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मध्य प्रदेश में साइबर सिक्योरिटी रिसर्च सेंटर की स्थापना होगी: मुख्यमंत्री मोहन यादव का ऐलान

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मध्य प्रदेश में साइबर सिक्योरिटी रिसर्च सेंटर की स्थापना होगी: मुख्यमंत्री मोहन यादव का ऐलान

सारांश

मध्य प्रदेश में साइबर सुरक्षा की दिशा में बड़ा कदम — मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भोपाल में महू के मिलिट्री कॉलेज के सहयोग से साइबर सिक्योरिटी रिसर्च सेंटर स्थापित करने का ऐलान किया। डेटा ब्रीच पर सरकारी जवाबदेही की बात भी कही।

मुख्य बातें

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 15 जून 2025 को भोपाल में साइबर सिक्योरिटी रिसर्च सेंटर स्थापित करने की घोषणा की।
रिसर्च सेंटर महू स्थित मिलिट्री कॉलेज ऑफ टेलीकम्युनिकेशन इंजीनियरिंग और शैक्षणिक संस्थानों के सहयोग से बनेगा।
केंद्र का उद्देश्य साइबर सुरक्षा अनुसंधान, नवाचार और कौशल विकास को बढ़ावा देना है।
डेटा ब्रीच की स्थिति में आर्थिक भरपाई की जिम्मेदारी राज्य सरकार की होगी।
घोषणा 'राज्य डेटा के लिए साइबर सुरक्षा फ्रेमवर्क को सुदृढ़ बनाने' विषयक परामर्श कार्यशाला में की गई।

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 15 जून 2025 को भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में राज्य में साइबर सिक्योरिटी रिसर्च सेंटर स्थापित करने की औपचारिक घोषणा की। 'राज्य डेटा के लिए साइबर सुरक्षा फ्रेमवर्क को सुदृढ़ बनाने' विषय पर आयोजित परामर्श कार्यशाला के उद्घाटन अवसर पर उन्होंने कहा कि डीपफेक, डेटा चोरी और साइबर हमलों जैसी चुनौतियों के बीच सुरक्षित डिजिटल व्यवस्था आज की सर्वोच्च आवश्यकता बन चुकी है।

रिसर्च सेंटर की संरचना और सहयोगी संस्थान

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बताया कि यह साइबर सिक्योरिटी रिसर्च सेंटर महू स्थित मिलिट्री कॉलेज ऑफ टेलीकम्युनिकेशन इंजीनियरिंग तथा राज्य के प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों के सहयोग से स्थापित किया जाएगा। यह केंद्र साइबर सुरक्षा अनुसंधान, नवाचार और कौशल विकास के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण आधार बनेगा। सैन्य तकनीकी संस्थान के साथ साझेदारी इस पहल को नागरिक और रक्षा दोनों आयामों में विशेष महत्व देती है।

डेटा सुरक्षा पर सरकार का रुख

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि डिजिटल युग में डेटा केवल सूचना नहीं, बल्कि नागरिकों के विश्वास और राष्ट्र की महत्वपूर्ण परिसंपत्ति है। उन्होंने कहा, 'साइबर क्राइम और डेटा सेफ्टी के मामले में लापरवाही की कोई गुंजाइश नहीं है।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि डेटा ब्रीच की स्थिति में आर्थिक भरपाई की जिम्मेदारी राज्य सरकार की होगी — जो सरकारी डेटा संरक्षण के प्रति एक स्पष्ट जवाबदेही का संकेत है।

मध्य प्रदेश पुलिस और ऑपरेशन सिंदूर का संदर्भ

यादव ने कहा कि मध्य प्रदेश पुलिस ने साइबर अपराधियों के विरुद्ध उल्लेखनीय कार्य किया है। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख करते हुए कहा कि उस दौरान नई तकनीकी चुनौतियाँ सामने आईं, जिनसे यह स्पष्ट हुआ कि साइबर सुरक्षा अब केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा का विषय बन चुकी है। गौरतलब है कि यह कार्यशाला ऐसे समय में आयोजित हुई जब देशभर में राज्य सरकारों के डेटा सिस्टम पर साइबर हमलों की घटनाएँ बढ़ रही हैं।

आम जनता और डिजिटल इकोसिस्टम पर असर

राज्य सरकार का लक्ष्य एक सुरक्षित डिजिटल इकोसिस्टम विकसित करना है जिससे नागरिकों की व्यक्तिगत जानकारी और सरकारी सेवाओं से जुड़ा डेटा सुरक्षित रह सके। विशेषज्ञों के अनुसार, रिसर्च सेंटर की स्थापना से राज्य में साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में प्रशिक्षित जनशक्ति भी तैयार होगी, जो दीर्घकालिक रूप से रोज़गार के नए अवसर भी पैदा कर सकती है।

आगे की राह

अभी तक रिसर्च सेंटर की स्थापना की समयसीमा और बजट का आधिकारिक विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया है। परामर्श कार्यशाला में विशेषज्ञों और अधिकारियों के सुझावों के आधार पर साइबर सुरक्षा फ्रेमवर्क को अंतिम रूप दिए जाने की उम्मीद है। मध्य प्रदेश की यह पहल अन्य राज्यों के लिए भी एक मॉडल बन सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा क्रियान्वयन की होगी — बजट, समयसीमा और जवाबदेही तंत्र का कोई विवरण अभी सार्वजनिक नहीं हुआ है। सैन्य संस्थान के साथ साझेदारी एक नवीन प्रयोग है, पर नागरिक और रक्षा प्रणालियों के बीच समन्वय की जटिलताएँ भी कम नहीं हैं। डेटा ब्रीच पर सरकारी आर्थिक जिम्मेदारी का वादा साहसिक है, किंतु इसे कानूनी ढाँचे में बाँधे बिना यह केवल राजनीतिक वक्तव्य बनकर रह सकता है। देश के कई राज्यों में ऐसी घोषणाएँ हो चुकी हैं जो कार्यशाला की दीवारों से बाहर नहीं निकल पाईं — मध्य प्रदेश को इस चक्र से बचने के लिए ठोस रोडमैप सार्वजनिक करना होगा।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मध्य प्रदेश साइबर सिक्योरिटी रिसर्च सेंटर क्या है?
यह मुख्यमंत्री मोहन यादव द्वारा 15 जून 2025 को घोषित एक प्रस्तावित अनुसंधान केंद्र है, जो साइबर सुरक्षा, नवाचार और कौशल विकास पर केंद्रित होगा। इसे महू स्थित मिलिट्री कॉलेज ऑफ टेलीकम्युनिकेशन इंजीनियरिंग और राज्य के शैक्षणिक संस्थानों के सहयोग से स्थापित किया जाएगा।
यह रिसर्च सेंटर कहाँ और किसके सहयोग से बनेगा?
केंद्र की स्थापना में महू स्थित मिलिट्री कॉलेज ऑफ टेलीकम्युनिकेशन इंजीनियरिंग की प्रमुख भूमिका होगी, साथ ही राज्य के शैक्षणिक संस्थान भी जुड़ेंगे। अभी तक केंद्र की सटीक भौगोलिक स्थिति और बजट का आधिकारिक खुलासा नहीं हुआ है।
मध्य प्रदेश सरकार डेटा ब्रीच की स्थिति में क्या करेगी?
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा है कि डेटा ब्रीच की स्थिति में आर्थिक भरपाई की जिम्मेदारी राज्य सरकार की होगी। यह एक महत्वपूर्ण जवाबदेही का वादा है, हालाँकि इसे लागू करने का कानूनी या प्रशासनिक ढाँचा अभी स्पष्ट नहीं किया गया है।
यह घोषणा किस अवसर पर की गई?
यह घोषणा भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में 'राज्य डेटा के लिए साइबर सुरक्षा फ्रेमवर्क को सुदृढ़ बनाने' विषय पर आयोजित परामर्श कार्यशाला के उद्घाटन के दौरान की गई। इस कार्यशाला में साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ और सरकारी अधिकारी शामिल हुए।
इस रिसर्च सेंटर से मध्य प्रदेश के नागरिकों को क्या फायदा होगा?
रिसर्च सेंटर से राज्य में साइबर सुरक्षा अनुसंधान को बल मिलेगा और प्रशिक्षित जनशक्ति तैयार होगी, जिससे नागरिकों का डेटा अधिक सुरक्षित होगा। विशेषज्ञों के अनुसार, इससे साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में रोज़गार के नए अवसर भी पैदा हो सकते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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