डीआरसी में इबोला विकराल: 515 पुष्ट मामले, 91 मौतें; संपर्क निगरानी सिर्फ 50% पर
सारांश
मुख्य बातें
डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (डीआरसी) में इबोला वायरस का प्रकोप तेज़ी से बढ़ रहा है — 8 जून 2026 तक पुष्ट मामलों की संख्या 515 पर पहुँच गई है और 91 लोगों की जान जा चुकी है। स्वास्थ्य अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि तत्काल और प्रभावी नियंत्रण उपाय नहीं अपनाए गए, तो संक्रमण की रफ़्तार और बढ़ सकती है।
मुख्य घटनाक्रम
स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से रविवार (स्थानीय समय) को जारी अपडेट के अनुसार, तीन और मरीज़ स्वस्थ हो गए हैं, जिससे 6 जून 2026 तक ठीक होने वालों की कुल संख्या 12 हो गई है। इसके साथ ही 117 मामले अभी भी संदिग्ध श्रेणी में दर्ज हैं, जबकि 283 मरीज़ आइसोलेशन या अस्पताल में उपचाराधीन हैं।
यह प्रकोप इबोला वायरस के बुंडिबुग्यो स्ट्रेन से उत्पन्न हुआ है और 15 मई 2026 को स्वास्थ्य मंत्रालय ने इसे आधिकारिक रूप से घोषित किया था।
संक्रमण फैलाव का पैटर्न
रिपोर्टों के अनुसार, बड़ी संख्या में मरीज़ों में 14 मई से 23 मई के बीच लक्षण प्रकट हुए, जो यह संकेत देता है कि प्रारंभिक संक्रमण संभवतः किसी एकल स्रोत से तेज़ी से फैला। 18 मई के आसपास मामलों में सबसे तीव्र वृद्धि दर्ज की गई।
इसके बाद 25 मई से 3 जून के बीच एक अलग समूह में लक्षण उभरे, जो 'द्वितीयक प्रसार' का संकेत है और यह आशंका जताई जा रही है कि यह आगे संक्रमण का एक बड़ा स्रोत बन सकता है।
नियंत्रण में बाधाएँ
अधिकारियों के अनुसार इस प्रकोप पर काबू पाने में कई गंभीर चुनौतियाँ सामने आ रही हैं। इनमें संक्रमित संपर्कों की सटीक ट्रैकिंग न हो पाना, समुदाय द्वारा पोस्ट-मॉर्टम जाँच में असहयोग, इबोला उपचार केंद्रों में सुविधाओं की कमी, संक्रमण नियंत्रण सामग्री की अनुपलब्धता और वित्त पोषण की कमी शामिल हैं।
तीन प्रभावित प्रांतों में संपर्क निगरानी दर मात्र 50.3 प्रतिशत है, जबकि निर्धारित लक्ष्य 95 प्रतिशत था — यह अंतर स्थिति की गंभीरता को रेखांकित करता है।
प्रयोगशाला क्षमता पर दबाव
नॉर्थ किवु प्रांत में रिएजेंट की कमी के कारण 193 परीक्षणों के परिणाम अभी भी लंबित हैं। लैब क्षमता पर बढ़ता दबाव समय पर निदान को बाधित कर रहा है, जो संक्रमण श्रृंखला तोड़ने के लिए अत्यंत आवश्यक है।
स्वास्थ्य मंत्रालय ने स्पष्ट चेतावनी दी है: 'अगर तुरंत और सही कदम नहीं उठाए गए तो मामलों में और बढ़ोतरी हो सकती है।' अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य संगठनों और सहयोगी देशों से संसाधन सहायता की उम्मीद की जा रही है, क्योंकि डीआरसी अकेले इस संकट से निपटने में सक्षम नहीं दिख रहा।