डीआरसी में इबोला प्रकोप: 506 मौतें, 1,561 संक्रमित; रेमडेसिविर से क्लीनिकल ट्रायल शुरू
सारांश
मुख्य बातें
लोकतांत्रिक गणराज्य कांगो (डीआरसी) में इबोला वायरस का प्रकोप गंभीर होता जा रहा है। देश के स्वास्थ्य अधिकारियों द्वारा 6 जुलाई को जारी रिपोर्ट के अनुसार, अब तक 1,561 लोगों में संक्रमण की पुष्टि हो चुकी है और 506 लोगों की मौत हो चुकी है। यह प्रकोप तीन प्रांतों के 36 स्वास्थ्य क्षेत्रों तक फैल चुका है, और हाल के हफ्तों में संक्रमण की रफ्तार में चिंताजनक तेज़ी देखी गई है।
महामारी का मौजूदा दायरा
स्वास्थ्य अधिकारियों के आँकड़ों के अनुसार, 1,561 पुष्ट संक्रमितों में से 254 मरीज स्वस्थ होकर घर लौट चुके हैं, जबकि 628 संक्रमित अभी भी आइसोलेशन या अस्पताल में भर्ती हैं। इसके अतिरिक्त 354 संदिग्ध मामले भी दर्ज किए गए हैं, जिनमें 110 लोगों की मौत हुई है।
गौरतलब है कि महामारी के 25वें और 26वें सप्ताह में 300 से अधिक नए पुष्ट मामले दर्ज किए गए — जो इस प्रकोप की शुरुआत के बाद किसी भी दो-सप्ताही अवधि में सबसे अधिक हैं। यह आँकड़ा स्पष्ट करता है कि समुदाय स्तर पर संक्रमण की कड़ी अभी टूटी नहीं है।
क्लीनिकल ट्रायल की शुरुआत
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने बताया कि बुंडीबुग्यो इबोलावायरस से होने वाली इस बीमारी के संभावित उपचार की जाँच के लिए क्लीनिकल ट्रायल शुरू कर दिया गया है। यह ट्रायल इतुरी प्रांत के रवामपारा स्वास्थ्य क्षेत्र स्थित सीएमई इबोला उपचार केंद्र में आरंभ हुआ है, जिसे इस प्रकोप का मुख्य केंद्र माना जा रहा है।
WHO ने घोषणा की कि अध्ययन में पहला प्रतिभागी शामिल कर लिया गया है। यह ट्रायल तीन संभावित उपचार विकल्पों की प्रभावशीलता परख रहा है — एंटीवायरल दवा रेमडेसिविर, प्रायोगिक एंटीबॉडी उपचार एमबीपी134, और इन दोनों का संयोजन। उल्लेखनीय है कि अभी तक बुंडीबुग्यो वायरस के विरुद्ध कोई स्वीकृत वैक्सीन या विशेष उपचार उपलब्ध नहीं है।
निगरानी और मूल्यांकन प्रक्रिया
WHO के शोध सलाहकार डॉ. वसी मूर्ति के अनुसार, ट्रायल में शामिल प्रत्येक मरीज की इलाज शुरू होने के बाद 28 दिनों तक निगरानी की जाएगी, ताकि उपचार के परिणामों का वैज्ञानिक आकलन किया जा सके।
अंतरराष्ट्रीय साझेदारी
यह WHO-समर्थित क्लीनिकल ट्रायल कई संस्थानों की संयुक्त पहल है। इसमें कांगो का राष्ट्रीय बायोमेडिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट (INRB), ब्रिटेन की ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी, बेल्जियम का एंटवर्प इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रॉपिकल मेडिसिन, और अन्य अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य संगठन भागीदार हैं। यह सहयोग इस बात का संकेत है कि वैश्विक स्वास्थ्य समुदाय इस प्रकोप को स्थानीय नहीं, बल्कि साझा चुनौती के रूप में देख रहा है।
आगे की राह
यह ऐसे समय में आया है जब डीआरसी पहले भी कई इबोला प्रकोपों का सामना कर चुका है — 2018-2020 का प्रकोप अब तक का सबसे घातक था जिसमें 2,000 से अधिक मौतें हुई थीं। क्लीनिकल ट्रायल के नतीजे न केवल मौजूदा प्रकोप के लिए, बल्कि भविष्य में बुंडीबुग्यो वायरस के किसी भी उभार से निपटने के लिए वैज्ञानिक आधार तैयार करेंगे।