16 अगस्त 2026
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पाकिस्तान का 'कठोर शासन' बलूचिस्तान-KPK में उग्रवाद बढ़ा रहा है, POK में विरोध जारी: रिपोर्ट

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पाकिस्तान का 'कठोर शासन' बलूचिस्तान-KPK में उग्रवाद बढ़ा रहा है, POK में विरोध जारी: रिपोर्ट

सारांश

इंटरनेशनल सेंटर फॉर पीस स्टडीज की रिपोर्ट पाकिस्तान की उस विफलता को उजागर करती है जहाँ सैन्य-केंद्रित शासन ने बलूचिस्तान और KPK में विद्रोह को बुझाने की बजाय भड़काया है — 2025 में 95% हमले इन्हीं दो प्रांतों में। IMF की बैसाखी और 68.5% ऋण-बोझ के बीच पाकिस्तान के पास राजनीतिक समाधान की जगह बहुत कम बची है।

मुख्य बातें

इंटरनेशनल सेंटर फॉर पीस स्टडीज की रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान के 'कठोर शासन' ने बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में उग्रवाद को बढ़ावा दिया है।
2023 में विद्रोही हमलों का 93% इन्हीं दोनों प्रांतों में था, जो 2024-25 में बढ़कर 95% हो गया।
पाकिस्तान की आर्थिक विकास दर 2025-26 में मात्र 3.5% रहने का अनुमान; सार्वजनिक ऋण GDP के 68.5% तक पहुँचा।
IMF ने पाकिस्तान को 7 अरब अमेरिकी डॉलर का राहत पैकेज दिया है।
POK में जारी विरोध प्रदर्शन पाकिस्तान की आंतरिक उथल-पुथल की गहराई को उजागर करते हैं।
रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तानी सेना की 'सुरक्षा-केंद्रित' प्रतिक्रिया लोकतांत्रिक समाधान की संभावनाओं को कमज़ोर करती है।

इस्लामाबाद में जारी इंटरनेशनल सेंटर फॉर पीस स्टडीज की एक ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान का 'कठोर शासन' दृष्टिकोण बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा (KPK) प्रांतों में उग्रवाद को लगातार हवा दे रहा है, राजनीतिक विभाजन को गहरा कर रहा है और देशव्यापी अस्थिरता को बढ़ावा दे रहा है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (POK) में जारी विरोध प्रदर्शन पाकिस्तान की आंतरिक उथल-पुथल की गहराई को उजागर करते हैं, जिसे किसी भी अंतरराष्ट्रीय सद्भावना से कम नहीं किया जा सकता।

रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष

रिपोर्ट के अनुसार, बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में 2023 में हुए विद्रोही हमलों का 93 प्रतिशत हिस्सा था, जो 2024 और 2025 में बढ़कर 95 प्रतिशत हो गया। यह आँकड़ा स्पष्ट करता है कि इन दोनों प्रांतों में सुरक्षा स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। रिपोर्ट में यह भी रेखांकित किया गया है कि 2025-26 में पाकिस्तान की आर्थिक विकास दर मात्र 3.5 प्रतिशत रहने का अनुमान है।

आर्थिक संकट और ऋण का बोझ

अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) द्वारा पाकिस्तान को 7 अरब अमेरिकी डॉलर का राहत पैकेज दिया गया है, फिर भी देश का सार्वजनिक ऋण सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के 68.5 प्रतिशत तक पहुँच चुका है। रिपोर्ट में कहा गया है कि ऐसे में देश को तत्काल ऐसे वास्तविक राजनीतिक नेतृत्व की आवश्यकता है जो आंतरिक संघर्षों को सुलझाने और दीर्घकालिक राजनीतिक व आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित करने में सक्षम हो।

क्षेत्रीय अशांति और नागरिक अलगाव

रिपोर्ट के अनुसार, बलूचिस्तान, खैबर पख्तूनख्वा और POK — तीनों क्षेत्र राजनीतिक अशांति, हिंसक झड़पों और नागरिकों के बीच बढ़ते अलगाव से जूझ रहे हैं। विरोध प्रदर्शनों के कारण भले ही क्षेत्र-दर-क्षेत्र भिन्न हों, लेकिन कुछ साझा मुद्दे हैं — संघीय सरकार द्वारा अत्यधिक केंद्रीकरण, गहरी आर्थिक असमानता और राजनीतिक हाशियाकरण। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि नागरिक सरकार ने इन संघर्षों को राजनीतिक रूप से हल करने की अपनी ज़िम्मेदारी से पीछे हट गई है।

सेना की 'सुरक्षा-केंद्रित' प्रतिक्रिया पर सवाल

रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तानी सशस्त्र बल इन संघर्षों को राजद्रोह या कानून-व्यवस्था की समस्या के रूप में चित्रित करते हैं और प्रदर्शनकारियों पर बाहरी शक्तियों के लिए काम करने का आरोप लगाते हुए उनकी राजनीतिक वैधता को नकारते हैं। रिपोर्ट के अनुसार यह अत्यधिक 'सुरक्षा-केंद्रित' प्रतिक्रिया लोकतांत्रिक माध्यमों से शिकायतों के समाधान की संभावनाओं को कमज़ोर करती है और अविश्वास, अलगाव तथा टकराव के एक दुष्चक्र को बढ़ावा देती है।

अंतरराष्ट्रीय विश्वसनीयता पर असर

रिपोर्ट में यह भी रेखांकित किया गया है कि विदेशों में संभावित शांति मध्यस्थ के रूप में पाकिस्तान की विश्वसनीयता अंततः घरेलू स्तर पर शांति और राजनीतिक स्थिरता स्थापित करने की उसकी क्षमता पर निर्भर करेगी। गौरतलब है कि यह रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब पाकिस्तान IMF की शर्तों के तहत कठिन आर्थिक सुधारों से गुज़र रहा है और सियासी उठापटक थमने का नाम नहीं ले रही।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि स्थायी संघर्ष को जन्म दिया है। IMF के 7 अरब डॉलर के पैकेज के बावजूद 68.5% ऋण-बोझ यह सवाल खड़ा करता है कि आर्थिक राहत बिना राजनीतिक सुधार के टिकाऊ है या नहीं। मुख्यधारा की कवरेज जो चूकती है वह यह है कि POK के विरोध प्रदर्शन अब केवल स्थानीय शिकायत नहीं रहे — वे पाकिस्तान की वैश्विक कूटनीतिक साख पर सीधा असर डाल रहे हैं।
RashtraPress
16 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पाकिस्तान के 'कठोर शासन' से क्या तात्पर्य है और इसका उग्रवाद से क्या संबंध है?
रिपोर्ट में 'कठोर शासन' से तात्पर्य उस नीति से है जिसमें राजनीतिक असंतोष को लोकतांत्रिक माध्यमों से सुलझाने की बजाय सैन्य और सुरक्षा बलों के ज़रिए दबाया जाता है। रिपोर्ट के अनुसार इसी नीति के कारण बलूचिस्तान और KPK में विद्रोही हमले 2023 के 93% से बढ़कर 2025 में 95% हो गए।
बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में विरोध के मुख्य कारण क्या हैं?
रिपोर्ट के अनुसार तीन प्रमुख कारण हैं — संघीय सरकार द्वारा अत्यधिक केंद्रीकरण, गहरी आर्थिक असमानता और राजनीतिक हाशियाकरण। नागरिक सरकार ने इन संघर्षों को राजनीतिक रूप से हल करने की ज़िम्मेदारी से पीछे हट गई है, जिससे अविश्वास और टकराव का दुष्चक्र बना है।
पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति 2025-26 में कैसी है?
इंटरनेशनल सेंटर फॉर पीस स्टडीज की रिपोर्ट के अनुसार 2025-26 में पाकिस्तान की आर्थिक विकास दर मात्र 3.5% रहने का अनुमान है। देश का सार्वजनिक ऋण GDP के 68.5% तक पहुँच चुका है और IMF से 7 अरब अमेरिकी डॉलर का राहत पैकेज लिया गया है।
पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (POK) में क्या हो रहा है?
रिपोर्ट के अनुसार POK में लगातार विरोध प्रदर्शन जारी हैं जो पाकिस्तान की आंतरिक उथल-पुथल की गहराई को उजागर करते हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि इन प्रदर्शनों को अंतरराष्ट्रीय सद्भावना से भी कम नहीं किया जा सकता।
पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय शांति मध्यस्थ की भूमिका पर इसका क्या असर पड़ेगा?
रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि विदेशों में शांति मध्यस्थ के रूप में पाकिस्तान की विश्वसनीयता घरेलू स्तर पर शांति और राजनीतिक स्थिरता स्थापित करने की उसकी क्षमता पर निर्भर करेगी। जब तक आंतरिक संघर्ष बने रहेंगे, पाकिस्तान की वैश्विक कूटनीतिक साख कमज़ोर रहेगी।
राष्ट्र प्रेस
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