क्या पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान में बढ़ता संघर्ष विकास के लिए खतरा है?

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क्या पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान में बढ़ता संघर्ष विकास के लिए खतरा है?

सारांश

पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान में जारी हिंसा ने देश के संसाधन-आधारित विकास को खतरे में डाल दिया है। क्या यह संघर्ष पाकिस्तान के भविष्य को प्रभावित करेगा? जानें इस रिपोर्ट में।

Key Takeaways

  • हिंसा ने विकास की नींव को कमजोर किया है।
  • खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान में संसाधनों की प्रचुरता है।
  • रिपोर्ट में निवेशकों के लिए गंभीर संकेत हैं।
  • अधिकांश मौतें केपी और बलूचिस्तान में हुईं।
  • सुरक्षा एजेंसियां प्रमुख निशाने पर हैं।

इस्लामाबाद, 10 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा (केपी) और बलूचिस्तान प्रांतों में बढ़ती हुई हिंसा ने देश के संसाधन-आधारित विकास की बुनियाद को कमजोर कर दिया है। केपी, जो जलविद्युत, सीमा-पार ऊर्जा गलियारों और उभरते महत्वपूर्ण खनिज संसाधनों का केंद्र है, और बलूचिस्तान, जिसमें तांबा-सोना, कोयला और तटीय ऊर्जा अवसंरचना जैसे विशाल संसाधन हैं, दोनों ही संघर्ष का शिकार बन गए हैं। इसके बावजूद, इन प्रांतों में लगातार हिंसा जारी है, जिससे विकास और निवेश पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।

इस्लामाबाद स्थित सेंटर फॉर रिसर्च एंड सिक्योरिटी स्टडीज (सीआरएसएस) द्वारा जारी एक रिपोर्ट में बताया गया है कि अक्टूबर 2025 तक डूरंड लाइन पर हमलों में कमी आई, लेकिन 2025 पाकिस्तान के लिए पिछले एक दशक का सबसे खतरनाक वर्ष बन गया। इस दौरान, हिंसा का एक बड़ा हिस्सा केपी और बलूचिस्तान में देखा गया।

अफगान डायस्पोरा नेटवर्क की रिपोर्ट के अनुसार, कुल हिंसा में वर्ष दर वर्ष लगभग 34 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। 2024 में जहाँ 2,555 मौतें हुईं, वहीं 2025 में यह आंकड़ा बढ़कर 3,417 हो गया। यह रुझान 2021 में तालिबान की वापसी के बाद से लगातार जारी है। 2023 में हिंसा में लगभग 56 प्रतिशत, 2024 में करीब 67 प्रतिशत और 2025 में 34 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जो दर्शाता है कि पाकिस्तान एक दीर्घकालिक सुरक्षा संकट का सामना कर रहा है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि निवेशकों के लिए यह स्थिति गंभीर संकेत है, क्योंकि यह सुरक्षा माहौल में संरचनात्मक गिरावट को दर्शाती है, जिसे केवल जोखिम प्रीमियम या अतिरिक्त सुरक्षा उपायों से नहीं संभाला जा सकता।

हिंसा का सबसे अधिक प्रभाव पाकिस्तान की ऊर्जा और खनिज क्षमता के रीढ़ वाले प्रांतों पर पड़ा है। 2025 में देश भर में हुई कुल मौतों में से 96 प्रतिशत से अधिक और हिंसक घटनाओं के लगभग 93 प्रतिशत मामले केपी और बलूचिस्तान में दर्ज किए गए। केपी में 2024 के 1,620 से बढ़कर 2025 में 2,331 मौतें हुईं, जो 44 प्रतिशत की वृद्धि है। वहीं बलूचिस्तान में मौतें 787 से बढ़कर 956 हो गईं, जो लगभग 22 प्रतिशत की वृद्धि है।

रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में हिंसा के प्रमुख निशाने पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियां रहीं। इस दौरान पाकिस्तानी सेना और फ्रंटियर कॉर्प्स के 374 जवान मारे गए, जिनमें 22 अधिकारी शामिल थे, जबकि पुलिस बल में 216 मौतें दर्ज की गईं।

हिंसा के लिए सबसे अधिक जिम्मेदार तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) को बताया गया है। इसके बाद बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (बीएलए), बलूच लिबरेशन फ्रंट (बीएलएफ) और आतंकी संगठन दाएश की क्षेत्रीय शाखा का नाम सामने आया है।

रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि ये संगठन पहले भी रणनीतिक अवसंरचना, चीनी-समर्थित परियोजनाओं और सरकारी प्रतीकों को निशाना बनाते रहे हैं। भारी संख्या में आतंकियों के मारे जाने के बावजूद इन संगठनों की सक्रियता यह दर्शाती है कि वे उच्च-मूल्य वाले आर्थिक ठिकानों को भी निशाना बना सकते हैं, जिससे पाकिस्तान की विकास योजनाओं पर और बड़ा खतरा उत्पन्न हो सकता है।

Point of View

हमारा ध्यान इस संकट पर है जो पाकिस्तान के विकास को प्रभावित कर रहा है। देश की सुरक्षा और विकास के लिए आवश्यक है कि इन क्षेत्रों में स्थिरता लाई जाए। हमें इस संघर्ष को समाप्त करने के लिए ठोस उपाय करने की आवश्यकता है।
NationPress
11/01/2026

Frequently Asked Questions

पाकिस्तान में हिंसा का मुख्य कारण क्या है?
पाकिस्तान में हिंसा का मुख्य कारण आतंकवादी संगठन और स्थानीय संघर्ष हैं जो सुरक्षा और विकास को प्रभावित कर रहे हैं।
खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान में क्या संसाधन हैं?
खैबर पख्तूनख्वा में जलविद्युत और खनिज संसाधन हैं, जबकि बलूचिस्तान में तांबा, सोना और कोयला जैसे विशाल संसाधन मौजूद हैं।
हिंसा का निवेश पर क्या प्रभाव पड़ रहा है?
हिंसा के कारण सुरक्षा माहौल में गिरावट आई है, जिससे निवेशकों में अनिश्चितता बढ़ी है।
क्या पाकिस्तान में स्थिति में सुधार की संभावना है?
स्थिति में सुधार की संभावना तभी है जब सुरक्षा उपायों को सख्ती से लागू किया जाए और विकास योजनाओं को प्राथमिकता दी जाए।
क्या इस संघर्ष का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर असर पड़ेगा?
हाँ, यह संघर्ष न केवल पाकिस्तान बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता और अंतरराष्ट्रीय निवेश पर भी नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।
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