डीआरसी में इबोला के 1,502 कन्फर्म मामले, 473 मौतें; डब्ल्यूएचओ ने बताया अब तक का सबसे बड़ा बुंडीबुग्यो प्रकोप
सारांश
मुख्य बातें
डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (डीआरसी) में इबोला के 1,502 कन्फर्म मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें 473 मौतें दर्ज की गई हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार यह प्रकोप अभी भी गंभीर बना हुआ है और पूर्वी प्रांतों में फैलाव जारी है। 4 जुलाई को जारी ताज़ा सरकारी आँकड़ों के अनुसार, यह अब तक का सबसे बड़ा बुंडीबुग्यो इबोला प्रकोप है।
मौजूदा स्थिति और आँकड़े
डीआरसी के सार्वजनिक स्वास्थ्य अधिकारियों की ओर से शुक्रवार (स्थानीय समय) को जारी रिपोर्ट के अनुसार, अभी 628 मरीज आइसोलेशन या अस्पताल में भर्ती हैं। देश में 229 लोग ठीक हो चुके हैं। इसके अलावा 213 संदिग्ध मामले भी सामने आए हैं, जिनमें 63 मौतें शामिल हैं। गौरतलब है कि बुंडीबुग्यो वायरस के लिए अभी तक कोई स्वीकृत वैक्सीन या विशेष उपचार उपलब्ध नहीं है।
डब्ल्यूएचओ की चेतावनी और विशेषज्ञों की राय
एक ऑनलाइन मीडिया ब्रीफिंग में अफ्रीका के लिए डब्ल्यूएचओ के क्षेत्रीय निदेशक मोहम्मद याकूब जनाबी ने कहा कि स्थिति गंभीर बनी हुई है और पूर्वी प्रांत इतुरी और नॉर्थ किवु में संक्रमण तेज़ी से फैल रहा है। जनाबी ने यह भी कहा कि यह मौजूदा प्रकोप अब तक का सबसे बड़ा बुंडीबुग्यो इबोला प्रकोप है।
डीआरसी में डब्ल्यूएचओ के विशेषज्ञ पियरे अकिलिमाली ने बताया कि यह प्रकोप उन इलाकों में फैल रहा है जो असुरक्षा और हथियारबंद समूहों की गतिविधियों से प्रभावित हैं, जिससे मामलों का पता लगाना और कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग करना बेहद मुश्किल हो गया है। उन्होंने बताया कि इतुरी के कुछ प्रभावित इलाके माइनिंग जोन में हैं, जहाँ बाहर से लोगों के लगातार आने-जाने से वायरस के फैलने का खतरा और बढ़ गया है।
क्लिनिकल ट्रायल की शुरुआत
डब्ल्यूएचओ ने बताया कि डीआरसी में बुंडीबुग्यो वायरस से होने वाली इबोला बीमारी के संभावित इलाज की जाँच के लिए एक क्लिनिकल ट्रायल शुरू हो गया है। यह ऐसे समय में आया है जब इस वायरस के लिए अभी तक न कोई वैक्सीन है और न ही कोई विशेष उपचार प्रोटोकॉल। विशेषज्ञों का मानना है कि यह ट्रायल भविष्य में उपचार के विकल्पों की दिशा तय कर सकता है।
युगांडा में स्थिति और सीमा-पार सहयोग
युगांडा में डब्ल्यूएचओ के विशेषज्ञ बेंजामिन सेंसासी ने बताया कि 4 जुलाई तक देश में 20 कन्फर्म मामले सामने आए हैं, जिनमें 15 मामले बाहर से आए लोगों के हैं। शेष 5 लोग स्थानीय स्तर पर संक्रमित पाए गए, जिनकी पहचान क्वारंटीन के दौरान हुई। सेंसासी ने स्पष्ट किया कि युगांडा में अभी तक कम्युनिटी ट्रांसमिशन का कोई मामला नहीं देखा गया है।
युगांडा और डीआरसी ने सीमा-पार समन्वय के लिए एक संयुक्त प्रणाली विकसित की है और एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। इसके तहत दोनों देश निगरानी संबंधी जानकारी साझा करेंगे और सीमावर्ती इलाकों में स्क्रीनिंग तथा उपचार क्षमता को मज़बूत करेंगे।
आगे की चुनौतियाँ
यह ऐसे समय में आया है जब डीआरसी पहले से ही कई मानवीय संकटों से जूझ रहा है। सशस्त्र संघर्ष, कमज़ोर स्वास्थ्य ढाँचा और माइनिंग क्षेत्रों में श्रमिकों की आवाजाही — ये तीनों कारक मिलकर इस प्रकोप को नियंत्रित करना कठिन बना रहे हैं। डब्ल्यूएचओ की निगरानी जारी है और अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य समुदाय की नज़रें इस क्लिनिकल ट्रायल के परिणामों पर टिकी हैं।