19 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

यूपी-जापान इन्वेस्टमेंट मीट 2026: शिवराज चौहान बोले — जापानी तकनीक छोटे किसानों तक पहुँचे, लागत घटे

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
यूपी-जापान इन्वेस्टमेंट मीट 2026: शिवराज चौहान बोले — जापानी तकनीक छोटे किसानों तक पहुँचे, लागत घटे

सारांश

यूपी-जापान इन्वेस्टमेंट मीट 2026 में शिवराज सिंह चौहान ने साफ़ कहा — जापान की तकनीक अगर छोटे किसान तक नहीं पहुँची, तो साझेदारी अधूरी है। 200 से अधिक जापानी उद्योगपतियों की मौजूदगी में यह मीट यूपी को वैश्विक निवेश मानचित्र पर स्थापित करने की कोशिश है।

मुख्य बातें

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 19 अगस्त 2026 को यूपी-जापान इन्वेस्टमेंट मीट-2026 में जापानी कृषि तकनीक को छोटे और सीमांत किसानों तक पहुँचाने का आह्वान किया।
उन्होंने कृषि उत्पादकता बढ़ाने, पानी की खपत और उत्पादन लागत घटाने के लिए व्यावहारिक तकनीक विकसित करने पर ज़ोर दिया।
उत्तर प्रदेश को जापानी कंपनियों के निवेश के लिए मज़बूत गंतव्य बताया; मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की हालिया जापान यात्रा का उल्लेख किया।
ग्रामीण युवाओं को कृषि मशीनरी के संचालन व रखरखाव से जोड़कर रोज़गार और उद्यमिता के अवसर पैदा करने की बात कही।
इन्वेस्टमेंट मीट 18 से 23 अगस्त तक चलेगी; इसमें 200 से अधिक जापानी उद्योगपति और नीति-निर्माता शामिल हैं।
मीट में ग्रीन हाइड्रोजन, सेमीकंडक्टर, EV, रिन्यूएबल एनर्जी और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में निवेश के अवसर प्रस्तुत किए जा रहे हैं।

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 19 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में आयोजित यूपी-जापान इन्वेस्टमेंट मीट-2026 में कृषि क्षेत्र में जापानी तकनीक और विशेषज्ञता को भारत के छोटे एवं सीमांत किसानों तक पहुँचाने का आह्वान किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत-जापान साझेदारी का असली लाभ तभी होगा जब वह किसानों, ग्रामीण युवाओं और गाँव की अर्थव्यवस्था तक पहुँचे।

मुख्य घोषणाएँ और आह्वान

चौहान ने जापानी उद्योग जगत और संस्थानों से आग्रह किया कि वे ऐसी कृषि मशीनरी और तकनीक विकसित करें जो छोटे और सीमांत किसानों के लिए सुलभ और किफायती हो। उन्होंने कहा कि आज की सबसे बड़ी ज़रूरत ऐसी तकनीक है जो किसान की उत्पादकता बढ़ाए, पानी की खपत घटाए और उत्पादन लागत कम करे। साथ ही उन्होंने ज़ोर दिया कि कृषि अनुसंधान केवल कागज़ों तक सीमित न रहे, बल्कि उसे ऐसे व्यावहारिक उत्पादों में बदला जाए जिन्हें किसान आसानी से अपना सकें।

उत्तर प्रदेश — जापानी निवेश का मज़बूत केंद्र

केंद्रीय मंत्री ने उत्तर प्रदेश को जापानी कंपनियों के लिए एक प्रमुख निवेश गंतव्य बताया। उन्होंने कहा कि राज्य की विशाल उपभोक्ता बाज़ार, कुशल मानव संसाधन, बेहतर कनेक्टिविटी और निवेश-अनुकूल नीतियाँ इसे वैश्विक स्तर पर आकर्षक बनाती हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की हालिया जापान यात्रा का भी उल्लेख करते हुए कहा कि इससे दोनों पक्षों के संबंध और प्रगाढ़ हुए हैं।

ग्रामीण युवाओं के लिए रोज़गार के अवसर

चौहान ने कृषि तकनीक को ग्रामीण युवाओं से जोड़ने पर विशेष बल दिया। उनके अनुसार, नई कृषि मशीनरी के संचालन, रखरखाव और उससे जुड़े व्यवसायों में गाँव के युवाओं के लिए रोज़गार और उद्यमिता के व्यापक अवसर उत्पन्न हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह गाँव का युवा विकास का दर्शक नहीं, बल्कि सक्रिय भागीदार बनेगा।

भारत-जापान साझेदारी की व्यापक दृष्टि

मंत्री ने भारत-जापान संबंधों को दो देशों के बीच नहीं, बल्कि दो संस्कृतियों के बीच की साझेदारी बताया। उन्होंने कहा कि भारत की सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक शक्ति और जापान की तकनीकी दक्षता मिलकर विकास की नई राह बना सकती हैं। उन्होंने जापान से कृषि तकनीक के क्षेत्र में भारत को वैश्विक केंद्र बनाने में सहयोग देने का भी आग्रह किया।

इन्वेस्टमेंट मीट का विस्तार और भागीदारी

उल्लेखनीय है कि यूपी-जापान इन्वेस्टमेंट मीट-2026 का आयोजन 18 से 23 अगस्त तक उत्तर प्रदेश और दिल्ली में हो रहा है। इसमें 200 से अधिक जापानी उद्योगपति, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, कारोबारी प्रतिनिधि और नीति-निर्माता भाग ले रहे हैं। मीट में ग्रीन हाइड्रोजन, रिन्यूएबल एनर्जी, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, सेमीकंडक्टर, ऑटोमोटिव कंपोनेंट्स, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, स्किल डेवलपमेंट और पर्यटन जैसे क्षेत्रों में निवेश के अवसर प्रस्तुत किए जा रहे हैं। यह मीट भारत-जापान कृषि-औद्योगिक सहयोग की दिशा में एक निर्णायक मंच साबित हो सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि जापानी तकनीक को छोटे किसान तक पहुँचाने का तंत्र क्या होगा — क्योंकि अतीत में कृषि-तकनीक साझेदारियाँ अक्सर बड़े कॉर्पोरेट खेतों तक सीमित रह गई हैं। भारत में औसत जोत का आकार डेढ़ हेक्टेयर से भी कम है, जो महँगी मशीनरी की पहुँच को स्वाभाविक रूप से सीमित करता है। जब तक सब्सिडी ढाँचा, किसान उत्पादक संगठन (FPO) और स्थानीय रखरखाव नेटवर्क एक साथ खड़े न हों, तब तक यह आह्वान नीयत तो दर्शाता है, नीति नहीं। मीट में 200 से अधिक जापानी उद्योगपतियों की भागीदारी उत्साहजनक है, पर निवेश के ठोस आँकड़े सामने आने पर ही इसकी वास्तविक सफलता आँकी जा सकेगी।
RashtraPress
19 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यूपी-जापान इन्वेस्टमेंट मीट-2026 क्या है?
यह उत्तर प्रदेश और जापान के बीच निवेश, तकनीक और औद्योगिक सहयोग को बढ़ावा देने के लिए आयोजित एक उच्चस्तरीय व्यापार सम्मेलन है, जो 18 से 23 अगस्त 2026 तक उत्तर प्रदेश और नई दिल्ली में आयोजित हो रहा है। इसमें 200 से अधिक जापानी उद्योगपति, सीईओ और नीति-निर्माता भाग ले रहे हैं।
शिवराज सिंह चौहान ने किसानों के लिए क्या माँग रखी?
उन्होंने जापानी उद्योग जगत से आग्रह किया कि ऐसी कृषि मशीनरी और तकनीक विकसित की जाए जो छोटे और सीमांत किसानों के लिए सुलभ और किफायती हो। उनका ज़ोर इस बात पर था कि तकनीक उत्पादकता बढ़ाए, पानी की खपत घटाए और उत्पादन लागत कम करे।
उत्तर प्रदेश में जापानी निवेश के लिए कौन-से क्षेत्र प्राथमिकता में हैं?
मीट में ग्रीन हाइड्रोजन, रिन्यूएबल एनर्जी, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, सेमीकंडक्टर, ऑटोमोटिव कंपोनेंट्स, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, स्किल डेवलपमेंट, कृषि तकनीक और पर्यटन जैसे क्षेत्रों में निवेश के अवसर प्रस्तुत किए जा रहे हैं।
ग्रामीण युवाओं को इस साझेदारी से कैसे लाभ होगा?
शिवराज सिंह चौहान के अनुसार, नई कृषि मशीनरी के संचालन, रखरखाव और उससे जुड़े व्यवसायों में ग्रामीण युवाओं के लिए रोज़गार और उद्यमिता के अवसर उत्पन्न हो सकते हैं। इससे गाँव का युवा विकास प्रक्रिया का सक्रिय भागीदार बनेगा।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जापान यात्रा का इस मीट से क्या संबंध है?
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की हालिया जापान यात्रा ने दोनों पक्षों के संबंधों को और प्रगाढ़ किया है, जिसकी परिणति इस इन्वेस्टमेंट मीट के रूप में सामने आई है। यह यात्रा उत्तर प्रदेश को जापानी निवेश के लिए एक विश्वसनीय गंतव्य के रूप में स्थापित करने की कूटनीतिक कड़ी रही है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 घंटा पहले
  2. 14 घंटे पहले
  3. 14 घंटे पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 1 महीना पहले
  7. 5 महीने पहले
  8. 5 महीने पहले