अजीत डोभाल की यूएई राष्ट्रपति से ऐतिहासिक मुलाकात; भारत-यूएई रणनीतिक साझेदारी पर बड़ी चर्चा
सारांश
Key Takeaways
- एनएसए अजीत डोभाल ने 26 अप्रैल 2025 को अबू धाबी में यूएई राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से आधिकारिक मुलाकात की।
- डोभाल ने यूएई राष्ट्रपति को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से शुभकामनाएं दीं और भारत-यूएई रणनीतिक साझेदारी पर चर्चा की।
- यह अप्रैल 2025 में भारत का यूएई के साथ दूसरा उच्चस्तरीय कूटनीतिक संपर्क है — पहले 11 अप्रैल को विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर गए थे।
- बैठक में क्षेत्रीय सुरक्षा स्थिति, पश्चिम एशिया के हालात और आपसी हित के मुद्दों पर विस्तृत वार्ता हुई।
- यूएई में लगभग 35 लाख भारतीय प्रवासी निवास करते हैं, जिनकी सुरक्षा और भलाई दोनों देशों की प्राथमिकता है।
- पहलगाम हमले के बाद भारत की खाड़ी देशों के साथ कूटनीतिक सक्रियता में उल्लेखनीय वृद्धि देखी जा रही है।
भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल ने रविवार, 26 अप्रैल 2025 को अबू धाबी में संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से आधिकारिक मुलाकात की। इस बैठक में भारत-यूएई व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करने, क्षेत्रीय सुरक्षा परिदृश्य तथा आपसी हित के अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से विचार-विमर्श हुआ। डोभाल ने इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से यूएई राष्ट्रपति को शुभकामनाएं भी पहुंचाईं।
मुख्य घटनाक्रम: डोभाल का अबू धाबी दौरा
यूएई में भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया मंच एक्स (X) पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि एनएसए डोभाल ने यूएई का आधिकारिक दौरा किया और राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से भेंट की। दूतावास के अनुसार, दोनों पक्षों के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी को सुदृढ़ करने के उपायों, क्षेत्रीय स्थिति और आपसी हित के विविध मुद्दों पर गहन चर्चा की गई।
यह इस माह भारत की ओर से यूएई का दूसरा उच्चस्तरीय दौरा है, जो दोनों देशों के बीच बढ़ती कूटनीतिक सक्रियता को स्पष्ट रूप से रेखांकित करता है।
जयशंकर के दौरे के बाद डोभाल की यात्रा का महत्व
इससे पहले विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने 11 अप्रैल 2025 को यूएई का दो दिवसीय दौरा किया था। उस दौरान उन्होंने यूएई राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से मुलाकात कर पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के दौरान यूएई में रह रहे भारतीय समुदाय की सुरक्षा और भलाई सुनिश्चित करने के लिए उनका आभार व्यक्त किया था।
जयशंकर ने दुबई के क्राउन प्रिंस शेख हमदान बिन मोहम्मद बिन राशिद अल मकतूम से भी भेंट की थी और यूएई के उपप्रधानमंत्री एवं विदेश मंत्री शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान के साथ पश्चिम एशिया के बदलते हालात और उनके व्यापक प्रभावों पर विस्तृत बातचीत की थी।
भारत-यूएई रणनीतिक साझेदारी: गहराता संबंध
भारत और यूएई के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी केवल कूटनीतिक शिष्टाचार तक सीमित नहीं है — यह संबंध व्यापार, ऊर्जा, रक्षा सहयोग और प्रवासी भारतीय समुदाय की सुरक्षा जैसे बहुआयामी क्षेत्रों में फैला हुआ है। यूएई में लगभग 35 लाख भारतीय निवास करते हैं, जो वहां का सबसे बड़ा प्रवासी समुदाय है।
पश्चिम एशिया में इजराइल-हमास युद्ध के चलते उत्पन्न अस्थिरता के बीच भारत की यह कूटनीतिक सक्रियता अत्यंत महत्वपूर्ण है। एनएसए स्तर की बैठक यह संकेत देती है कि भारत क्षेत्रीय सुरक्षा मामलों में यूएई को एक विश्वसनीय और रणनीतिक भागीदार मानता है।
विश्लेषण: एक माह में दो उच्चस्तरीय दौरों का संदेश
गौरतलब है कि अप्रैल 2025 में भारत ने मात्र कुछ हफ्तों के भीतर विदेश मंत्री और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार — दोनों को यूएई भेजा। यह असाधारण कूटनीतिक गतिविधि उस समय हो रही है जब पाकिस्तान के साथ भारत का तनाव अपने चरम पर है और पहलगाम आतंकी हमले के बाद क्षेत्रीय सुरक्षा गणित बदल रहा है।
विश्लेषकों के अनुसार, भारत यूएई जैसे खाड़ी देशों को यह स्पष्ट संदेश देना चाहता है कि पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद के विरुद्ध उसकी कार्रवाई में उन्हें भारत के साथ खड़ा होना होगा। यूएई, जो पाकिस्तान का पारंपरिक मित्र भी रहा है, से इस स्तर की कूटनीतिक संलग्नता भारत की बदली हुई विदेश नीति रणनीति को दर्शाती है।
आने वाले हफ्तों में भारत-यूएई के बीच रक्षा सहयोग, व्यापार समझौतों और प्रवासी सुरक्षा के मोर्चे पर और ठोस घोषणाएं हो सकती हैं।