चीन-अमेरिका शुल्क कटौती: दोनों देश ₹30 अरब डॉलर के टैरिफ ढाँचे पर जनता से राय माँग रहे हैं
सारांश
मुख्य बातें
चीनी वाणिज्य मंत्रालय ने 23 जुलाई 2026 को पुष्टि की कि चीन और अमेरिका दोनों देश पारस्परिक शुल्क कटौती व्यवस्थाओं पर अपने-अपने हितधारकों से व्यापक राय जुटा रहे हैं, जो प्रत्येक देश के लिए 30 अरब डॉलर के टैरिफ कटौती ढाँचे को अंतिम रूप देने की दिशा में एक अहम कदम है। यह जानकारी चीनी राज्य परिषद के प्रेस कार्यालय द्वारा आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में सामने आई, जिसमें 2026 की पहली छमाही के व्यापार प्रदर्शन का भी लेखा-जोखा प्रस्तुत किया गया।
शुल्क कटौती व्यवस्था पर क्या हो रहा है
चीनी वाणिज्य मंत्रालय के विदेशी निवेश प्रशासन विभाग की महानिदेशक मेंग हुआटिंग ने बताया कि दोनों देशों की व्यापार टीमें व्यापार परिषद की संरचना, कार्यों और संचालन मॉडल की विशिष्ट व्यवस्थाओं पर घनिष्ठ संचार बनाए हुए हैं। चीन की ओर से घरेलू उद्यमों, व्यापार संघों, स्थानीय सरकारों तथा अमेरिकी वित्तपोषित उद्यमों और व्यापार संघों से इन समझौतों पर राय ली जा रही है। उधर, अमेरिका भी व्यापार परिषद और पारस्परिक शुल्क कटौती समझौतों पर अपनी जनता से परामर्श कर रहा है।
दोनों पक्षों का साझा लक्ष्य
मेंग हुआटिंग के अनुसार दोनों पक्ष यथाशीघ्र विशिष्ट उत्पाद शुल्क कटौती व्यवस्थाओं पर सहमति बनाने और उनके कार्यान्वयन को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं, ताकि द्विपक्षीय व्यापार को और अधिक गति दी जा सके। यह ऐसे समय में आया है जब दोनों अर्थव्यवस्थाओं के बीच व्यापार तनाव को कम करने की कोशिशें जारी हैं और वैश्विक बाज़ारों की नज़रें इस प्रक्रिया पर टिकी हैं।
चीन में विदेशी निवेश का प्रदर्शन
प्रेस कॉन्फ्रेंस में वाणिज्य उप मंत्री येन डोंग ने बताया कि 2026 की पहली छमाही में चीन में नव स्थापित विदेशी निवेशित उद्यमों की संख्या में गत वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 5.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जिससे 402.14 अरब युआन का निवेश आकर्षित हुआ। गौरतलब है कि उच्च-तकनीकी उद्योगों में निवेश में 33.2 प्रतिशत की उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई, जो कुल विदेशी निवेश का 42.4 प्रतिशत है। इसी अवधि में लगभग 4,800 विदेशी कंपनियों ने चीन में अपना निवेश बढ़ाया, जो चीनी बाज़ार के प्रति निवेशकों के आशावाद को दर्शाता है।
आगे क्या होगा
दोनों देशों की टीमें घनिष्ठ संचार बनाए रखते हुए विशिष्ट उत्पाद-वार शुल्क कटौती व्यवस्थाओं पर सहमति की दिशा में काम करेंगी। विश्लेषकों का मानना है कि जनता और उद्योग से प्राप्त राय इन व्यवस्थाओं के अंतिम स्वरूप को काफी हद तक प्रभावित कर सकती है। यदि दोनों पक्ष समय पर सहमति पर पहुँचते हैं, तो यह वैश्विक व्यापार परिदृश्य के लिए एक सकारात्मक संकेत होगा।