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डीआरसी में इबोला का 17वाँ प्रकोप: 101 पुष्ट मामले, 220 मौतें; स्वास्थ्य मंत्री बोले — काबू पाने में 6 महीने लगेंगे

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डीआरसी में इबोला का 17वाँ प्रकोप: 101 पुष्ट मामले, 220 मौतें; स्वास्थ्य मंत्री बोले — काबू पाने में 6 महीने लगेंगे

सारांश

डीआरसी में इबोला का 17वाँ प्रकोप — और इस बार दुर्लभ बुंडीबुग्यो स्ट्रेन, जिसके लिए कोई वैक्सीन नहीं। 101 पुष्ट मामले, 220 मौतें, और स्वास्थ्य मंत्री का साफ़ बयान: काबू पाने में छह महीने लग सकते हैं। WHO ने राष्ट्रीय स्तर पर 'बहुत उच्च जोखिम' घोषित किया है।

मुख्य बातें

डीआरसी में इबोला के 101 प्रयोगशाला-पुष्ट मामले और लगभग 220 मौतें दर्ज; संदिग्ध मामले करीब 1,000 तक पहुँचे।
स्वास्थ्य मंत्री रोजर कांबा के अनुसार महामारी को पूरी तरह नियंत्रित करने में 4 से 6 महीने लग सकते हैं।
प्रकोप बुंडीबुग्यो स्ट्रेन से फैला है — इस स्ट्रेन के लिए कोई स्वीकृत वैक्सीन या विशेष उपचार उपलब्ध नहीं।
संक्रमण इटुरी, नॉर्थ किवू और साउथ किवू प्रांतों तक सीमित; मोंगबवालू कस्बा मुख्य केंद्र।
WHO ने राष्ट्रीय स्तर पर 'बहुत उच्च जोखिम' और क्षेत्रीय स्तर पर 'उच्च जोखिम' घोषित किया।
सरकार जुलाई 2026 से 60,000 सामुदायिक स्वास्थ्यकर्मी तैनात करने की योजना बना रही है।

डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (डीआरसी) में इबोला वायरस का प्रकोप तेज़ी से फैल रहा है। देश के स्वास्थ्य मंत्री रोजर कांबा ने 27 मई 2026 को एक प्रेस ब्रीफिंग में बताया कि राष्ट्र अभी इस महामारी की प्रारंभिक अवस्था में है और इसे पूरी तरह नियंत्रित करने में चार से छह महीने तक का समय लग सकता है। 1976 के बाद से यह देश का 17वाँ इबोला प्रकोप है।

मौजूदा स्थिति और आँकड़े

स्वास्थ्य मंत्री कांबा के अनुसार, इबोला जैसे लक्षण वाले लोगों की संख्या लगभग 1,000 तक पहुँच चुकी है, जबकि 101 मामलों की प्रयोगशाला जाँच से पुष्टि हो चुकी है। मंगलवार शाम तक लगभग 220 लोगों की मौत दर्ज की गई है, जिनमें से 17 के इबोला संक्रमित होने की आधिकारिक पुष्टि हुई है। इनके संपर्क में आए करीब 3,600 लोगों की निगरानी की जा रही है।

मंत्री ने स्पष्ट किया कि ये आँकड़े अभी भी अस्थायी हैं। सरकार ने जाँच और प्रयोगशाला परीक्षण जारी रहने के बावजूद संदिग्ध मामलों की सबसे व्यापक संभव संख्या सार्वजनिक करने का निर्णय लिया है।

प्रभावित क्षेत्र और संक्रमण का केंद्र

कांबा ने बताया कि फिलहाल प्रकोप इटुरी, नॉर्थ किवू और साउथ किवू प्रांतों तक सीमित है। इन पूर्वी प्रांतों के बाहर कहीं से भी संक्रमण की पुष्टि नहीं हुई है। इटुरी का मोंगबवालू कस्बा संक्रमण का मुख्य केंद्र बना हुआ है।

यह ऐसे समय में आया है जब डीआरसी के पूर्वी हिस्से पहले से ही सशस्त्र संघर्ष और कमज़ोर स्वास्थ्य अवसंरचना से जूझ रहे हैं, जिससे राहत अभियानों की राह और कठिन हो जाती है।

बुंडीबुग्यो स्ट्रेन: वैक्सीन का अभाव

स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि यह प्रकोप बुंडीबुग्यो स्ट्रेन के कारण फैला है, जो इबोला वायरस का अपेक्षाकृत दुर्लभ प्रकार है। इस स्ट्रेन की पहचान इसलिए भी मुश्किल है क्योंकि इसके शुरुआती लक्षण — बुखार, उल्टी और दस्त — मलेरिया जैसे लगते हैं। गंभीर बात यह है कि इस स्ट्रेन के लिए अभी तक कोई स्वीकृत वैक्सीन या विशेष उपचार उपलब्ध नहीं है। मरीजों का इलाज मुख्यतः सहायक चिकित्सा के ज़रिए हो रहा है — जिसमें शरीर में पानी की कमी दूर करना, सांस संबंधी दिक्कतों का प्रबंधन और एनीमिया का उपचार शामिल है।

WHO की चेतावनी और सरकारी प्रतिक्रिया

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इस प्रकोप को राष्ट्रीय स्तर पर 'बहुत उच्च जोखिम' और क्षेत्रीय स्तर पर 'उच्च जोखिम' की श्रेणी में रखा है, हालाँकि वैश्विक स्तर पर खतरा अभी कम आँका गया है। सरकार ने हज़ारों लोगों की निगरानी शुरू कर दी है और मोबाइल लैब के ज़रिए जाँच क्षमता बढ़ाई जा रही है।

कांबा ने यह भी स्वीकार किया कि राहत कार्यों में अफवाहें और अंधविश्वास बड़ी बाधा बन रहे हैं। कुछ समुदाय बीमारी को 'रहस्यमयी' मानते हुए संक्रमित शवों को पारंपरिक तरीके से दफनाने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे संक्रमण फैलने का खतरा और बढ़ जाता है।

आगे की योजना

सरकार जुलाई 2026 से देशभर में 60,000 सामुदायिक स्वास्थ्यकर्मियों की भर्ती करने की तैयारी में है, ताकि निगरानी और जागरूकता अभियान को और मज़बूत किया जा सके। विशेषज्ञों का मानना है कि सामुदायिक भरोसा बनाना उतना ही ज़रूरी है जितना कि चिकित्सा संसाधन — और यही इस प्रकोप को नियंत्रित करने की असली कुंजी होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

000 सामुदायिक स्वास्थ्यकर्मियों की भर्ती का लक्ष्य सराहनीय है, लेकिन असली सवाल यह है कि क्या यह भर्ती समय पर होगी और इन कर्मियों को उन इलाकों तक पहुँचाया जा सकेगा जहाँ अफवाहें और अंधविश्वास पहले से ज़मीन तैयार कर चुके हैं।
RashtraPress
12 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

डीआरसी में इबोला का मौजूदा प्रकोप कितना गंभीर है?
स्वास्थ्य मंत्री रोजर कांबा के अनुसार, अब तक 101 मामलों की प्रयोगशाला जाँच से पुष्टि हुई है, लगभग 220 मौतें दर्ज हैं और संदिग्ध मामले करीब 1,000 तक पहुँच चुके हैं। WHO ने इसे राष्ट्रीय स्तर पर 'बहुत उच्च जोखिम' घोषित किया है।
इबोला के इस प्रकोप को काबू करने में कितना समय लगेगा?
स्वास्थ्य मंत्री रोजर कांबा ने कहा है कि देश अभी महामारी की शुरुआती अवस्था में है और इसे पूरी तरह नियंत्रित करने में चार से छह महीने तक का समय लग सकता है।
बुंडीबुग्यो स्ट्रेन क्या है और यह खतरनाक क्यों है?
बुंडीबुग्यो इबोला वायरस का एक अपेक्षाकृत दुर्लभ प्रकार है। इसके लिए अभी तक कोई स्वीकृत वैक्सीन या विशेष उपचार उपलब्ध नहीं है, और इसके शुरुआती लक्षण मलेरिया जैसे होने के कारण समय पर पहचान भी कठिन होती है।
डीआरसी में इबोला प्रकोप किन क्षेत्रों में फैला है?
फिलहाल संक्रमण इटुरी, नॉर्थ किवू और साउथ किवू प्रांतों तक सीमित है। इटुरी का मोंगबवालू कस्बा संक्रमण का मुख्य केंद्र बना हुआ है।
डीआरसी सरकार इस प्रकोप से निपटने के लिए क्या कदम उठा रही है?
सरकार ने 3,600 से अधिक संपर्कों की निगरानी शुरू की है और मोबाइल लैब के ज़रिए जाँच क्षमता बढ़ाई जा रही है। जुलाई 2026 से देशभर में 60,000 सामुदायिक स्वास्थ्यकर्मियों की भर्ती की योजना है।
राष्ट्र प्रेस
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