चीन-ऑस्ट्रेलिया मुद्रा स्वैप समझौता विस्तारित: 220 अरब RMB और 46 अरब AUD, पाँच साल के लिए वैध
सारांश
मुख्य बातें
चीनी जन बैंक (PBC) और ऑस्ट्रेलियाई रिज़र्व बैंक (RBA) ने अपने द्विपक्षीय मुद्रा अदला-बदली (करेंसी स्वैप) समझौते का नवीनीकरण और विस्तार किया है। नए समझौते के तहत स्वैप सीमा को 200 अरब RMB और 41 अरब ऑस्ट्रेलियाई डॉलर से बढ़ाकर 220 अरब RMB और 46 अरब ऑस्ट्रेलियाई डॉलर कर दिया गया है। यह समझौता पाँच वर्षों के लिए प्रभावी रहेगा और दोनों पक्षों की सहमति से इसे आगे भी बढ़ाया जा सकता है।
समझौते का विस्तार: क्या बदला
पिछले समझौते की तुलना में स्वैप राशि में 20 अरब RMB और 5 अरब ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की वृद्धि की गई है। यह वृद्धि दोनों देशों के बीच बढ़ते आर्थिक और व्यापारिक संबंधों को दर्शाती है। करेंसी स्वैप समझौते के तहत दोनों केंद्रीय बैंक आपस में अपनी-अपनी मुद्राओं का आदान-प्रदान कर सकते हैं, जिससे वित्तीय संकट के समय तरलता सुनिश्चित होती है।
PBC का बयान और उद्देश्य
चीनी जन बैंक ने इस समझौते के नवीनीकरण पर कहा कि इससे दोनों देशों के बीच मौद्रिक और वित्तीय सहयोग को और मज़बूती मिलेगी। बैंक के अनुसार, यह कदम द्विपक्षीय व्यापार और निवेश को प्रोत्साहन देगा तथा वित्तीय बाज़ार की स्थिरता बनाए रखने में सहायक होगा। गौरतलब है कि करेंसी स्वैप व्यवस्था दोनों देशों के आयातकों-निर्यातकों को तीसरी मुद्रा (जैसे अमेरिकी डॉलर) पर निर्भरता कम करने का विकल्प देती है।
व्यापक संदर्भ: चीन-ऑस्ट्रेलिया संबंध
यह समझौता ऐसे समय में आया है जब चीन और ऑस्ट्रेलिया के द्विपक्षीय संबंध हाल के वर्षों में उतार-चढ़ाव के बाद धीरे-धीरे सामान्य होने की दिशा में बढ़ रहे हैं। दोनों देशों के बीच व्यापार संबंध महत्त्वपूर्ण हैं — ऑस्ट्रेलिया के लिए चीन सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। करेंसी स्वैप समझौते का विस्तार इस आर्थिक निकटता को संस्थागत समर्थन देता है।
आगे क्या
समझौता पाँच वर्षों तक प्रभावी रहेगा। दोनों केंद्रीय बैंकों की आपसी सहमति से इसे आगे नवीनीकृत किया जा सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह के स्वैप समझौते वैश्विक वित्तीय अनिश्चितता के दौर में द्विपक्षीय व्यापार को डॉलर-निर्भरता से मुक्त करने की दिशा में एक सकारात्मक कदम हैं।