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इबोला का खतरा 'उच्चतम' स्तर पर: WHO ने डीआरसी में 82 पुष्ट मामले, 177 संदिग्ध मौतें दर्ज कीं

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इबोला का खतरा 'उच्चतम' स्तर पर: WHO ने डीआरसी में 82 पुष्ट मामले, 177 संदिग्ध मौतें दर्ज कीं

सारांश

WHO ने डीआरसी में इबोला का जोखिम स्तर सर्वोच्च श्रेणी में डाल दिया है — 82 पुष्ट मामले, 750 से अधिक संदिग्ध और बंडिबुग्यो स्ट्रेन जिसका कोई टीका नहीं। युगांडा तक फैलाव और भारत-अफ्रीका शिखर सम्मेलन के स्थगन ने इस संकट की गंभीरता को रेखांकित किया है।

मुख्य बातें

WHO ने डीआरसी में इबोला वायरस का जोखिम स्तर 'हाई' से बढ़ाकर 'वेरी हाई' (उच्चतम) कर दिया है।
डीआरसी में 82 पुष्ट मामले और 7 पुष्ट मौतें ; लगभग 750 संदिग्ध मामले और 177 संदिग्ध मौतें दर्ज।
संक्रमित मरीजों में बंडिबुग्यो स्ट्रेन पाया गया, जिसके लिए अभी कोई प्रभावी टीका उपलब्ध नहीं ।
WHO ने अंतरराष्ट्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया; वैश्विक खतरा अभी भी कम बताया।
भारत सरकार और अफ्रीकी संघ ने IAFS IV शिखर सम्मेलन ( 28-31 मई, नई दिल्ली ) स्थगित किया।
युगांडा में स्थिति स्थिर; कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग प्रभावी बताई गई।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य (डीआरसी) में इबोला वायरस के प्रकोप के जोखिम स्तर को 'हाई' से बढ़ाकर 'वेरी हाई' (उच्चतम) श्रेणी में कर दिया है। संगठन ने साथ ही यह भी स्पष्ट किया है कि वैश्विक स्तर पर इसका खतरा अभी भी कम है। पड़ोसी देश युगांडा में भी मामलों की पुष्टि के बाद WHO ने अंतरराष्ट्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित कर दिया है।

मुख्य घटनाक्रम: कितने मामले, कितनी मौतें

WHO के महानिदेशक टेड्रोस अधानोम घेब्रेयेसस ने शुक्रवार को जानकारी दी कि डीआरसी में अब तक 82 मामलों और 7 मौतों की आधिकारिक पुष्टि हो चुकी है। इसके अतिरिक्त लगभग 750 संदिग्ध मामले और 177 संदिग्ध मौतें भी दर्ज की गई हैं।

युगांडा की स्थिति के बारे में घेब्रेयेसस ने बताया कि वहाँ स्थिति फिलहाल स्थिर है और व्यापक कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग जैसी रोकथाम कार्रवाइयाँ प्रभावी साबित हो रही हैं।

बंडिबुग्यो स्ट्रेन: टीका अभी उपलब्ध नहीं

संक्रमित मरीजों में इबोला का बंडिबुग्यो स्ट्रेन पाया गया है, जो इस प्रकोप को और चिंताजनक बनाता है। WHO के अनुसार, इस स्ट्रेन के लिए अभी तक कोई प्रभावी टीका उपलब्ध नहीं है और मनुष्यों पर क्लिनिकल ट्रायल शुरू करने से पहले और अधिक समय की आवश्यकता है।

गौरतलब है कि WHO ने पहले ही इबोला को 'अंतर्राष्ट्रीय चिंता का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल' घोषित किया था, हालाँकि संगठन ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह महामारी के स्तर पर नहीं पहुँचा है।

भारत-अफ्रीका शिखर सम्मेलन स्थगित

इबोला के बढ़ते प्रकोप का असर कूटनीतिक मोर्चे पर भी पड़ा है। भारत सरकार और अफ्रीकी संघ ने मिलकर चौथे इंडिया-अफ्रीका फोरम समिट (IAFS IV) को फिलहाल के लिए स्थगित कर दिया है। यह शिखर सम्मेलन 28 से 31 मई तक नई दिल्ली में आयोजित होने वाला था।

विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को जारी बयान में बताया कि दोनों पक्षों ने अफ्रीका के कुछ हिस्सों में बदलती स्वास्थ्य स्थिति पर विचार साझा किए और अफ्रीका CDC तथा संबंधित राष्ट्रीय संस्थानों के समर्थन सहित सार्वजनिक स्वास्थ्य तैयारी और रिस्पॉन्स क्षमता को मज़बूत करने में सहयोग के महत्व को दोहराया।

इबोला वायरस: कैसे फैलता है, क्या हैं लक्षण

इबोला एक संक्रामक रोग है जो मुख्यतः चमगादड़ों से उत्पन्न होता है और संक्रमित व्यक्तियों या जानवरों के शरीर के तरल पदार्थों अथवा दूषित वस्तुओं के सीधे संपर्क से फैलता है। दुर्लभ मामलों में यह हवा के माध्यम से भी फैल सकता है।

इसका इन्क्यूबेशन पीरियड 2 से 21 दिन तक होता है। शुरुआती लक्षणों में बुखार, थकान, मांसपेशियों में दर्द और गले में खराश शामिल हैं, जो धीरे-धीरे गंभीर रूप धारण कर लेते हैं। इसी वजह से कई देशों के हवाई अड्डों पर यात्रियों की स्क्रीनिंग और निगरानी बढ़ा दी गई है।

आगे क्या होगा

WHO की ओर से वैश्विक स्वास्थ्य समुदाय को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। बंडिबुग्यो स्ट्रेन के लिए टीके के क्लिनिकल ट्रायल की समयसीमा अभी स्पष्ट नहीं है, लेकिन संगठन का कहना है कि शोध प्रक्रिया में तेज़ी लाई जा रही है। भारत-अफ्रीका शिखर सम्मेलन की नई तारीख़ की घोषणा स्वास्थ्य स्थिति सामान्य होने के बाद की जाएगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

क्योंकि तब उपलब्ध टीके इस स्ट्रेन पर काम नहीं करते। WHO का 'वैश्विक खतरा कम है' का बयान आश्वस्त करने वाला है, लेकिन 750 संदिग्ध मामलों और केवल 82 पुष्ट मामलों के बीच की बड़ी खाई यह सवाल उठाती है कि डीआरसी की स्वास्थ्य निगरानी प्रणाली कितनी सक्षम है। भारत-अफ्रीका शिखर सम्मेलन का स्थगन एक सतर्क कदम है, लेकिन यह उस व्यापक सच्चाई को भी उजागर करता है कि अफ्रीकी महाद्वीप में स्वास्थ्य आपात स्थितियाँ किस तरह कूटनीतिक और आर्थिक एजेंडे को भी प्रभावित करती हैं।
RashtraPress
8 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

WHO ने इबोला का जोखिम स्तर 'उच्चतम' क्यों किया?
WHO ने डीआरसी में बढ़ते मामलों और पड़ोसी देश युगांडा में इबोला की पुष्टि के बाद जोखिम स्तर को 'हाई' से 'वेरी हाई' कर दिया। साथ ही अंतरराष्ट्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल भी घोषित किया गया, हालाँकि संगठन का कहना है कि वैश्विक स्तर पर खतरा अभी कम है।
डीआरसी में इबोला के कितने मामले सामने आए हैं?
WHO महानिदेशक टेड्रोस अधानोम घेब्रेयेसस के अनुसार, डीआरसी में 82 मामलों और 7 मौतों की आधिकारिक पुष्टि हुई है। इसके अलावा लगभग 750 संदिग्ध मामले और 177 संदिग्ध मौतें भी दर्ज की गई हैं।
बंडिबुग्यो स्ट्रेन क्या है और यह इतना खतरनाक क्यों है?
बंडिबुग्यो इबोला वायरस का एक स्ट्रेन है जो मौजूदा प्रकोप में मरीजों में पाया गया है। इसके लिए अभी तक कोई प्रभावी टीका उपलब्ध नहीं है और WHO के अनुसार मनुष्यों पर क्लिनिकल ट्रायल शुरू होने में अभी और समय लगेगा।
भारत-अफ्रीका फोरम समिट क्यों स्थगित हुआ?
इबोला के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए भारत सरकार और अफ्रीकी संघ ने मिलकर IAFS IV शिखर सम्मेलन को स्थगित कर दिया, जो 28-31 मई को नई दिल्ली में होने वाला था। विदेश मंत्रालय ने बताया कि दोनों पक्षों ने अफ्रीका में बदलती स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए यह निर्णय लिया।
इबोला से बचाव के लिए क्या सावधानियाँ बरती जा रही हैं?
कई देशों के हवाई अड्डों पर यात्रियों की स्क्रीनिंग और निगरानी बढ़ा दी गई है। युगांडा में व्यापक कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग की जा रही है जो प्रभावी बताई जा रही है। WHO ने वैश्विक स्वास्थ्य समुदाय को सतर्क रहने की सलाह दी है।
राष्ट्र प्रेस
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