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मूंग खरीद पर बड़ा दबाव: दिग्विजय सिंह ने CM मोहन यादव को लिखा पत्र, किसानों के हित में तत्काल कार्रवाई की मांग

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मूंग खरीद पर बड़ा दबाव: दिग्विजय सिंह ने CM मोहन यादव को लिखा पत्र, किसानों के हित में तत्काल कार्रवाई की मांग

सारांश

पूर्व CM दिग्विजय सिंह ने CM मोहन यादव को पत्र लिखकर ग्रीष्मकालीन मूंग की तत्काल सरकारी खरीद की मांग की। MP सरकार ने अब तक केंद्र को खरीद प्रस्ताव नहीं भेजा, जिससे हजारों किसान MSP से नीचे दाम पर फसल बेचने को मजबूर हो सकते हैं।

मुख्य बातें

दिग्विजय सिंह ने 26 अप्रैल को CM मोहन यादव को पत्र लिखकर ग्रीष्मकालीन मूंग की तत्काल सरकारी खरीद की मांग की।
इस वर्ष मध्य प्रदेश में मूंग की बुवाई में 15-20 प्रतिशत की वृद्धि हुई है और फसल पककर तैयार हो चुकी है।
MP सरकार ने अब तक केंद्र सरकार को मूल्य समर्थन योजना (PSS) के तहत वार्षिक खरीद प्रस्ताव नहीं भेजा।
बिना सरकारी खरीद के किसानों को MSP से नीचे दाम पर फसल बेचने की नौबत आ सकती है।
राज्य कृषि सलाहकार परिषद के पूर्व सदस्य केदार सिरोही ने इस प्रशासनिक चूक की जानकारी साझा की।
दिग्विजय सिंह ने मुख्यमंत्री से अनुरोध किया कि किसानों को उचित मूल्य दिलाने के लिए जल्द से जल्द अनुमतियां जारी की जाएं।

भोपाल, 26 अप्रैल। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने राज्य में ग्रीष्मकालीन मूंग की सरकारी खरीद तत्काल शुरू करने की मांग को लेकर मुख्यमंत्री मोहन यादव को औपचारिक पत्र लिखा है। उनका कहना है कि इस वर्ष मूंग की बुवाई में 15 से 20 प्रतिशत की वृद्धि हुई है और फसल पककर तैयार हो चुकी है, लेकिन सरकार की निष्क्रियता से किसानों पर आर्थिक संकट मंडरा रहा है।

फसल तैयार, मंडियों में आवक की उम्मीद — लेकिन खरीद का इंतज़ार

दिग्विजय सिंह ने अपने पत्र में स्पष्ट किया कि मध्य प्रदेश के विभिन्न जिलों में ग्रीष्मकालीन मूंग की फसल पूरी तरह परिपक्व हो चुकी है। आने वाले कुछ दिनों में मंडियों में उपज की भारी आवक होने की संभावना है। ऐसे में यदि सरकारी खरीद केंद्र समय पर नहीं खुले तो किसानों को औने-पौने दामों पर अपनी फसल बेचने पर मजबूर होना पड़ेगा।

उन्होंने चेतावनी दी कि मौजूदा बाजार रुझान किसानों के लिए बेहद प्रतिकूल हैं। बिना सरकारी हस्तक्षेप के, बाजार में आपूर्ति बढ़ने से कीमतें और गिरेंगी, जो किसानों की उत्पादन लागत को भी नहीं पाट पाएंगी।

प्रशासनिक चूक — केंद्र को अब तक नहीं भेजा गया खरीद प्रस्ताव

राज्य कृषि सलाहकार परिषद के पूर्व सदस्य केदार सिरोही द्वारा साझा की गई जानकारी का हवाला देते हुए दिग्विजय सिंह ने एक गंभीर प्रशासनिक चूक उजागर की। उन्होंने बताया कि मध्य प्रदेश सरकार ने इस वर्ष अब तक केंद्र सरकार को अपना वार्षिक खरीद प्रस्ताव प्रस्तुत नहीं किया है।

यह प्रस्ताव मूल्य समर्थन योजना (PSS) के अंतर्गत अनुमति और धनराशि प्राप्त करने के लिए अनिवार्य पूर्व शर्त है। इसके बिना न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर बड़े पैमाने पर सरकारी खरीद संभव नहीं हो सकती। यह देरी सीधे तौर पर हजारों किसानों की आजीविका पर असर डाल रही है।

किसानों पर प्रभाव और राजनीतिक संदर्भ

गौरतलब है कि मध्य प्रदेश देश के प्रमुख मूंग उत्पादक राज्यों में से एक है। इस वर्ष बुवाई क्षेत्र में 15-20 प्रतिशत की वृद्धि का अर्थ है कि उत्पादन भी पिछले वर्षों की तुलना में अधिक होगा। ऐसे में यदि सरकारी खरीद तंत्र समय पर सक्रिय नहीं हुआ तो बाजार में अतिरिक्त आपूर्ति से कीमतें MSP से नीचे जा सकती हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि खरीद प्रस्ताव में देरी केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि यह उन किसानों के साथ अन्याय है जिन्होंने इस वर्ष अधिक रकबे में बुवाई की। दिग्विजय सिंह ने मुख्यमंत्री मोहन यादव से आग्रह किया है कि आवश्यक अनुमतियां जल्द से जल्द जारी की जाएं ताकि किसानों को उनकी मेहनत का उचित और लाभकारी मूल्य मिल सके।

पिछला पैटर्न और राज्य की जिम्मेदारी

यह पहली बार नहीं है जब मध्य प्रदेश में खरीद व्यवस्था की देरी को लेकर सवाल उठे हों। पिछले वर्षों में भी सोयाबीन और चना खरीद में विलंब के कारण किसानों को नुकसान उठाना पड़ा था। ऐसे में इस वर्ष मूंग के मामले में भी वही इतिहास दोहराए जाने की आशंका जताई जा रही है।

अब सबकी निगाहें मुख्यमंत्री मोहन यादव की प्रतिक्रिया और राज्य सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं। यदि शीघ्र ही केंद्र को प्रस्ताव भेजा जाता है और खरीद केंद्र खोले जाते हैं, तो किसानों को राहत मिल सकती है — अन्यथा यह मुद्दा आगामी राजनीतिक बहस का केंद्र बन सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह उस किसान-विरोधी रवैये का प्रतीक है जो 'अन्नदाता' की बात तो करता है लेकिन जमीन पर उसे MSP तक नहीं दिला पाता। विडंबना यह है कि जिस राज्य ने इस वर्ष मूंग की बुवाई में 15-20% वृद्धि दर्ज की — यानी किसानों ने सरकारी प्रोत्साहन पर भरोसा किया — उसी राज्य की सरकार अनिवार्य प्रस्ताव भेजने में चूक गई। विपक्ष का यह मुद्दा उठाना राजनीतिक है, लेकिन सवाल तथ्यात्मक है — और सरकार के पास इसका जवाब होना चाहिए।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिग्विजय सिंह ने CM मोहन यादव को पत्र क्यों लिखा?
दिग्विजय सिंह ने मध्य प्रदेश में ग्रीष्मकालीन मूंग की सरकारी खरीद तत्काल शुरू करने की मांग को लेकर CM मोहन यादव को पत्र लिखा। उनका कहना है कि फसल तैयार है लेकिन सरकार ने अभी तक केंद्र को खरीद प्रस्ताव नहीं भेजा, जिससे किसान संकट में हैं।
मध्य प्रदेश में मूंग खरीद में देरी क्यों हो रही है?
MP सरकार ने अब तक केंद्र सरकार को मूल्य समर्थन योजना के तहत वार्षिक खरीद प्रस्ताव नहीं भेजा है। यह प्रस्ताव MSP पर खरीद के लिए अनिवार्य है, इसके बिना सरकारी खरीद केंद्र नहीं खुल सकते।
ग्रीष्मकालीन मूंग की खरीद न होने से किसानों पर क्या असर पड़ेगा?
सरकारी खरीद न होने पर मंडियों में अधिक आवक से कीमतें MSP से नीचे जा सकती हैं। इससे किसानों को अपनी उत्पादन लागत भी नहीं मिल पाएगी और हजारों किसान परिवारों की आजीविका प्रभावित होगी।
मूल्य समर्थन योजना (PSS) क्या है?
मूल्य समर्थन योजना केंद्र सरकार की एक कृषि योजना है जिसके तहत राज्य सरकारें MSP पर किसानों से फसल खरीदती हैं। इसके लिए राज्य को पहले केंद्र को प्रस्ताव भेजकर अनुमति और धनराशि लेनी होती है।
इस साल मध्य प्रदेश में मूंग की बुवाई कितनी बढ़ी?
इस वर्ष मध्य प्रदेश में ग्रीष्मकालीन मूंग की बुवाई में 15 से 20 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। इससे उत्पादन अधिक होने की उम्मीद है, जिससे बिना सरकारी खरीद के बाजार में कीमतें गिर सकती हैं।
राष्ट्र प्रेस
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