संभल हिंसा: सुप्रीम कोर्ट ने मुल्ला अफरोज का NSA रद्द किया, यूपी सरकार पर ₹10 लाख जुर्माना
सारांश
मुख्य बातें
सर्वोच्च न्यायालय ने 29 सितंबर 2026 को संभल हिंसा मामले के मुख्य आरोपी मुल्ला अफरोज पर लगाए गए राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) को गैरकानूनी करार देते हुए रद्द कर दिया और उनकी जमानत याचिका स्वीकार कर ली। न्यायालय ने साथ ही उत्तर प्रदेश सरकार पर ₹10 लाख का जुर्माना भी ठोका, यह मानते हुए कि NSA का इस मामले में दुरुपयोग किया गया।
मामले की पृष्ठभूमि
नवंबर 2024 में उत्तर प्रदेश के संभल जिले में शाही जामा मस्जिद के न्यायालय-निर्देशित सर्वे के दौरान भड़की हिंसा में कई लोगों की जानें गई थीं और व्यापक तोड़फोड़ हुई थी। पुलिस ने मुल्ला अफरोज को इस हिंसा का मुख्य साजिशकर्ता बताते हुए गिरफ्तार किया था। इलाहाबाद उच्च न्यायालय से जमानत मिलने के तुरंत बाद अक्टूबर 2025 में यूपी सरकार ने उन पर NSA लगाकर पुनः गिरफ्तार कर लिया था।
गौरतलब है कि NSA के तहत किसी व्यक्ति को बिना मुकदमे के 12 महीने तक हिरासत में रखा जा सकता है। इसी कार्रवाई को चुनौती देते हुए मुल्ला अफरोज ने सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी।
सुप्रीम कोर्ट की कड़ी टिप्पणियाँ
सुनवाई के दौरान सर्वोच्च न्यायालय ने यूपी सरकार की कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े किए। न्यायालय ने पूछा कि क्या पुलिस हिरासत में दर्ज किए गए ऐसे बयान को NSA के तहत निवारक नजरबंदी का आधार बनाया जा सकता है, जो कानूनी रूप से न्यायालय में साक्ष्य के तौर पर मान्य नहीं होता। न्यायालय ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के उस आदेश को भी पलट दिया जिसमें NSA को उचित ठहराया गया था।
यूपी सरकार का पक्ष और न्यायालय का निर्णय
उत्तर प्रदेश सरकार ने अपनी स्थिति का बचाव करते हुए दलील दी थी कि मुल्ला अफरोज की रिहाई से क्षेत्र में पुनः हिंसा भड़कने और सार्वजनिक व्यवस्था बिगड़ने की आशंका थी, इसलिए निवारक नजरबंदी अनिवार्य थी। हालाँकि सर्वोच्च न्यायालय ने सरकार की इस दलील को अस्वीकार कर दिया। न्यायालय ने स्पष्ट रूप से माना कि NSA लगाने की पूरी प्रक्रिया कानूनी मानकों पर खरी नहीं उतरती और इस कानून का इस्तेमाल गलत तरीके से किया गया।
NSA के दुरुपयोग पर व्यापक चिंता
यह ऐसे समय में आया है जब नागरिक अधिकार संगठन और विपक्षी दल लंबे समय से राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के कथित दुरुपयोग पर आवाज़ उठाते रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय से जमानत मिलते ही NSA लगाने की यह रणनीति न्यायिक आदेशों को प्रभावहीन बनाती है। सर्वोच्च न्यायालय का यह फैसला NSA के इस्तेमाल पर एक महत्वपूर्ण मिसाल के रूप में देखा जा रहा है।
आगे की राह
सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के अनुसार मुल्ला अफरोज को अब जमानत पर रिहा किया जाएगा। संभल हिंसा से जुड़े अन्य आपराधिक मामलों में कार्यवाही यथावत जारी रहेगी। यूपी सरकार पर लगाया गया ₹10 लाख का जुर्माना इस मामले में न्यायपालिका की नाराज़गी का स्पष्ट संकेत है। न्यायिक विशेषज्ञों के अनुसार यह फैसला भविष्य में NSA की समीक्षा याचिकाओं पर सुनवाई की दिशा तय कर सकता है।