कांगो में इबोला के 550 मामले, 101 मौतें; बुंडिबुग्यो स्ट्रेन का प्रकोप हर हफ्ते बढ़ रहा
सारांश
मुख्य बातें
डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC) में इबोला के कुल मामले बढ़कर 550 हो गए हैं, जिनमें अब तक 101 मौतें दर्ज की जा चुकी हैं। स्वास्थ्य अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यह प्रकोप अभी भी नियंत्रण में नहीं आया है और साप्ताहिक आधार पर मामले बढ़ते जा रहे हैं। 9 जून को जारी ताज़ा अपडेट के अनुसार, यह संकट पूर्वी प्रांतों में गहराता जा रहा है।
ताज़ा आंकड़े और मौजूदा स्थिति
सोमवार को जारी आधिकारिक अपडेट के अनुसार, रविवार को अकेले पूर्वी प्रांतों इतुरी और नॉर्थ किवु में 35 नए मामले सामने आए, जिनमें 10 मौतें शामिल हैं। इस दौरान 7 मरीज़ स्वस्थ हुए, जिससे अब तक ठीक होने वालों की कुल संख्या 19 हो गई है। रविवार तक 309 लोग आइसोलेशन में या अस्पताल में भर्ती थे — इनमें 116 पुष्ट और 193 संदिग्ध मामले शामिल हैं।
कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग में गंभीर खामियाँ
प्रभावित तीनों प्रांतों में कॉन्टैक्ट फॉलो-अप दर बढ़कर 64.4% हो गई है — 5,418 संपर्कों की पहचान की गई, जिनमें से 3,489 की जाँच हुई। हालाँकि यह आँकड़ा 95% के निर्धारित लक्ष्य से काफी नीचे है, जो महामारी नियंत्रण की दृष्टि से चिंताजनक है। गौरतलब है कि नॉर्थ किवु में रिएजेंट की कमी के कारण 183 टेस्ट के नतीजे अभी भी लंबित हैं, जिससे लैब की क्षमता पर भारी दबाव बना हुआ है।
आंकड़ों में गिरावट भ्रामक हो सकती है
अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि हाल के दिनों में मामलों में दिखी मामूली गिरावट वास्तविक नहीं हो सकती। उनके अनुसार, यह गिरावट प्रयोगशाला से अपडेट मिलने में देरी की वजह से हो सकती है, न कि संक्रमण की रफ्तार धीमी होने के कारण। बीमारी का प्रकोप अभी भी हर हफ्ते बढ़ रहा है।
प्रभावित क्षेत्र और जनसंख्या पर असर
प्रभावित तीन प्रांतों — इतुरी, नॉर्थ किवु और साउथ किवु — की संयुक्त आबादी लगभग 1.5 करोड़ है। इन क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर आंतरिक विस्थापन हो रहा है और लोग पड़ोसी देशों की ओर पलायन कर रहे हैं, जिससे संक्रमण के अन्य देशों तक फैलने का खतरा बढ़ गया है। इस प्रकोप की आधिकारिक घोषणा DRC के स्वास्थ्य मंत्रालय ने 15 मई को की थी।
बुंडिबुग्यो स्ट्रेन क्या है
मौजूदा प्रकोप इबोला वायरस के बुंडिबुग्यो स्ट्रेन से फैला है। यह स्ट्रेन अधिक सामान्य जैरे स्ट्रेन की तुलना में कम आम है, लेकिन इससे गंभीर बीमारी और मृत्यु हो सकती है। इबोला की पहचान सबसे पहले 1976 में तत्कालीन जैरे (अब DRC) और सूडान (अब दक्षिण सूडान) में एक साथ फैले संक्रमण के दौरान हुई थी। यह वायरस फिलोविरिडे परिवार से संबंधित है और मनुष्यों के साथ-साथ अन्य प्राइमेट्स को भी प्रभावित करता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग दर लक्ष्य के करीब नहीं पहुँचती और लैब क्षमता नहीं बढ़ती, तब तक इस प्रकोप पर काबू पाना कठिन बना रहेगा।