डीआरसी में इबोला का कहर: 5,021 संक्रमित, 2,378 मौतें — WHO ने कहा 'नियंत्रण से बाहर'
सारांश
मुख्य बातें
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने 19 अगस्त 2026 को पुष्टि की है कि डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC) में फैला इबोला प्रकोप अंतरराष्ट्रीय चिंता का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल (PHEIC) बना हुआ है। WHO के ताज़ा आँकड़ों के अनुसार, 55 हेल्थ जोन और 6 प्रांतों में अब तक 5,021 मामलों की पुष्टि हो चुकी है और 2,378 लोगों की मौत हो चुकी है — मृत्यु दर 47.4 प्रतिशत पर पहुँच चुकी है।
मुख्य घटनाक्रम
WHO के महानिदेशक टेड्रोस एडनॉम घेब्रेयेसस ने एक आपातकालीन समिति की बैठक में स्पष्ट कहा, 'महामारी हमारे नियंत्रण से अभी बहुत दूर है। इसे बहुत बढ़त मिल गई थी, और हम अभी भी इसके पीछे भाग रहे हैं।' यह प्रकोप बंडिबुग्यो इबोला वायरस के कारण फैला है और DRC के 2018-2020 के प्रकोप को पीछे छोड़ते हुए देश का अब तक का सबसे घातक इबोला प्रकोप बन चुका है।
रिपोर्टिंग के पहले 95 दिनों में सात-दिवसीय मूविंग एवरेज बढ़कर प्रतिदिन 90 से अधिक मामले हो गया है — जो 2014-2016 की पश्चिम अफ्रीका महामारी और DRC के 2018-2020 प्रकोप के समान चरण की तुलना में काफी अधिक है।
प्रकोप का केंद्र और विस्तार
पूर्वी प्रांत इतुरी अब तक का सबसे बुरी तरह प्रभावित क्षेत्र है, जहाँ कुल मामलों का 84.8 प्रतिशत हिस्सा है। हालाँकि, पड़ोसी प्रांतों में भी संक्रमण की रफ्तार तेज़ हो रही है। अफ्रीका सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (Africa CDC) ने चेतावनी दी है कि मौजूदा रफ्तार से हर 30 मिनट में लगभग एक व्यक्ति की मौत हो रही है। यदि प्रसार को तत्काल नहीं रोका गया, तो यह दुनिया का अब तक का सबसे घातक इबोला प्रकोप बन सकता है।
WHO ने चेतावनी दी है कि DRC के भीतर और फैलाव का जोखिम 'बहुत अधिक' बना हुआ है। साथ ही, युगांडा, दक्षिण सूडान और सेंट्रल अफ्रीकन रिपब्लिक में संक्रमण आयात होने का खतरा भी उच्च स्तर पर है, क्योंकि ये देश प्रभावित क्षेत्रों की सीमाओं से सटे हैं और सीमा पार आवाजाही नियमित रूप से होती है।
वायरस की पहचान और इलाज की चुनौती
DRC के स्वास्थ्य मंत्री रोजर काम्बा ने बताया कि बुंडीबुग्यो वायरस के शुरुआती लक्षण बहुत विशिष्ट नहीं होते, जिसके कारण संक्रमित व्यक्ति इलाज लेने से पहले लंबे समय तक अपने समुदाय में ही रहते हैं — जिससे संक्रमण का दायरा तेज़ी से बढ़ता है। उन्होंने 'बहुत तेज और बहुत जोरदार' प्रतिक्रिया के बावजूद प्रकोप के असामान्य रूप से तेज़ फैलाव को स्वीकार किया।
WHO ने आगाह किया है कि उच्च मृत्यु दर, इलाज केंद्रों के बाहर हो रही मौतें, निगरानी की बढ़ती चुनौतियाँ और असमान प्रतिक्रिया क्षमता यह स्पष्ट संकेत देती हैं कि मौजूदा उपाय संक्रमण को रोकने के लिए पर्याप्त नहीं हैं।
प्रायोगिक वैक्सीन और उपचार
बुंडीबुग्यो वायरस के लिए कोई स्वीकृत वैक्सीन या इलाज उपलब्ध न होने के कारण अधिकारी प्रायोगिक विकल्पों की ओर मुड़ रहे हैं। टेड्रोस ने बताया कि इस वायरस के विरुद्ध विशेष रूप से तैयार दो वैक्सीन का मनुष्यों पर परीक्षण शुरू हो चुका है।
WHO के सहयोग से चल रहे 'पार्टनर्स' ट्रीटमेंट ट्रायल में एंटीवायरल रेमडेसिविर, प्रायोगिक मोनोक्लोनल एंटीबॉडी MBP134 और इनके संयोजन की जाँच की जा रही है। काम्बा के अनुसार, शुरुआती नतीजे 'लगभग तीन से चार हफ्तों' में सामने आ सकते हैं। इसके अलावा, शोधकर्ता ओरल एंटीवायरल ओबेल्डेसिविर का 'पोस्ट-एक्सपोजर प्रोफिलैक्सिस' के रूप में अध्ययन भी कर रहे हैं।
जैरे इबोला वायरस के लिए लाइसेंस-प्राप्त वैक्सीन 'एर्वेबो' से बुंडीबुग्यो वायरस के विरुद्ध 'क्रॉस-प्रोटेक्शन' की संभावना भी जाँची जा रही है। काम्बा ने कहा कि स्वास्थ्यकर्मियों पर किए गए अध्ययन और प्रयोगशाला परीक्षणों से इसके संकेत मिले हैं, लेकिन अभी इसकी पुष्टि नहीं हुई है।
आगे क्या होगा
यह प्रकोप ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्वास्थ्य तंत्र पहले से ही कई मोर्चों पर दबाव में है। WHO और Africa CDC की चेतावनियाँ अंतरराष्ट्रीय समुदाय पर तत्काल संसाधन जुटाने का दबाव बढ़ा रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगले कुछ हफ्ते यह तय करेंगे कि प्रायोगिक उपचार मृत्यु दर को नीचे ला पाते हैं या नहीं।