यूपी में अतिवृष्टि: CM योगी ने 24 घंटे में मुआवजे के दिए निर्देश, नेपाल बाढ़ से सीमावर्ती जिलों में अलर्ट
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश में लगातार हो रही अतिवृष्टि और आकाशीय बिजली से हुई जनहानि व संपत्ति के नुकसान पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 26 अगस्त 2026 को कड़ा संज्ञान लिया। उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रभावित परिवारों को नियमानुसार 24 घंटे के भीतर मुआवजा सुनिश्चित किया जाए और राहत कार्य में किसी प्रकार की शिथिलता न बरती जाए।
मुख्य निर्देश और राहत कार्य
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को फील्ड में उतरकर प्रभावित क्षेत्रों का सीधा जायजा लेने और जरूरतमंद परिवारों तक हर संभव सहायता पहुँचाने के आदेश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि जलभराव वाले क्षेत्रों में नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और प्रशासन को स्थानीय परिस्थितियों पर निरंतर नज़र रखनी होगी।
योगी ने अति वर्षा और आकाशीय बिजली से हुई जनहानि, पशुहानि और आर्थिक क्षति का तत्काल आकलन कराने का भी निर्देश दिया। अधिकारियों को प्रभावित परिवारों से लगातार संवाद बनाए रखने और राहत-सहायता की निगरानी करने को कहा गया है।
प्रदेशवासियों से सावधानी की अपील
मुख्यमंत्री ने आम जनता से अपील की कि आकाशीय बिजली के दौरान अनावश्यक रूप से घर से बाहर न निकलें। उन्होंने चेतावनी दी कि अतिवृष्टि के समय नदियों और जलाशयों में स्नान करने से विशेष रूप से बचा जाए। साथ ही, प्रशासन द्वारा जारी सुरक्षा निर्देशों का पालन करने की भी अपील की गई है।
नेपाल बाढ़ से सीमावर्ती जिलों में हाई अलर्ट
नेपाल के रसुवा क्षेत्र में भोटेकोशी नदी में आई भीषण बाढ़ के मद्देनज़र उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती जिलों महाराजगंज और कुशीनगर में सतर्कता बढ़ा दी गई है। अधिकारियों के अनुसार, नेपाल में बाढ़ के प्रभाव से इन जिलों में गंडक और नारायणी नदियों का जलस्तर बढ़ने की आशंका है।
मुख्यमंत्री ने नेपाल में हुई क्षति को अत्यंत चिंताजनक बताते हुए स्थानीय प्रशासन को नदियों के जलस्तर पर पैनी नज़र रखने और सभी जरूरी तैयारियाँ सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने भगवान पशुपतिनाथ से सभी के सकुशल रहने की प्रार्थना भी की।
आगे की स्थिति
यह ऐसे समय में आया है जब मानसून की तीव्रता पूरे उत्तर भारत में बनी हुई है और कई राज्य बाढ़ व जलभराव से जूझ रहे हैं। गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश जैसे बड़े और घनी आबादी वाले राज्य में आपदा राहत की गति और पारदर्शिता हमेशा से एक बड़ी चुनौती रही है। प्रशासन की तत्परता और 24 घंटे के भीतर मुआवजे के निर्देश की पालना ही यह तय करेगी कि सरकार की मंशा जमीन पर कितनी उतरती है।