एशियन गेम्स 2026: हिमांशु ढिल्लों ने 10 मीटर एयर राइफल में जीता सिल्वर, रुद्रांक्ष पाटिल को ब्रॉन्ज
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय निशानेबाज हिमांशु ढिल्लों ने एशियन गेम्स 2026 में 21 सितंबर को नागोया में पुरुषों के 10 मीटर एयर राइफल इवेंट में 252.4 प्वाइंट्स के साथ सिल्वर मेडल अपने नाम किया। यह सीनियर स्तर पर उनका पहला अंतरराष्ट्रीय पदक है, जो उनके करियर का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। भारत के लिए एक और खुशखबरी तब आई जब रुद्रांक्ष पाटिल ने 230.9 प्वाइंट्स के साथ ब्रॉन्ज मेडल हासिल किया।
मुख्य घटनाक्रम
इस इवेंट में चीन के मौजूदा ओलंपिक चैंपियन शेंग लिहाओ ने 254.2 प्वाइंट्स के गेम्स रिकॉर्ड के साथ गोल्ड मेडल जीता। हिमांशु ढिल्लों ने 252.4 प्वाइंट्स के साथ सिल्वर और रुद्रांक्ष पाटिल ने 230.9 प्वाइंट्स के साथ ब्रॉन्ज हासिल किया। यह इवेंट भारत के लिए दोहरी खुशी लेकर आया, क्योंकि एक ही स्पर्धा में भारत के दो निशानेबाज पोडियम पर रहे।
हिमांशु की प्रतिक्रिया
पदक जीतने के बाद हिमांशु ढिल्लों ने कहा, "यह मेरे लिए बहुत गर्व का पल है। मैं बहुत खुश हूं, क्योंकि यह मेरा पहला सीनियर मेडल है। मैं अपने मेडल बॉक्स में एक और पदक जोड़कर बहुत खुश हूं। मैंने अपने देश के लिए सिल्वर मेडल जीता है। यह बहुत खुशी की बात है।"
उन्होंने इस उपलब्धि का श्रेय अपनी पूरी टीम को देते हुए कहा, "मैं यह मेडल अपने परिवार को समर्पित करता हूं। मैं अपने माता पिता को नहीं भूल सकता। मैं यह मेडल अपनी कोच, पूजा घाटकर को समर्पित करता हूं। मैं यह मेडल अपने साइकोलॉजिस्ट, शिवम द्विवेदी को समर्पित करता हूं। मेरी कोच बहुत निष्ठावान हैं। उन्होंने मुझे बहुत प्रोत्साहित किया।"
कोच और साइकोलॉजिस्ट की भूमिका
हिमांशु ने खुलासा किया कि उनकी सफलता के पीछे कोच पूजा घाटकर और साइकोलॉजिस्ट शिवम द्विवेदी की अहम भूमिका रही। उन्होंने बताया, "उन्होंने मुझे फोकस बनाए रखने में मदद की और हर तरह के भटकाव से दूर रखा।" शूटिंग जैसे एकाग्रता प्रधान खेल में मानसिक प्रशिक्षण की यह स्वीकृति भारतीय खेलों में एक नई परिपक्वता को दर्शाती है।
रोल मॉडल और परिवार का साथ
हिमांशु ढिल्लों ओलंपिक चैंपियन अभिनव बिंद्रा को अपना शूटिंग रोल मॉडल मानते हैं, जबकि अन्य खेलों में वह विराट कोहली से प्रेरणा लेते हैं। इवेंट के तुरंत बाद वह अपने पिता से संपर्क नहीं कर सके, क्योंकि वह उस समय विदेश यात्रा पर थे, लेकिन उन्होंने अपनी माँ से बात की। उन्होंने बताया, "वह बहुत गर्व महसूस कर रही थीं। वह बहुत खुश हैं। होटल वापस जाने पर मैं उनसे विस्तार से बात करूंगा।"
भारतीय निशानेबाजी का बड़ा दिन
गौरतलब है कि एशियन गेम्स की एकल स्पर्धा में भारत के दो निशानेबाजों का एक साथ पोडियम पर आना, देश की शूटिंग अकादमियों और प्रशिक्षण प्रणाली की गहराती ताकत का संकेत है। यह ऐसे समय में आया है जब पेरिस ओलंपिक 2024 के बाद भारतीय शूटिंग ने नई पीढ़ी को तराशने पर जोर दिया है। आने वाले ओलंपिक क्वालिफिकेशन चक्र में इन दोनों निशानेबाजों का प्रदर्शन भारत की उम्मीदों का केंद्र बनेगा।