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डीआरसी में इबोला संकट गहराया: 710 पुष्ट मामले, 149 मौतें; WHO ने चेताया — मृत्यु दर कम आंकी गई

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डीआरसी में इबोला संकट गहराया: 710 पुष्ट मामले, 149 मौतें; WHO ने चेताया — मृत्यु दर कम आंकी गई

सारांश

डीआरसी में इबोला का 17वाँ प्रकोप तेज़ी से फैल रहा है — 710 पुष्ट मामले, 149 मौतें और WHO की चेतावनी कि असली आँकड़े और भयावह हो सकते हैं। बंडिबुग्यो वैरिएंट के लिए कोई स्वीकृत वैक्सीन नहीं, फंडिंग में 2.15 करोड़ डॉलर की कमी — और संकट अभी थमने का नाम नहीं ले रहा।

मुख्य बातें

डीआरसी में इबोला के पुष्ट मामले बढ़कर 710 हुए, 149 मौतें दर्ज; मृत्यु दर 21.0% ।
324 मरीज़ आइसोलेशन या अस्पताल में भर्ती; केवल 35 लोग अब तक स्वस्थ।
WHO ने चेताया कि दर्ज मृत्यु दर वास्तविकता से कम हो सकती है; प्रकोप का विस्तार जारी।
यह देश का 17वाँ इबोला प्रकोप है; बंडिबुग्यो वैरिएंट के लिए कोई स्वीकृत वैक्सीन उपलब्ध नहीं।
प्रतिक्रिया में 2.15 करोड़ डॉलर की फंडिंग कमी, उपचार केंद्रों में क्षमता का अभाव।
UNHCR के अनुसार, इतुरी के शरणार्थी शिविर में इबोला से 2 मौतें दर्ज।

डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (डीआरसी) में इबोला वायरस के पुष्ट मामलों की संख्या बढ़कर 710 हो गई है और अब तक 149 लोगों की मौत हो चुकी है। 14 जून 2026 तक उपलब्ध स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, मृत्यु दर 21.0 प्रतिशत दर्ज की गई है। 324 मरीज फिलहाल आइसोलेशन में या अस्पताल में भर्ती हैं, जबकि केवल 35 लोग अब तक स्वस्थ होकर घर लौटे हैं।

प्रकोप की पृष्ठभूमि और वर्तमान स्थिति

यह प्रकोप 15 मई 2026 को डीआरसी के स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा आधिकारिक तौर पर घोषित किया गया था। यह देश का 17वाँ इबोला प्रकोप है, जब से 1976 में इस वायरस की पहचान हुई थी। इस बार बंडिबुग्यो प्रकार का इबोला वायरस सामने आया है, जिसके लिए फिलहाल कोई स्वीकृत वैक्सीन या विशेष उपचार उपलब्ध नहीं है — हालाँकि संभावित टीकों पर परीक्षण जारी हैं। मई 2026 में डीआरसी के साथ-साथ पड़ोसी देश युगांडा में भी इस प्रकोप की पुष्टि हुई थी।

WHO की चेतावनी और असली खतरा

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने शनिवार को जारी अपनी रिपोर्ट में कहा कि डीआरसी में यह प्रकोप तेज़ी से बढ़ रहा है और मामलों की संख्या के साथ-साथ प्रभावित क्षेत्रों का दायरा भी विस्तृत हो रहा है। WHO के अनुसार, दर्ज की गई मृत्यु दर वास्तव में कम आंकी गई हो सकती है, क्योंकि प्रकोप घोषित होने से पहले हुई कई मौतों की जाँच अभी भी जारी है।

गौरतलब है कि इतुरी प्रांत में विस्थापित लोगों के एक शरणार्थी शिविर में इबोला से जुड़ी दो मौतें दर्ज की गई हैं — यह जानकारी संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायुक्त (UNHCR) की रिपोर्ट में सामने आई है। यह इस बात का संकेत है कि वायरस कमज़ोर और विस्थापित आबादी तक भी पहुँच रहा है।

प्रमुख चुनौतियाँ

इस हफ्ते की शुरुआत में आई एक रिपोर्ट में कई गंभीर बाधाओं का उल्लेख किया गया। इनमें शामिल हैं — शवों की जाँच से लोगों का हिचकिचाना, इबोला उपचार केंद्रों में क्षमता की कमी, नॉर्थ किवु में संक्रमण रोकने के लिए ज़रूरी सामग्री का अभाव, तीन प्रांतों में कमज़ोर अलर्ट प्रणाली, और 2.15 करोड़ डॉलर की फंडिंग की कमी। ये कमियाँ प्रतिक्रिया तंत्र को गंभीर रूप से प्रभावित कर रही हैं।

सरकार की प्रतिक्रिया और अफवाहों का खंडन

डीआरसी के स्वास्थ्य मंत्रालय ने सोशल मीडिया पर तेज़ी से फैल रही लॉकडाउन की अफवाहों को सिरे से खारिज किया है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि प्रभावित इलाकों में न तो कोई लॉकडाउन लगाया गया है और न ही ऐसी कोई योजना है। नागरिकों से अपील की गई है कि वे बिना पुष्टि वाली सूचनाएँ न फैलाएँ और केवल आधिकारिक स्रोतों पर भरोसा करें।

मंत्रालय ने बताया कि सरकार, प्रांतीय प्रशासन, सहयोगी संस्थाएँ और स्थानीय समुदाय मिलकर संक्रमण की श्रृंखला तोड़ने के लिए काम कर रहे हैं। ज़मीन पर तैनात टीमें बीमारी की निगरानी, मरीज़ों का उपचार, संपर्क में आए लोगों की ट्रेसिंग, लक्षित टीकाकरण और समुदाय के साथ संवाद जैसे कार्य कर रही हैं।

आगे की राह

यह ऐसे समय में आया है जब डीआरसी पहले से ही सशस्त्र संघर्ष और मानवीय संकट से जूझ रहा है, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच सीमित है। फंडिंग की कमी और बुनियादी ढाँचे की कमज़ोरियों को देखते हुए, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और संसाधनों की तत्काल आपूर्ति इस प्रकोप को नियंत्रित करने की कुंजी होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

फंडिंग में 2.15 करोड़ डॉलर की कमी है, और अलर्ट सिस्टम तीन प्रांतों में कमज़ोर है — फिर भी अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्रतिक्रिया प्रकोप घोषित होने के हफ्तों बाद भी अधूरी दिखती है। WHO की यह स्वीकारोक्ति कि मृत्यु दर कम आंकी गई हो सकती है, बताती है कि ज़मीनी निगरानी तंत्र अभी भी पर्याप्त नहीं है। जब तक फंडिंग और क्षमता की कमी को युद्धस्तर पर नहीं भरा जाता, यह संख्या और बढ़ेगी।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

डीआरसी में इबोला प्रकोप की मौजूदा स्थिति क्या है?
14 जून 2026 तक डीआरसी में इबोला के 710 पुष्ट मामले सामने आए हैं और 149 लोगों की मौत हो चुकी है। मृत्यु दर 21.0% दर्ज है, जबकि WHO ने चेताया है कि वास्तविक आँकड़े इससे अधिक हो सकते हैं।
इस बार कौन-सा इबोला वैरिएंट फैल रहा है और क्या इसका इलाज है?
इस प्रकोप में बंडिबुग्यो प्रकार का इबोला वायरस शामिल है। इस वैरिएंट के लिए फिलहाल कोई स्वीकृत वैक्सीन या विशेष उपचार उपलब्ध नहीं है, हालाँकि संभावित टीकों पर परीक्षण जारी हैं।
क्या डीआरसी में इबोला के कारण लॉकडाउन लगाया गया है?
नहीं। डीआरसी के स्वास्थ्य मंत्रालय ने लॉकडाउन की सभी अफवाहों को खारिज किया है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि प्रभावित इलाकों में न कोई लॉकडाउन है और न ही ऐसी कोई योजना बनाई गई है।
इस प्रकोप से निपटने में सबसे बड़ी चुनौतियाँ क्या हैं?
प्रमुख चुनौतियों में 2.15 करोड़ डॉलर की फंडिंग कमी, उपचार केंद्रों में क्षमता का अभाव, नॉर्थ किवु में ज़रूरी सामग्री की कमी और तीन प्रांतों में कमज़ोर अलर्ट प्रणाली शामिल हैं। इसके अलावा शवों की जाँच से लोगों का हिचकिचाना भी संक्रमण नियंत्रण में बाधा बन रहा है।
यह डीआरसी का कौन-सा इबोला प्रकोप है और इसकी शुरुआत कब हुई?
यह डीआरसी का 17वाँ इबोला प्रकोप है, जिसे 15 मई 2026 को आधिकारिक तौर पर घोषित किया गया था। 1976 में वायरस की पहचान के बाद से यह देश में इबोला का सबसे लंबा सिलसिला है।
राष्ट्र प्रेस
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