20 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

दिग्विजय सिंह का CM मोहन यादव को पत्र: किसानों की जमीन से गिरवी प्रविष्टियाँ हटाएं

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
दिग्विजय सिंह का CM मोहन यादव को पत्र: किसानों की जमीन से गिरवी प्रविष्टियाँ हटाएं

सारांश

दिग्विजय सिंह ने CM मोहन यादव को पत्र लिखकर उन किसानों को राहत देने की माँग की है, जिन्होंने बंद हो चुके सहकारी भूमि विकास बैंक का ऋण चुका दिया है, लेकिन उनकी जमीन अभी भी राजस्व अभिलेखों में गिरवी दर्ज है — जिससे वे कोई भी संपत्ति लेन-देन नहीं कर पा रहे।

मुख्य बातें

दिग्विजय सिंह ने 20 अगस्त 2026 को मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखकर किसानों की जमीन से गिरवी प्रविष्टियाँ हटाने की माँग की।
मध्य प्रदेश राज्य सहकारी कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक बंद हो चुका है और परिसमापन के अधीन है, फिर भी किसानों की भूमि राजस्व अभिलेखों में गिरवी दर्ज है।
ऋण चुका चुके किसान जमीन बेचने, म्यूटेशन कराने और संपत्ति बंटवारे जैसे कार्यों में प्रशासनिक बाधाओं का सामना कर रहे हैं।
यह मामला हरदा निवासी और MP कृषि सलाहकार परिषद के पूर्व सदस्य केदार सिरोही के ईमेल से सामने आया।
सिंह ने सहकारिता और राजस्व विभाग के बीच समन्वित प्रक्रिया और एमपी भूलेख पोर्टल पर सुधार की माँग की है।

वरिष्ठ कांग्रेस नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने 20 अगस्त 2026 को मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखकर माँग की कि अब बंद हो चुके भूमि विकास बैंक से ऋण चुका चुके किसानों के भूमि अभिलेखों से गिरवी संबंधी प्रविष्टियाँ तत्काल हटाई जाएं। सिंह ने कहा कि ऋण चुकाने के बावजूद राजस्व रिकॉर्ड में पुरानी गिरवी दर्ज रहने से किसान अपनी ज़मीन बेचने, म्यूटेशन कराने और अन्य संपत्ति संबंधी लेन-देन करने में असमर्थ हैं।

मुख्य समस्या क्या है

मध्य प्रदेश राज्य सहकारी कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक ने किसानों को उनकी भूमि गिरवी रखकर दीर्घकालिक कृषि ऋण दिए थे। बैंक अब बंद हो चुका है और परिसमापन के अधीन है। बावजूद इसके, कई किसानों की भूमि राजस्व अभिलेखों और एमपी भूलेख पोर्टल पर अभी भी गिरवी के रूप में दर्ज है।

सिंह ने अपने पत्र में स्पष्ट किया कि यह समस्या उन किसानों को प्रभावित कर रही है जिन्होंने या तो पूरा ऋण चुका दिया है या निपटान व्यवस्था के तहत आवश्यक राशि जमा कर दी है। इन किसानों को संपत्ति बेचने, बंटवारा करने और म्यूटेशन जैसे बुनियादी कार्यों में प्रशासनिक बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है।

मामला कैसे सामने आया

कांग्रेस नेता ने बताया कि यह मामला उनके संज्ञान में मध्य प्रदेश कृषि सलाहकार परिषद के पूर्व सदस्य और हरदा निवासी केदार सिरोही के ईमेल के ज़रिए आया। सिरोही ने ऋण चुका चुके किसानों की भूमि अभिलेखों में गिरवी प्रविष्टियाँ बनी रहने की समस्या से अवगत कराया।

दिग्विजय सिंह की माँगें

सिंह ने मुख्यमंत्री यादव से सहकारिता और राजस्व विभाग के अधिकारियों को निर्देश देने का आग्रह किया ताकि पात्र किसानों की पहचान की जाए और उनकी गिरवी रखी जमीन जल्द से जल्द छुड़ाई जाए। उन्होंने पत्र में लिखा, 'मेरा आपसे अनुरोध है कि आप सहकारिता और राजस्व विभागों के संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दें ताकि पात्र किसानों की गिरवी रखी जमीन जल्द से जल्द छुड़ाई जा सके और राजस्व रिकॉर्ड और एमपी भूलेख पोर्टल में आवश्यक सुधार किए जा सकें।'

आम किसानों पर असर

यह समस्या उन सभी किसानों को प्रभावित करती है जिन्होंने सहकारी बैंक से दीर्घकालिक कृषि ऋण लिया था और बाद में अपनी देनदारियाँ चुका दीं। ऋण चुकाने के बावजूद गिरवी प्रविष्टियाँ बनी रहने से वे अपनी ज़मीन पर किसी भी प्रकार का कानूनी लेन-देन करने में असमर्थ हैं। सिंह ने दोनों विभागों के बीच समन्वित प्रक्रिया की माँग की है ताकि मामलों का सत्यापन और अभिलेखों का अद्यतन किया जा सके।

आगे की राह

सिंह के इस पत्र के बाद अब नज़र इस बात पर है कि मुख्यमंत्री मोहन यादव की सरकार इस माँग पर क्या रुख अपनाती है। यदि सरकार दोनों विभागों के बीच समन्वित कार्रवाई सुनिश्चित करती है, तो मध्य प्रदेश के सैकड़ों किसान भूमि संबंधी प्रशासनिक उलझनों से मुक्त हो सकते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

ऋण चुका दिया गया है, फिर भी राजस्व रिकॉर्ड अपडेट नहीं हुआ — यह डिजिटल इंडिया के दावों पर सवाल उठाता है, खासकर तब जब एमपी भूलेख पोर्टल जैसे मंच मौजूद हैं। असली परीक्षा यह है कि मोहन यादव सरकार इस पत्र को राजनीतिक आरोप मानकर टालती है या किसानों की व्यावहारिक समस्या मानकर विभागीय समन्वय सुनिश्चित करती है।
RashtraPress
20 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिग्विजय सिंह ने CM मोहन यादव को पत्र क्यों लिखा?
दिग्विजय सिंह ने माँग की है कि बंद हो चुके भूमि विकास बैंक का ऋण चुका चुके किसानों की जमीन से गिरवी प्रविष्टियाँ राजस्व अभिलेखों और एमपी भूलेख पोर्टल से हटाई जाएं। ऋण चुकाने के बावजूद रिकॉर्ड में गिरवी दर्ज रहने से किसान संपत्ति संबंधी कोई भी लेन-देन नहीं कर पा रहे।
मध्य प्रदेश भूमि विकास बैंक की स्थिति क्या है?
मध्य प्रदेश राज्य सहकारी कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक अब बंद हो चुका है और परिसमापन के अधीन है। इस बैंक ने किसानों को उनकी भूमि गिरवी रखकर दीर्घकालिक कृषि ऋण दिए थे।
किन किसानों को इस समस्या से राहत मिलनी चाहिए?
वे किसान जिन्होंने सहकारी भूमि विकास बैंक का ऋण पूरी तरह चुका दिया है या निपटान व्यवस्था के तहत आवश्यक राशि जमा कर दी है, वे इस राहत के पात्र हैं। इनकी जमीन अभी भी राजस्व रिकॉर्ड में गिरवी दर्ज है, जिससे वे जमीन बेचने, म्यूटेशन कराने और बंटवारे जैसे काम नहीं कर पा रहे।
दिग्विजय सिंह ने सरकार से क्या कार्रवाई माँगी है?
सिंह ने मुख्यमंत्री से सहकारिता और राजस्व विभाग के अधिकारियों को निर्देश देने का आग्रह किया है कि वे पात्र किसानों की पहचान करें, उनकी गिरवी प्रविष्टियाँ हटाएं और एमपी भूलेख पोर्टल पर भी आवश्यक सुधार करें।
यह मामला पहली बार कैसे सामने आया?
यह मामला हरदा निवासी और मध्य प्रदेश कृषि सलाहकार परिषद के पूर्व सदस्य केदार सिरोही के ईमेल के ज़रिए दिग्विजय सिंह के संज्ञान में आया। सिरोही ने ऋण चुका चुके किसानों की भूमि पर गिरवी प्रविष्टियाँ बनी रहने की समस्या उजागर की।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 2 महीने पहले
  4. 3 महीने पहले
  5. 3 महीने पहले
  6. 3 महीने पहले
  7. 3 महीने पहले
  8. 4 महीने पहले