आईआरसीटीसी मनी लॉन्ड्रिंग केस: लालू, तेजस्वी, राबड़ी पर आरोप तय करने की सुनवाई 30 अक्टूबर तक टली
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय जनता दल (RJD) प्रमुख लालू प्रसाद यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी और बेटे तेजस्वी यादव समेत 9 आरोपियों के खिलाफ आईआरसीटीसी मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आरोप तय करने की प्रक्रिया एक बार फिर स्थगित हो गई है। नई दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में 3 अक्टूबर 2026 को होने वाली सुनवाई टल गई और अब अगली तारीख 30 अक्टूबर 2026 तय की गई है।
मामले की पृष्ठभूमि
इससे पहले 11 सितंबर को दिल्ली की स्पेशल कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश में लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव और अन्य आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने का निर्देश दिया था। यह मामला आईआरसीटीसी होटल घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग प्रकरण से संबंधित है।
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम, 2002 (PMLA) के तहत जाँच शुरू की थी। यह जाँच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI), नई दिल्ली द्वारा दर्ज की गई एफआईआर के आधार पर की गई।
आरोप और जाँच का विवरण
CBI ने तत्कालीन रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव, पी.सी. गुप्ता और अन्य के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था।
जाँच एजेंसियों के अनुसार, तत्कालीन रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव ने अपने आधिकारिक पद का दुरुपयोग करते हुए पुरी और रांची स्थित रेलवे होटलों के विकास व संचालन का ठेका नियमों की अनदेखी करके मैसर्स सुजाता होटल प्राइवेट लिमिटेड को आवंटित किया था। इस ठेके के एवज में मैसर्स डिलाइट मार्केटिंग कंपनी प्राइवेट लिमिटेड को अत्यंत कम कीमत पर दो एकड़ भूखंड हस्तांतरित करने का सौदा हुआ था।
जाँच के अनुसार, इस कंपनी का स्वामित्व और नियंत्रण लालू यादव के करीबी सहयोगी प्रेम चंद गुप्ता के परिजनों के हाथ में था। बाद में नाममात्र की कीमत पर शेयर खरीद के ज़रिए इस जमीन और कंपनी का नियंत्रण राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव को हस्तांतरित कर दिया गया, जिससे प्रभावी रूप से जमीन का मालिकाना हक यादव परिवार के पास आ गया।
ED की कार्रवाई और संपत्ति जब्ती
प्रवर्तन निदेशालय ने PMLA की धारा 5 के तहत अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए कुल ₹44 करोड़ 75 लाख की संपत्तियाँ जब्त की थीं, जिसे बाद में निर्णायक प्राधिकरण ने उचित ठहराया। ED ने इस मामले में 24 अगस्त 2018 को राउज एवेन्यू कोर्ट के स्पेशल जज के समक्ष अभियोजन शिकायत दर्ज की थी।
क्या होगा आगे
गौरतलब है कि यह मामला वर्षों से अदालत में विचाराधीन है और आरोप तय होने की प्रक्रिया कई बार स्थगित हो चुकी है। अब 30 अक्टूबर 2026 को होने वाली सुनवाई में यह तय होगा कि आरोप औपचारिक रूप से कब और किस रूप में तय किए जाएँगे। इस मामले का परिणाम बिहार की राजनीति पर भी सीधा असर डाल सकता है, क्योंकि तेजस्वी यादव राज्य के प्रमुख विपक्षी नेताओं में से एक हैं।