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भारत-जापान जॉइंट इकोनॉमिक फोरम: जापानी उद्योग जगत ने मोदी के नेतृत्व की सराहना, भारत को बताया निवेश का सशक्त केंद्र

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भारत-जापान जॉइंट इकोनॉमिक फोरम: जापानी उद्योग जगत ने मोदी के नेतृत्व की सराहना, भारत को बताया निवेश का सशक्त केंद्र

सारांश

नई दिल्ली में भारत-जापान जॉइंट इकोनॉमिक फोरम के मंच पर सुजुकी, आईएचआई, तनिता समेत दर्जन भर जापानी उद्योग नेताओं ने PM मोदी के नेतृत्व की एकमत प्रशंसा की और भारत को मैन्युफैक्चरिंग, स्टार्टअप, स्पेस तथा ग्रीन एनर्जी में निवेश का सबसे आकर्षक वैश्विक केंद्र बताया।

मुख्य बातें

भारत-जापान जॉइंट इकोनॉमिक फोरम 2 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में आयोजित हुआ।
चोशु इंडस्ट्री , सुजुकी , आईएचआई कॉरपोरेशन सहित 12 से अधिक जापानी कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों ने भाग लिया।
याकुमो के सीईओ ने 2018 के बाद से भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम की असाधारण वृद्धि को रेखांकित किया।
आईएचआई कॉरपोरेशन ने भारत-जापान ग्रीन अमोनिया इकोसिस्टम की संभावना जताई — भारत उत्पादन केंद्र, जापान निर्यात बाजार।
सुजुकी के प्रेसिडेंट ने भारत को उभरता हुआ वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट हब बताया।
जापानी नेताओं ने जापान की हार्डवेयर शक्ति और भारत की AI व सॉफ्टवेयर विशेषज्ञता को परस्पर पूरक बताया।

नई दिल्ली में 2 जुलाई 2026 को आयोजित भारत-जापान जॉइंट इकोनॉमिक फोरम में शीर्ष जापानी कारोबारी नेताओं ने एकस्वर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की प्रशंसा की और भारत को निवेश, नवाचार तथा रणनीतिक साझेदारी का एक मजबूत वैश्विक केंद्र करार दिया। फोरम में भाग लेने वाले उद्योग प्रतिनिधियों ने भारत की आर्थिक स्थिरता, स्टार्टअप परिवेश और द्विपक्षीय सहयोग की संभावनाओं पर खुलकर अपने विचार साझा किए।

मुख्य घटनाक्रम

चोशु इंडस्ट्री के अध्यक्ष एवं प्रतिनिधि निदेशक सुसुमु ओकामोटो ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत पहले की तुलना में अधिक खुला और स्थिर हुआ है। उन्होंने कहा, 'जापानी कंपनियाँ अपने दशकों के मैन्युफैक्चरिंग अनुभव और उन्नत तकनीक के साथ भारत की तेज औद्योगिक वृद्धि को और मजबूत कर सकती हैं। इससे दोनों देशों को फायदा होगा।'

याकुमो के फाउंडर एवं सीईओ काजुहिरो नाकाशोजी ने कहा कि 2018 के बाद से भारत का स्टार्टअप इकोसिस्टम बहुत तेजी से और शानदार तरीके से विकसित हुआ है। उनके अनुसार प्रधानमंत्री की नीतियों ने नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देकर स्टार्टअप्स के लिए एक सशक्त माहौल तैयार किया है।

उद्योग नेताओं की प्रमुख राय

तनिता इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर कोसुके किरयू ने प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व को 'शानदार' बताया और कहा कि उनके प्रयासों से भारत-जापान संबंध काफी प्रगाढ़ हुए हैं। सनटोरी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के सीईओ एवं प्रेसिडेंट ताका सन्नो ने कहा कि भारत का कारोबारी माहौल लगातार बेहतर हो रहा है, जिससे यह निवेश के लिए अत्यंत आकर्षक गंतव्य बन गया है।

ताकासागो फ्लूइडिक सिस्टम्स के सीईओ एवं सीओओ हारुयुकी हिरातानी ने दोनों देशों की पूरक शक्तियों को रेखांकित करते हुए कहा कि जापान मैकेनिकल इंजीनियरिंग में अग्रणी है, जबकि भारत सॉफ्टवेयर और डेटा के क्षेत्र में आगे है — यह संयोजन दोनों के लिए अत्यंत लाभकारी हो सकता है।

मनस्तु स्पेस के को-फाउंडर एवं सीईओ तुषार जाधव ने कहा कि दोनों देशों के नेतृत्व के बीच मजबूत संबंधों ने विशेष रूप से स्पेस सेक्टर में सहयोग को नई ऊँचाइयाँ दी हैं।

प्रौद्योगिकी और ऊर्जा साझेदारी

एम-टू लैबो की फाउंडर एवं सीईओ युरिको काटो ने प्रधानमंत्री मोदी को 'विश्व के एक महान नेता' बताया और कहा कि भारत और जापान नवाचार-आधारित विकास के लिए 'बेहतरीन जोड़ी' हैं। सिंस्पेक्टिव के फाउंडर मोटोयुकी अराई ने कहा कि जापान की हार्डवेयर क्षमता और भारत की आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस व एनालिटिक्स विशेषज्ञता मिलकर भविष्य में बड़ी संभावनाएँ उत्पन्न कर सकती हैं।

आईएचआई कॉरपोरेशन के प्रेसिडेंट हिरोशी आइडे ने ग्रीन अमोनिया के क्षेत्र में सहयोग की संभावना जताई। उन्होंने कहा कि भारत उत्पादन केंद्र की भूमिका निभा सकता है, जबकि जापान एक बड़े निर्यात बाजार के रूप में उभर सकता है — इससे दोनों देशों के ऊर्जा लक्ष्यों को बल मिलेगा।

मैन्युफैक्चरिंग और निर्यात की संभावनाएँ

सुजुकी के प्रतिनिधि निदेशक एवं प्रेसिडेंट तोशिहिरो सुजुकी ने कहा कि भारत तेजी से दुनिया के लिए एक बड़ा मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट हब बन रहा है। तोहो कोकी सेसाकुशो कंपनी लिमिटेड के कार्यकारी अध्यक्ष तात्सुतोशी सुजुकी ने भारत को 'संभावनाओं से भरा विशाल बाजार' बताते हुए दीर्घकालिक विकास की उज्ज्वल संभावनाएँ रेखांकित कीं। इनोवेशन थ्रू एनर्जी के प्रेसिडेंट एवं सीईओ पंकज गर्ग ने भी भारत-जापान संबंधों को 'पहले से कहीं अधिक मजबूत' बताया।

आगे क्या

यह फोरम ऐसे समय में आयोजित हुआ जब भारत और जापान दोनों वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में विविधता लाने की दिशा में सक्रिय हैं। गौरतलब है कि पिछले कुछ वर्षों में जापानी कंपनियों का भारत में निवेश उल्लेखनीय रूप से बढ़ा है। इस फोरम में व्यक्त किए गए विचार और प्रतिबद्धताएँ आने वाले समय में द्विपक्षीय व्यापार एवं निवेश के नए अध्याय की नींव रख सकती हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह ध्यान देना जरूरी है कि ऐसे मंचों पर व्यक्त भावनाएँ और वास्तविक निवेश प्रतिबद्धताएँ अक्सर अलग-अलग होती हैं। जापान पहले से ही भारत के शीर्ष निवेशकों में है, किंतु द्विपक्षीय व्यापार अभी भी दोनों अर्थव्यवस्थाओं की क्षमता के अनुपात में कम है। स्पेस, ग्रीन अमोनिया और AI जैसे क्षेत्रों में सहयोग की बात तो हो रही है, पर ठोस समझौतों और समयसीमाओं का अभाव इन घोषणाओं को महत्वाकांक्षी इरादों तक सीमित रखता है। असली कसौटी यह होगी कि फोरम की बातें अगले बारह महीनों में कितने निवेश अनुबंधों में बदलती हैं।
RashtraPress
2 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत-जापान जॉइंट इकोनॉमिक फोरम क्या है और यह कब हुआ?
यह भारत और जापान के उद्योग जगत के प्रतिनिधियों का एक संयुक्त आर्थिक मंच है, जो 2 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में आयोजित हुआ। इसमें दोनों देशों के बीच निवेश, मैन्युफैक्चरिंग, स्टार्टअप और ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग पर चर्चा हुई।
फोरम में किन जापानी कंपनियों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया?
फोरम में चोशु इंडस्ट्री, याकुमो, तनिता इंडिया, सनटोरी इंडिया, ताकासागो फ्लूइडिक सिस्टम्स, आईएचआई कॉरपोरेशन, सुजुकी, तोहो कोकी सेसाकुशो, एम-टू लैबो और सिंस्पेक्टिव सहित एक दर्जन से अधिक जापानी कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों ने भाग लिया।
जापानी उद्योग नेताओं ने भारत के बारे में क्या कहा?
जापानी नेताओं ने भारत को निवेश के लिए अधिक खुला, स्थिर और आकर्षक देश बताया। उन्होंने 2018 के बाद से स्टार्टअप इकोसिस्टम की तेज वृद्धि, मैन्युफैक्चरिंग क्षमता और भारत-जापान की पूरक तकनीकी शक्तियों को रेखांकित किया।
भारत और जापान के बीच किन क्षेत्रों में सहयोग की संभावना बताई गई?
फोरम में स्पेस सेक्टर, ग्रीन अमोनिया उत्पादन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मैन्युफैक्चरिंग, सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर तकनीक में सहयोग की संभावनाएँ उजागर हुईं। आईएचआई कॉरपोरेशन ने विशेष रूप से ग्रीन अमोनिया इकोसिस्टम में भारत की उत्पादन भूमिका और जापान के निर्यात बाजार की भूमिका का उल्लेख किया।
इस फोरम का भारत-जापान संबंधों पर क्या असर पड़ सकता है?
यह फोरम ऐसे समय में हुआ जब दोनों देश वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में विविधता लाने की दिशा में सक्रिय हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, इसमें व्यक्त प्रतिबद्धताएँ आने वाले समय में द्विपक्षीय व्यापार और निवेश को नई गति दे सकती हैं, बशर्ते ये ठोस अनुबंधों में तब्दील हों।
राष्ट्र प्रेस
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