आईआरसीटीसी मनी लॉन्ड्रिंग केस: राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव को 19 नवंबर को कोर्ट में पेश होने का आदेश
सारांश
मुख्य बातें
राउज एवेन्यू कोर्ट, नई दिल्ली ने 30 अक्टूबर 2026 को आईआरसीटीसी होटल घोटाले से जुड़े कथित धनशोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) मामले में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) प्रमुख लालू प्रसाद यादव की पत्नी राबड़ी देवी और पुत्र तेजस्वी यादव को अगली सुनवाई तक उपस्थिति से छूट प्रदान की। अदालत ने औपचारिक आरोप तय करने की कार्यवाही के लिए दोनों को 19 नवंबर को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया है।
शुक्रवार की सुनवाई में क्या हुआ
शुक्रवार की सुनवाई के दौरान राबड़ी देवी के वकील ने अदालत को सूचित किया कि वे स्वास्थ्य कारणों से उपस्थित होने में असमर्थ हैं। तेजस्वी यादव के वकील ने तर्क दिया कि उनकी फ्लाइट में देरी हुई और वे दोपहर 2 बजे तक पेश हो सकते हैं। अदालत ने दोनों को उस दिन के लिए छूट देते हुए अगली तारीख 19 नवंबर निर्धारित कर दी।
लालू प्रसाद का हाई कोर्ट में आवेदन
लालू प्रसाद यादव के वकील ने सुनवाई के दौरान ट्रायल कोर्ट को बताया कि दिल्ली उच्च न्यायालय ने उस आवेदन पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को नोटिस जारी किया है, जिसमें ट्रायल कोर्ट के आरोप-तय करने के आदेश को चुनौती दी गई है। उच्च न्यायालय ने लालू प्रसाद को 3 दिसंबर की अगली सुनवाई तक ट्रायल कोर्ट से स्थगन का अनुरोध करने की भी अनुमति दी है। ट्रायल कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जिन आरोपियों को उच्च न्यायालय से रोक (स्टे) नहीं मिली है, उन्हें 19 नवंबर को अनिवार्य रूप से उपस्थित होना होगा।
इस साल सितंबर में आरोप तय हो चुके हैं
राउज एवेन्यू कोर्ट के विशेष न्यायाधीश (पीएसी एक्ट) विशाल गोगने ने इस वर्ष सितंबर में लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव और अन्य आरोपियों के विरुद्ध 'प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA)' के प्रावधानों के तहत प्रथम दृष्टया मामला बनने का निर्धारण करते हुए आरोप तय किए थे। इसी सुनवाई में अदालत ने सात अन्य आरोपियों को आरोपमुक्त कर दिया था।
ईडी का आरोप: क्या है पूरा मामला
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अनुसार, कथित अनियमितताएँ 2004 से 2009 के बीच हुईं, जब लालू प्रसाद यादव केंद्र सरकार में रेल मंत्री थे। एजेंसी का आरोप है कि इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉरपोरेशन (IRCTC) के होटलों के रखरखाव और संचालन के ठेके राजद प्रमुख के करीबी सहयोगियों से जुड़ी एक निजी कंपनी को तय नियमों को दरकिनार करते हुए दिए गए। ईडी का यह भी कहना है कि इसके बदले में परिवार के सदस्यों और सहयोगियों से जुड़ी एक कथित 'बेनामी' कंपनी के जरिये तीन एकड़ की कीमती जमीन हासिल की गई।
यह मनी लॉन्ड्रिंग मामला, केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) द्वारा आईआरसीटीसी होटल घोटाले के संदर्भ में दर्ज मूल अपराध (प्रेडिकेट ऑफेंस) से जुड़ा हुआ है। लालू प्रसाद यादव ने इन सभी आरोपों का लगातार खंडन किया है और उनका पक्ष है कि आईआरसीटीसी होटलों के ठेके पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी प्रक्रिया के तहत दिए गए थे।
आगे क्या होगा
अब सभी की नज़रें 19 नवंबर की सुनवाई पर टिकी हैं, जब राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव को औपचारिक आरोप तय करने की प्रक्रिया के लिए अदालत में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना होगा। साथ ही, 3 दिसंबर को दिल्ली उच्च न्यायालय में लालू प्रसाद यादव की याचिका पर ईडी का जवाब आने के बाद यह स्पष्ट होगा कि ट्रायल पर रोक लगती है या नहीं। यह मामला बिहार की राजनीति और राजद के भविष्य पर भी दूरगामी असर डाल सकता है।