26 अगस्त 2026
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भारत-जापान स्टार्टअप गोलमेज टोक्यो: डीप-टेक कॉरिडोर और $1 अरब फंड ऑफ फंड्स का प्रस्ताव

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भारत-जापान स्टार्टअप गोलमेज टोक्यो: डीप-टेक कॉरिडोर और $1 अरब फंड ऑफ फंड्स का प्रस्ताव

सारांश

टोक्यो में भारत-जापान स्टार्टअप गोलमेज सिर्फ कूटनीतिक शिष्टाचार नहीं था — यह दो पूरक अर्थव्यवस्थाओं के बीच डीप-टेक में साझा नेतृत्व का खाका था। $1 अरब के फंड ऑफ फंड्स और जापान-भारत डीप-टेक कैपिटल कॉरिडोर के प्रस्ताव के साथ, भारत अब केवल सॉफ्टवेयर हब नहीं, बल्कि उन्नत विनिर्माण का वैश्विक भागीदार बनने की ओर अग्रसर है।

मुख्य बातें

पीयूष गोयल ने 26 अगस्त 2026 को टोक्यो में भारत-जापान स्टार्टअप गोलमेज बैठक को संबोधित किया।
भारत अब 2.5 लाख स्टार्टअप्स के साथ दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम है।
भारत-जापान पिचिंग सीरीज के जरिए 65 भारतीय स्टार्टअप्स को 100 जापानी कंपनियों से जोड़ा गया; 30 से अधिक व्यावसायिक साझेदारियाँ बनीं।
गोयल ने जापान-भारत डीप-टेक कैपिटल कॉरिडोर और $1 अरब के दूसरे फंड ऑफ फंड्स का प्रस्ताव रखा।
जापान की 40 प्रमुख कंपनियों और निवेश संस्थानों ने बैठक में भाग लिया; एआई, सेमीकंडक्टर, रक्षा और डीप-टेक प्रमुख सहयोग क्षेत्र चिन्हित।
222 सदस्यीय भारतीय कारोबारी प्रतिनिधिमंडल की उपस्थिति रही।

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने 26 अगस्त 2026 को टोक्यो में आयोजित भारत-जापान स्टार्टअप गोलमेज बैठक में कहा कि पिछले एक दशक में लगभग 2.5 लाख स्टार्टअप्स के साथ भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बन चुका है। दोनों देशों ने स्टार्टअप, डीप-टेक, नवाचार और एमएसएमई क्षेत्र में सहयोग को नई ऊँचाई पर ले जाने की प्रतिबद्धता जताई।

बैठक का स्वरूप और भागीदारी

इस गोलमेज में दोनों देशों के वरिष्ठ सरकारी प्रतिनिधियों, निवेशकों, उद्योग जगत के नेताओं और स्टार्टअप संस्थापकों ने हिस्सा लिया। जापान की लगभग 40 प्रमुख कंपनियों और निवेश संस्थानों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे, जिनमें स्पार्क्स ग्रुप, एमयूएफजी इनोवेशन पार्टनर्स, बियॉन्ड नेक्स्ट वेंचर्स, मिजुहो फाइनेंशियल ग्रुप, एसबीआई इन्वेस्टमेंट, फुजित्सु और डीजी दाइवा वेंचर्स शामिल थे। भारत की ओर से 222 सदस्यीय कारोबारी प्रतिनिधिमंडल उपस्थित था।

चर्चा का केंद्र प्रौद्योगिकी साझेदारी को सुदृढ़ करना, निवेश प्रवाह बढ़ाना और नवाचार-आधारित आर्थिक सहयोग के अगले चरण को गति देना रहा।

पीयूष गोयल की चार-स्तंभीय रूपरेखा

गोयल ने भारत-जापान स्टार्टअप सहयोग के लिए चार प्रमुख स्तंभों पर आधारित एक नई रूपरेखा प्रस्तावित की। पहला, जापान-भारत डीप-टेक कैपिटल कॉरिडोर की स्थापना, जिसका उद्देश्य शुरुआती चरण के अनुसंधान, डीप-टेक नवाचार और व्यावसायीकरण के लिए दीर्घकालिक पूंजी उपलब्ध कराना है। दूसरा, द्वि-दिशात्मक नवाचार सेतु, जिसके तहत दोनों देशों के विश्वविद्यालयों, इनक्यूबेटरों, अनुसंधान एवं विकास संस्थानों और प्रयोगशालाओं को आपस में जोड़ा जाएगा।

तीसरा, भारत की उत्पादन क्षमता और इंजीनियरिंग प्रतिभा को जापान की उन्नत विनिर्माण विशेषज्ञता के साथ जोड़ना। चौथा, नियमित स्टार्टअप पिचिंग मंच स्थापित करना ताकि भारतीय उद्यमियों, जापानी कंपनियों, उद्यम पूंजी कोषों और रणनीतिक निवेशकों के बीच निरंतर संवाद बना रहे। इसके अतिरिक्त गोयल ने भारत सरकार द्वारा प्रस्तावित लगभग $1 अरब के दूसरे फंड ऑफ फंड्स का उल्लेख किया, जो विशेष रूप से डीप-टेक कंपनियों को समर्थन देने पर केंद्रित होगा, और जापानी निवेशकों से इसमें सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया।

राजदूत और जाइका की प्रतिक्रिया

जापान में भारत की राजदूत नगमा मोहम्मद मलिक ने बताया कि भारत-जापान पिचिंग सीरीज के माध्यम से अब तक 65 भारतीय स्टार्टअप्स को लगभग 100 जापानी कंपनियों से जोड़ा जा चुका है और इससे 30 से अधिक व्यावसायिक साझेदारियाँ स्थापित हुई हैं।

जापान अंतरराष्ट्रीय सहयोग एजेंसी (जाइका) के वरिष्ठ उपाध्यक्ष शोहेई हारा ने कहा कि यह साझेदारी दोतरफा लाभ की है — जापान अपनी तकनीकी विशेषज्ञता साझा कर सकता है, जबकि भारत की सामाजिक और विकास संबंधी चुनौतियों को बड़े पैमाने पर व्यावसायिक अवसरों में बदलने की क्षमता से सीख सकता है। जाइका ने भारतीय बाजार के अवसरों को अधिक संख्या में जापानी स्टार्टअप्स तक पहुँचाने की इच्छा भी जताई।

भविष्यगत क्षेत्र और स्टार्टअप प्रदर्शन

निवेशकों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), सेमीकंडक्टर, स्वास्थ्य सेवाएँ, अंतरिक्ष, रक्षा, उन्नत विनिर्माण और डीप-टेक को भारत-जापान निवेश सहयोग के प्रमुख भावी क्षेत्रों के रूप में चिन्हित किया। बैठक में भारतीय स्टार्टअप्स ने एयरोस्पेस एवं रक्षा, ड्रोन, रोबोटिक्स, कृत्रिम अंग, वेयरहाउस स्वचालन, गतिशीलता और डिजिटल स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में अपनी क्षमताओं का प्रदर्शन किया।

उद्योग प्रतिनिधियों ने एमएसएमई क्षेत्र को स्टार्टअप्स और वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं के साथ अधिक मजबूती से जोड़ने तथा भारत में उत्पादन स्थापित करने वाली कंपनियों के लिए बेहतर प्लग-एंड-प्ले अवसंरचना उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर बल दिया। यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब भारत का स्टार्टअप इकोसिस्टम केवल इंटरनेट और सॉफ्टवेयर आधारित कारोबार से आगे बढ़कर विनिर्माण और उन्नत प्रौद्योगिकी-आधारित उद्यमों की ओर तेजी से अग्रसर हो रहा है। आने वाले महीनों में दोनों देशों के बीच प्रस्तावित ढाँचों के क्रियान्वयन की दिशा में ठोस कदम उठाए जाने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

40 जापानी कंपनियाँ, चार-स्तंभीय रूपरेखा — प्रभावशाली है, लेकिन असली कसौटी क्रियान्वयन की होगी। गौरतलब है कि भारत-जापान पिचिंग सीरीज में 65 स्टार्टअप्स से केवल 30 साझेदारियाँ बनीं — यह रूपांतरण दर बताती है कि इरादे और व्यावसायिक परिणामों के बीच अभी भी खाई है। $1 अरब का फंड ऑफ फंड्स डीप-टेक के लिए महत्वाकांक्षी है, परंतु पहले फंड ऑफ फंड्स के वितरण और रोज़गार परिणामों की स्वतंत्र समीक्षा के बिना यह आँकड़ा केवल सुर्खी बनने का जोखिम उठाता है। भारत का स्टार्टअप इकोसिस्टम सॉफ्टवेयर से हार्डटेक की ओर बढ़ रहा है — यह सकारात्मक संकेत है, लेकिन जापानी पूंजी को आकर्षित करने के लिए नियामकीय सरलीकरण और प्लग-एंड-प्ले अवसंरचना की माँग अभी भी अधूरी है।
RashtraPress
26 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत-जापान स्टार्टअप गोलमेज बैठक क्या थी और इसमें क्या हुआ?
यह 26 अगस्त 2026 को टोक्यो में आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक थी जिसमें केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने भारत-जापान डीप-टेक कैपिटल कॉरिडोर और $1 अरब के फंड ऑफ फंड्स का प्रस्ताव रखा। जापान की 40 प्रमुख कंपनियों और 222 सदस्यीय भारतीय कारोबारी प्रतिनिधिमंडल ने भाग लिया।
भारत-जापान पिचिंग सीरीज के अब तक क्या परिणाम रहे हैं?
राजदूत नगमा मोहम्मद मलिक के अनुसार, इस सीरीज के माध्यम से अब तक 65 भारतीय स्टार्टअप्स को लगभग 100 जापानी कंपनियों से जोड़ा जा चुका है और 30 से अधिक व्यावसायिक साझेदारियाँ स्थापित हुई हैं।
जापान-भारत डीप-टेक कैपिटल कॉरिडोर क्या है?
यह पीयूष गोयल द्वारा प्रस्तावित एक ढाँचा है जिसका उद्देश्य शुरुआती चरण के अनुसंधान, डीप-टेक नवाचार और व्यावसायीकरण के लिए दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक पूंजी प्रवाह सुनिश्चित करना है। यह चार-स्तंभीय सहयोग रूपरेखा का पहला और प्रमुख घटक है।
भारत-जापान सहयोग के लिए कौन-से क्षेत्र प्राथमिकता में हैं?
निवेशकों ने एआई, सेमीकंडक्टर, स्वास्थ्य सेवाएँ, अंतरिक्ष, रक्षा, उन्नत विनिर्माण और डीप-टेक को प्रमुख भावी क्षेत्रों के रूप में चिन्हित किया। भारतीय स्टार्टअप्स ने एयरोस्पेस, ड्रोन, रोबोटिक्स और डिजिटल स्वास्थ्य में भी अपनी क्षमताएँ प्रदर्शित कीं।
भारत दुनिया के स्टार्टअप इकोसिस्टम में कहाँ खड़ा है?
पीयूष गोयल के अनुसार, पिछले एक दशक में लगभग 2.5 लाख स्टार्टअप्स के साथ भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बन चुका है। देश का यह इकोसिस्टम अब इंटरनेट-सॉफ्टवेयर से आगे बढ़कर उन्नत विनिर्माण और डीप-टेक की ओर तेजी से अग्रसर है।
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