कोलकाता: स्वतंत्रता दिवस पर आशुतोष कॉलेज में तृणमूल युवा नेता उपासना चौधरी पर अंडे फेंके गए
सारांश
मुख्य बातें
कोलकाता के आशुतोष कॉलेज में 15 अगस्त 2026 को स्वतंत्रता दिवस के ध्वजारोहण कार्यक्रम के दौरान तृणमूल कांग्रेस (TMC) की युवा नेता और तृणमूल छात्र परिषद (TMCP) की अध्यक्ष उपासना चौधरी पर अंडे फेंके गए। यह घटना उस समय हुई जब उन्हें कॉलेज परिसर में प्रवेश से रोक दिया गया और परिसर के बाहर तनाव का माहौल बन गया।
मुख्य घटनाक्रम
शनिवार की सुबह उपासना चौधरी अपने समर्थकों के साथ आशुतोष कॉलेज में राष्ट्रीय ध्वज फहराने पहुँची थीं। हालांकि, कॉलेज का वैध पहचान पत्र न होने के कारण सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें परिसर में प्रवेश करने से रोक दिया। ड्यूटी पर तैनात पुलिस अधिकारियों ने उन्हें कॉलेज के सामने एकत्र होने से भी मना किया, जिससे इलाके में तनाव तेज़ी से बढ़ा।
इसी तनावपूर्ण माहौल के बीच उपासना चौधरी के सिर और शरीर पर अंडे फेंके गए। घटना के तुरंत बाद उन्होंने फेसबुक लाइव पर आकर कड़ा विरोध दर्ज कराया।
उपासना चौधरी के आरोप
उपासना चौधरी ने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के सदस्यों ने उन पर हमला किया। उन्होंने कहा, 'पुलिस ने हमें कुछ नहीं बताया, हमारे पहचान पत्र तक नहीं देखे! लेकिन जब हम राष्ट्रीय ध्वज फहराने गए, तो हमें 'बाहरी' करार दिया गया। BJP और ABVP सदस्यों ने हम पर अंडे फेंके।' उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस ने हमलावरों की मदद की और कोई कार्रवाई नहीं की।
BJP और ABVP का खंडन
BJP और ABVP ने तृणमूल नेता के आरोपों का खंडन किया है। आशुतोष कॉलेज में एक ABVP सदस्य ने कहा कि उपासना चौधरी जनता के गुस्से का शिकार हुई हैं और जो लोग तृणमूल कांग्रेस से नाखुश हैं, उन्होंने अपना आक्रोश उन पर निकाला।
व्यापक संदर्भ: 'अंडा थेरेपी' की राजनीति
यह घटना पश्चिम बंगाल में हाल के राजनीतिक उथल-पुथल की पृष्ठभूमि में हुई है। हाल के विधानसभा चुनाव के बाद BJP के सत्ता में आने पर TMC के बड़ी संख्या में नेताओं, पूर्व मंत्रियों और पार्षदों को जबरन वसूली, मारपीट, छेड़छाड़ और धमकी देने सहित कई आरोपों में गिरफ्तार किया गया। कथित तौर पर, अधिकतर मामलों में जब TMC नेताओं को पुलिस हिरासत में ले जाया जा रहा था, तब क्रोधित लोगों ने उन पर अंडे फेंके और 'चोर' के नारे लगाए। प्रदर्शनकारियों ने इस विरोध के तरीके को 'अंडा थेरेपी' का नाम दिया है।
गौरतलब है कि 15 अगस्त को राष्ट्रीय पर्व पर इस तरह की घटना राज्य के राजनीतिक तनाव की गहराई को उजागर करती है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पुलिस इस मामले में क्या कार्रवाई करती है और राजनीतिक दल किस दिशा में आगे बढ़ते हैं।