डीआरसी: इबोला जागरूकता रेडियो कार्यक्रम से लौटे यूडीपीएस नेता मैरी-सेलेस्टिन करोंडवा की पीट-पीटकर हत्या
सारांश
मुख्य बातें
बुटेम्बो (डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो), 29 सितंबर 2026 — इबोला वायरस के विरुद्ध जागरूकता फैलाने के लिए रेडियो कार्यक्रम में हिस्सा लेकर लौट रहे यूनियन फॉर डिमोक्रेसी एंड सोशल प्रोग्रेस (यूडीपीएस) के बुटेम्बो संघीय कार्यकारिणी के कार्यवाहक अध्यक्ष मैरी-सेलेस्टिन करोंडवा की हमलावरों ने पीट-पीटकर हत्या कर दी। हमला रविवार को उस समय किया गया जब वह उक्त रेडियो स्टेशन से वापस लौट रहे थे। यूडीपीएस/त्शिसेकेदी फेडरेशन ने सोमवार को जारी शोक संदेश में उनकी मृत्यु की आधिकारिक पुष्टि की।
घटना का विवरण
पार्टी के अनुसार, करोंडवा ने उस रेडियो कार्यक्रम में भाग लिया था जिसमें उन्होंने स्थानीय समुदाय से इबोला वायरस के खतरे को गंभीरता से लेने और बचाव के उपाय अपनाने की अपील की थी। स्टेशन से लौटते समय हमलावरों ने उन्हें घेर लिया और बुरी तरह पीटा। हमलावरों ने उनका सामान लूट लिया और उनके घर में आग भी लगा दी। गंभीर चोटों के कारण बाद में उनकी मृत्यु हो गई।
हमले में शामिल लोगों की संख्या और उनकी पहचान अभी तक आधिकारिक तौर पर स्पष्ट नहीं हुई है। हमले के पीछे की सटीक मंशा भी अधिकारियों द्वारा अभी तक सार्वजनिक नहीं की गई है। हालाँकि, यूडीपीएस ने करोंडवा को इबोला जागरूकता के कारण निशाना बनाए गए 'निर्दोष पीड़ित' के रूप में वर्णित किया है और घटना की पूर्ण जाँच तथा दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की माँग की है।
पूर्वी डीआरसी में इबोला विरोधी अभियान की चुनौतियाँ
करोंडवा की हत्या ऐसे समय में हुई है जब पूर्वी डीआरसी में इबोला नियंत्रण अभियान अफवाहों, गलत सूचनाओं और स्वास्थ्यकर्मियों के प्रति गहरे अविश्वास से जूझ रहा है। यह ऐसी पहली घटना नहीं है — इससे पहले शनिवार को बुटेम्बो के निकट बेनी इलाके में एक हाथ धोने के चेकपॉइंट पर हथियारबंद लोगों ने हमला किया था, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई और कई लोग घायल हुए।
स्वास्थ्यकर्मियों और इबोला उपचार केंद्रों पर हमलों की एकाधिक घटनाएँ पहले भी दर्ज हो चुकी हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ये हमले संक्रमण नियंत्रण के सबसे महत्वपूर्ण उपायों — संक्रमित लोगों की पहचान, पृथक्करण, संपर्क-निगरानी और सुरक्षित अंतिम संस्कार — को गंभीर रूप से बाधित कर रहे हैं।
मौजूदा इबोला प्रकोप की स्थिति
डीआरसी में वर्तमान इबोला प्रकोप की घोषणा 15 मई 2026 को की गई थी। यह दुर्लभ बुंडीबुग्यो वायरस स्ट्रेन से फैल रहा है, जिसके लिए फिलहाल कोई स्वीकृत वैक्सीन या उपचार उपलब्ध नहीं है। स्वास्थ्य मंत्रालय के आँकड़ों के अनुसार 26 सितंबर 2026 तक 8,067 मामले और 3,901 मौतें दर्ज की जा चुकी हैं, और मृत्यु दर 48 प्रतिशत से अधिक है। संक्रमण देश के सात प्रांतों तक फैल चुका है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, बुटेम्बो और उत्तरी किवु इस समय प्रकोप के प्रमुख केंद्रों में हैं। यहाँ स्वास्थ्य केंद्रों में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जबकि समुदाय के एक हिस्से में फैली भ्रामक सूचनाएँ उपचार प्रयासों को कमज़ोर कर रही हैं।
इबोला का प्रसार और रोकथाम
इबोला वायरस संक्रमित व्यक्ति के शरीर के तरल पदार्थ या दूषित सामग्री के सीधे संपर्क से फैलता है। विशेषज्ञों के अनुसार, इसके नियंत्रण के लिए सामुदायिक सहयोग अनिवार्य है — किंतु स्वास्थ्यकर्मियों पर हो रहे हमले और जागरूकता फैलाने वालों की हत्या जैसी घटनाएँ इस सहयोग को तोड़ रही हैं। गौरतलब है कि डीआरसी पहले भी इबोला के कई प्रकोपों का सामना कर चुका है, लेकिन बुंडीबुग्यो वायरस स्ट्रेन के साथ मान्य चिकित्सा विकल्पों की अनुपस्थिति इस बार परिस्थितियों को और जटिल बनाती है।
आगे की राह
यूडीपीएस ने करोंडवा की हत्या की स्वतंत्र जाँच और दोषियों की शीघ्र गिरफ्तारी की माँग की है। इस घटना ने अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य संगठनों और डीआरसी सरकार के सामने यह सवाल और तीव्र कर दिया है कि इबोला जागरूकता कार्यकर्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित किए बिना प्रकोप को कैसे नियंत्रित किया जा सकेगा।