डीआरसी में इबोला संकट गहराया: 710 पुष्ट मामले, 149 मौतें; WHO ने चेताया — मृत्यु दर कम आंकी गई
सारांश
मुख्य बातें
डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (डीआरसी) में इबोला वायरस के पुष्ट मामलों की संख्या बढ़कर 710 हो गई है और अब तक 149 लोगों की मौत हो चुकी है। 14 जून 2026 तक उपलब्ध स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, मृत्यु दर 21.0 प्रतिशत दर्ज की गई है। 324 मरीज फिलहाल आइसोलेशन में या अस्पताल में भर्ती हैं, जबकि केवल 35 लोग अब तक स्वस्थ होकर घर लौटे हैं।
प्रकोप की पृष्ठभूमि और वर्तमान स्थिति
यह प्रकोप 15 मई 2026 को डीआरसी के स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा आधिकारिक तौर पर घोषित किया गया था। यह देश का 17वाँ इबोला प्रकोप है, जब से 1976 में इस वायरस की पहचान हुई थी। इस बार बंडिबुग्यो प्रकार का इबोला वायरस सामने आया है, जिसके लिए फिलहाल कोई स्वीकृत वैक्सीन या विशेष उपचार उपलब्ध नहीं है — हालाँकि संभावित टीकों पर परीक्षण जारी हैं। मई 2026 में डीआरसी के साथ-साथ पड़ोसी देश युगांडा में भी इस प्रकोप की पुष्टि हुई थी।
WHO की चेतावनी और असली खतरा
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने शनिवार को जारी अपनी रिपोर्ट में कहा कि डीआरसी में यह प्रकोप तेज़ी से बढ़ रहा है और मामलों की संख्या के साथ-साथ प्रभावित क्षेत्रों का दायरा भी विस्तृत हो रहा है। WHO के अनुसार, दर्ज की गई मृत्यु दर वास्तव में कम आंकी गई हो सकती है, क्योंकि प्रकोप घोषित होने से पहले हुई कई मौतों की जाँच अभी भी जारी है।
गौरतलब है कि इतुरी प्रांत में विस्थापित लोगों के एक शरणार्थी शिविर में इबोला से जुड़ी दो मौतें दर्ज की गई हैं — यह जानकारी संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायुक्त (UNHCR) की रिपोर्ट में सामने आई है। यह इस बात का संकेत है कि वायरस कमज़ोर और विस्थापित आबादी तक भी पहुँच रहा है।
प्रमुख चुनौतियाँ
इस हफ्ते की शुरुआत में आई एक रिपोर्ट में कई गंभीर बाधाओं का उल्लेख किया गया। इनमें शामिल हैं — शवों की जाँच से लोगों का हिचकिचाना, इबोला उपचार केंद्रों में क्षमता की कमी, नॉर्थ किवु में संक्रमण रोकने के लिए ज़रूरी सामग्री का अभाव, तीन प्रांतों में कमज़ोर अलर्ट प्रणाली, और 2.15 करोड़ डॉलर की फंडिंग की कमी। ये कमियाँ प्रतिक्रिया तंत्र को गंभीर रूप से प्रभावित कर रही हैं।
सरकार की प्रतिक्रिया और अफवाहों का खंडन
डीआरसी के स्वास्थ्य मंत्रालय ने सोशल मीडिया पर तेज़ी से फैल रही लॉकडाउन की अफवाहों को सिरे से खारिज किया है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि प्रभावित इलाकों में न तो कोई लॉकडाउन लगाया गया है और न ही ऐसी कोई योजना है। नागरिकों से अपील की गई है कि वे बिना पुष्टि वाली सूचनाएँ न फैलाएँ और केवल आधिकारिक स्रोतों पर भरोसा करें।
मंत्रालय ने बताया कि सरकार, प्रांतीय प्रशासन, सहयोगी संस्थाएँ और स्थानीय समुदाय मिलकर संक्रमण की श्रृंखला तोड़ने के लिए काम कर रहे हैं। ज़मीन पर तैनात टीमें बीमारी की निगरानी, मरीज़ों का उपचार, संपर्क में आए लोगों की ट्रेसिंग, लक्षित टीकाकरण और समुदाय के साथ संवाद जैसे कार्य कर रही हैं।
आगे की राह
यह ऐसे समय में आया है जब डीआरसी पहले से ही सशस्त्र संघर्ष और मानवीय संकट से जूझ रहा है, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच सीमित है। फंडिंग की कमी और बुनियादी ढाँचे की कमज़ोरियों को देखते हुए, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और संसाधनों की तत्काल आपूर्ति इस प्रकोप को नियंत्रित करने की कुंजी होगी।