दिग्विजय सिंह की मोहन यादव से माँग: भूमि विकास बैंक से जुड़े किसानों की बंधक ज़मीन तुरंत मुक्त करे एमपी सरकार
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने 20 अगस्त को मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखकर परिसमापनाधीन मध्य प्रदेश राज्य सहकारी कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (भूमि विकास बैंक) से जुड़े किसानों की बंधक भूमि को तत्काल मुक्त कराने की माँग की है। उनका कहना है कि बैंक बंद हो जाने के बावजूद प्रदेश के अनेक किसानों की ज़मीन आज भी राजस्व अभिलेखों में बैंक के पक्ष में बंधक दर्ज है, जो किसानों के मूल भूमि-अधिकारों का हनन है।
मामले की पृष्ठभूमि
दिग्विजय सिंह ने अपने पत्र में कृषि सलाहकार परिषद, मध्य प्रदेश के पूर्व सदस्य केदार सिरोही द्वारा भेजे गए ईमेल का संदर्भ दिया। सिरोही ने इस समस्या की ओर ध्यान दिलाते हुए बताया कि बैंक के परिसमापनाधीन होने के बाद भी राजस्व रिकॉर्ड में बंधक की प्रविष्टियाँ यथावत बनी हुई हैं। यह ऐसे समय में सामने आया है जब प्रदेश में किसानों की भूमि-संबंधी शिकायतें पहले से ही चर्चा में हैं।
किसानों पर क्या असर पड़ रहा है
दिग्विजय सिंह के अनुसार, विशेष रूप से वे किसान प्रभावित हैं जिन्होंने बैंक का ऋण अथवा समझौते के तहत निर्धारित राशि पूरी तरह जमा कर दी है। इसके बावजूद उनकी भूमि का बंधक समाप्त नहीं हुआ है, जिससे उन्हें अपनी ही ज़मीन के विक्रय, नामांतरण और विभाजन जैसे ज़रूरी राजस्व कार्यों में गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। किसानों को बार-बार राजस्व कार्यालयों के चक्कर लगाने पर मजबूर होना पड़ रहा है।
सरकार से की गई माँगें
पूर्व मुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री मोहन यादव से आग्रह किया है कि सहकारिता विभाग और राजस्व विभाग के संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश जारी किए जाएँ। उन्होंने यह भी माँग की कि बंधक समाप्त होने के बाद राजस्व अभिलेखों के साथ-साथ एमपी भूलेख पोर्टल पर भी तत्काल आवश्यक संशोधन कराया जाए, ताकि किसानों को भविष्य में किसी प्रकार की परेशानी न हो।
प्राथमिकता के आधार पर निराकरण की अपील
दिग्विजय सिंह ने राज्य सरकार से माँग की है कि प्रदेशभर में लंबित ऐसे सभी मामलों का निराकरण प्राथमिकता के आधार पर किया जाए। गौरतलब है कि ऋण चुका चुके किसानों की ज़मीन को वर्षों तक बंधक बनाए रखना न केवल उनके अधिकारों का उल्लंघन है, बल्कि प्रशासनिक विफलता का भी प्रतीक है। अब देखना यह होगा कि राज्य सरकार इस माँग पर कितनी तेज़ी से कार्रवाई करती है।