कांगो में इबोला संकट गहराया: 3,200 मामले, 1,405 मौतें; ऑक्सफोर्ड की वैक्सीन का पहला मानव परीक्षण शुरू
सारांश
मुख्य बातें
डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (डीआरसी) में इबोला का प्रकोप तेज़ी से फैल रहा है — स्वास्थ्य अधिकारियों की 27 जुलाई को जारी ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, पुष्टि किए गए मामलों की संख्या 3,200 तक पहुँच गई है और अब तक 1,405 लोगों की जान जा चुकी है। यह प्रकोप बंडीबुग्यो इबोलावायरस के कारण फैल रहा है, जिसके लिए अभी तक कोई स्वीकृत वैक्सीन या विशेष उपचार उपलब्ध नहीं है।
मुख्य घटनाक्रम
शनिवार तक के आँकड़ों पर आधारित इस रिपोर्ट के अनुसार, 571 मरीज़ ठीक होकर घर लौट चुके हैं, जबकि 773 मरीज़ अभी भी आइसोलेशन में हैं। पिछले 24 घंटों में 125 नए मामले और 51 मौतें दर्ज की गईं — यह आँकड़ा बताता है कि वायरस का संचरण अभी भी निरंतर जारी है।
यह प्रकोप 15 मई को घोषित किया गया था और पूर्वोत्तर के इटुरी प्रांत से शुरू होकर अब पाँच प्रांतों तक फैल चुका है। इटुरी प्रांत अभी भी इस महामारी का सबसे बड़ा केंद्र बना हुआ है, जहाँ कुल पुष्टि किए गए मामलों में से 89 प्रतिशत मामले सामने आए हैं।
स्वास्थ्य ढाँचे पर दबाव
नॉर्थ किवू प्रांत में आइसोलेशन वार्ड की क्षमता 141 बिस्तरों की है, लेकिन वहाँ 171 मरीज़ भर्ती हैं — यानी बिस्तरों का उपयोग 121.3 प्रतिशत तक पहुँच गया है। पूरे देश में औसतन बिस्तर उपयोग दर 82.1 प्रतिशत है, जो स्वास्थ्य तंत्र पर गंभीर दबाव का संकेत देती है।
गौरतलब है कि डीआरसी का पूर्वी हिस्सा पहले से ही सशस्त्र संघर्ष और मानवीय संकट से जूझ रहा है, जिससे राहत कार्य और जटिल हो गए हैं।
फैलाव की प्रमुख वजहें
अधिकारियों ने बताया कि लोगों का लगातार एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाना, सुरक्षा से जुड़ी समस्याएँ, छोटे स्तर पर होने वाली खनन गतिविधियाँ और युगांडा तथा दक्षिण सूडान के साथ सीमा पार आवाजाही इस बीमारी के फैलाव की बड़ी वजहें हैं। अधिकारियों ने कहा कि निगरानी को और तेज़ किया जाएगा और वायरस को आगे फैलने से रोकने के प्रयास जारी रहेंगे।
सरकार की प्रतिक्रिया
डीआरसी की प्रधानमंत्री जूडिथ सुमिनवा तुलुका ने शुक्रवार को इटुरी प्रांत की राजधानी बुनिया में चेतावनी दी कि यह प्रकोप देश के पूर्वी हिस्से में पहले से चल रहे मानवीय संकट को और गंभीर बना सकता है। उन्होंने बताया कि सरकार ने इबोला से निपटने के लिए 5 करोड़ अमेरिकी डॉलर जारी किए हैं और अंतरराष्ट्रीय साझेदारों से भी अतिरिक्त धन जुटाया जा रहा है।
वैक्सीन परीक्षण: उम्मीद की किरण
ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय ने शुक्रवार को घोषणा की कि बंडीबुग्यो इबोलावायरस से बचाव के लिए विकसित 'ChAdOx1 BDBV' (चाडऑक्स1 बीडीबीवी) वैक्सीन के दुनिया के पहले मानव परीक्षण में पहले स्वयंसेवक को टीका लगाया जा चुका है। प्रधानमंत्री तुलुका ने बताया कि वैज्ञानिक बंडीबुग्यो इबोलावायरस के विरुद्ध इलाज और वैक्सीन विकसित करने पर सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं। फिलहाल कई प्रयोगात्मक वैक्सीन और दवाओं के क्लीनिकल ट्रायल जारी हैं।
यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्वास्थ्य समुदाय इस प्रकोप को काबू में करने के लिए संसाधन जुटाने में लगा है। आने वाले हफ्तों में वैक्सीन परीक्षण के शुरुआती परिणाम इस लड़ाई की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।