डायमंड हार्बर में मतदाताओं को धमकी: ECI के आदेश पर FIR दर्ज, 5 पुलिस अधिकारी निलंबित
सारांश
Key Takeaways
- ECI के आदेश पर पश्चिम बंगाल पुलिस ने डायमंड हार्बर पुलिस स्टेशन में शिकायत के कुछ घंटों के भीतर FIR दर्ज की।
- काकद्वीप में बाइक सवार उपद्रवियों ने मतदाताओं को '4 मई के बाद' कार्रवाई की धमकी दी।
- FIR में डराना-धमकाना, शांति भंग और सरकारी कार्य में बाधा समेत कई धाराएं लगाई गई हैं।
- चुनाव आयोग ने अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक और SDPO समेत 5 पुलिस अधिकारियों को निलंबित किया।
- TMC ने आरोपों को खारिज करते हुए रैली को नियमानुसार बताया और पुलिस ऑब्जर्वर पर सवाल उठाए।
- डायमंड हार्बर TMC महासचिव अभिषेक बनर्जी का संसदीय क्षेत्र है, जो इस मामले को राजनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील बनाता है।
कोलकाता, 26 अप्रैल: पश्चिम बंगाल के 24 परगना जिले के डायमंड हार्बर में मतदाताओं को खुलेआम धमकाने का गंभीर मामला सामने आया है। भारतीय चुनाव आयोग (ECI) के सख्त निर्देश पर पश्चिम बंगाल पुलिस ने डायमंड हार्बर पुलिस स्टेशन में संबंधित उपद्रवियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कर ली है। शिकायत मिलने के महज कुछ घंटों के भीतर यह कार्रवाई की गई।
मुख्य घटनाक्रम: काकद्वीप में बाइक रैली से धमकी
चुनाव आयोग को शिकायत मिली थी कि काकद्वीप इलाके में बाइकों पर सवार उपद्रवियों ने एक जुलूस निकाला और मतदाताओं के विरुद्ध धमकी भरे नारे लगाए। आरोप है कि उपद्रवियों ने मतदाताओं से कहा कि 4 मई के बाद उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। यह घटना चुनावी माहौल में मतदाताओं के मन में भय पैदा करने की सुनियोजित कोशिश मानी जा रही है।
एफआईआर में कई गंभीर धाराएं लगाई गई हैं — जिनमें डराना-धमकाना, शांति भंग करने का प्रयास और सरकारी कार्य में बाधा डालना प्रमुख हैं। चुनाव आयोग ने स्थानीय चुनाव अधिकारी और पुलिस को रविवार शाम तक कार्रवाई करने का स्पष्ट आदेश दिया था।
पुलिस अधिकारियों पर गाज: 5 अफसर निलंबित
इस पूरे मामले में चुनाव आयोग ने अत्यंत कड़ा रुख अपनाया। शुक्रवार को आयोग ने डायमंड हार्बर के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक और उप-विभागीय पुलिस अधिकारी (SDPO) समेत पाँच पुलिस अधिकारियों को निलंबित कर दिया। आयोग ने राज्य के मुख्य सचिव को सूचित किया कि इन अधिकारियों पर आचार संहिता के गंभीर उल्लंघन और निष्पक्षता बनाए रखने में विफलता के आरोप हैं।
यह कार्रवाई इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि डायमंड हार्बर तृणमूल कांग्रेस (TMC) के महासचिव और प्रभावशाली नेता अभिषेक बनर्जी का लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र है। इस क्षेत्र में सात विधानसभा सीटें शामिल हैं, जो इसे राजनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील बनाती हैं।
TMC का पलटवार और चुनाव आयोग की सफाई
तृणमूल कांग्रेस ने इस मामले में पलटवार करते हुए कहा कि वायरल वीडियो को चुनाव आयोग खुद मीडिया को दे रहा है। TMC के अनुसार, वह मोटरसाइकिल रैली रात करीब 9:51-52 बजे हुई थी, जबकि चुनाव प्रचार की अनुमति रात 10 बजे तक है। पार्टी ने दावा किया कि रैली में केवल 'जय बांग्ला' के नारे लगाए गए थे और कोई भड़काऊ नारेबाजी नहीं हुई।
TMC ने यह भी मांग उठाई कि चुनाव आयोग उस पुलिस ऑब्जर्वर के खिलाफ कार्रवाई करे, जिसे होटल सागरिका में एक भाजपा उम्मीदवार के साथ गुपचुप मिलते हुए कथित तौर पर पकड़ा गया था। वहीं, चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि मतदाताओं को डराने-धमकाने की किसी भी कोशिश पर तत्काल और पूर्ण रोक लगाई जाएगी।
पहले चरण के बाद दूसरे चरण की तैयारी
23 अप्रैल को संपन्न हुए मतदान के पहले चरण को कुल मिलाकर शांतिपूर्ण बताया गया। अब चुनाव आयोग यह सुनिश्चित करने में जुटा है कि दूसरे चरण का मतदान भी बिना किसी बाधा के संपन्न हो। आयोग की यह कड़ी कार्रवाई संकेत देती है कि मतदाताओं को डराने-धमकाने की किसी भी कोशिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में चुनावी हिंसा और मतदाता उत्पीड़न का इतिहास पुराना रहा है। सुप्रीम कोर्ट और चुनाव आयोग दोनों ने अतीत में बंगाल में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए कई बार हस्तक्षेप किया है। इस बार आयोग की त्वरित कार्रवाई — एफआईआर से लेकर पुलिस अधिकारियों के निलंबन तक — यह दर्शाती है कि संस्था इस बार किसी भी दबाव में नहीं आना चाहती।
आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि एफआईआर में नामित आरोपियों की गिरफ्तारी होती है या नहीं, और क्या निलंबित पुलिस अधिकारियों के विरुद्ध विभागीय जाँच आगे बढ़ती है।