरूप कैसे है।
RashtraPress
22 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रावलपिंडी में सेना की तैनाती का आदेश किसने और क्यों दिया?
पाकिस्तान के गृह मंत्रालय ने 21 अगस्त को यह आदेश जारी किया, जो संविधान के अनुच्छेद 245 के तहत पंजाब गृह विभाग के अनुरोध पर आधारित है। आधिकारिक रूप से इसे 'संवेदनशील सुरक्षा कार्यों' के लिए बताया गया है, लेकिन यह कदम पीटीआई के 27 सितंबर के लॉन्ग मार्च से ठीक पहले आया है।
पाकिस्तान के अनुच्छेद 245 के तहत सेना कब तैनात की जा सकती है?
पाकिस्तानी संविधान का अनुच्छेद 245 संघीय सरकार को नागरिक प्रशासन की सहायता के लिए सशस्त्र बलों को तैनात करने का अधिकार देता है। इस प्रावधान का उपयोग आमतौर पर कानून-व्यवस्था की बड़ी चुनौतियों या आपात स्थितियों में किया जाता है।
पीटीआई का 27 सितंबर का लॉन्ग मार्च क्यों हो रहा है?
पीटीआई ने 27 सितंबर को इस्लामाबाद की ओर लॉन्ग मार्च का ऐलान किया है, जो पार्टी संस्थापक इमरान खान की जेल की सजा के तीन साल पूरे होने के अवसर पर है। पार्टी की माँगों में इमरान खान और उनकी पत्नी की तत्काल रिहाई, संवैधानिक शासन की बहाली और महंगाई से राहत शामिल हैं।
11 अगस्त को रावलपिंडी के मॉल रोड पर क्या हुआ था?
द एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, 11 अगस्त को रावलपिंडी के मॉल रोड पर एक हथियारबंद व्यक्ति ने कथित तौर पर सुरक्षा बलों पर गोलीबारी की और एक पेट्रोलिंग अधिकारी को घायल कर दिया। जवाबी कार्रवाई में उस व्यक्ति को मार गिराया गया। सुरक्षा सूत्रों के अनुसार वह खैबर जिले का रहने वाला था और पीटीआई का कथित सदस्य था।
विपक्षी दल इमरान खान के इलाज के मुद्दे पर अदालत क्यों जा रहे हैं?
विपक्षी दलों का आरोप है कि शहबाज सरकार इमरान खान के इलाज से संबंधित सर्वोच्च न्यायालय के आदेश को लागू करने में विफल रही है। इस मुद्दे पर अदालत का दरवाज़ा खटखटाने का फैसला शुक्रवार को लिया गया, जो लॉन्ग मार्च की तैयारियों के साथ-साथ चल रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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