कैंसर अनुसंधान में बिल्ली की नई भूमिका: वैज्ञानिकों का बड़ा खुलासा
सारांश
Key Takeaways
- बिल्ली और इंसानों में कैंसर के इलाज में समानताएं हैं।
- कनाडा के वैज्ञानिकों ने यह शोध किया है।
- टीपी53 जैसे जीनों की समानता महत्वपूर्ण है।
- पालतू बिल्लियां मानव कैंसर के अध्ययन के लिए मॉडल बन सकती हैं।
- यह शोध वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण है।
नई दिल्ली, 21 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। हालिया शोध में यह पता चला है कि बिल्ली और इंसानों के बीच कैंसर के इलाज में सहयोगजेनेटिक समानताएं उजागर की गई हैं।
यह शोध कनाडा की यूनिवर्सिटी ऑफ गुएल्फ के वैज्ञानिकों द्वारा किया गया। शोधकर्ताओं की टीम ने सैकड़ों पालतू बिल्लियों के विभिन्न प्रकार के ट्यूमर का डीएनए विश्लेषण किया और एक विस्तृत जेनेटिक मैप तैयार किया। इस अध्ययन का नेतृत्व कैंसर जीवविज्ञानी जेफ्री वुड ने किया।
अध्ययन में पाया गया कि कुछ महत्वपूर्ण जीन—जैसे टीपी53—जो इंसानों में कैंसर के नियंत्रण या उसके फैलाव से जुड़े होते हैं, वही जीन बिल्लियों में भी समान रूप से पाए गए। यह समानता यह संकेत देती है कि कैंसर का जैविक व्यवहार कई स्तनधारी प्रजातियों में समान हो सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पालतू बिल्लियां इंसानों के साथ समान वातावरण साझा करती हैं। यह सभी एक ही घर में रहते हैं और समान प्रदूषण एवं जीवनशैली के प्रभावों के संपर्क में आते हैं। इसलिए, उनके शरीर में विकसित होने वाले ट्यूमर मानव कैंसर को समझने का एक स्वाभाविक मॉडल बन सकते हैं। यही कारण है कि इस अध्ययन को वन हेल्थ या वन मेडिसिन की अवधारणा से जोड़ा जा रहा है, जिसमें पशु और मानव स्वास्थ्य को एक-दूसरे से गहराई से जुड़ा माना जाता है।
शोधकर्ताओं का विश्वास है कि यदि बिल्लियों में पाए गए इन जेनेटिक पैटर्न के आधार पर नई दवाएं या लक्षित उपचार विकसित किए जाते हैं, तो भविष्य में उनका उपयोग मानव कैंसर उपचार में भी किया जा सकता है। इससे दवाओं के परीक्षण की प्रक्रिया अधिक प्रभावी और सटीक हो सकती है।
अंतर्राष्ट्रीय मीडिया और वैज्ञानिक समुदाय ने इस अध्ययन को कैंसर शोध में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है। 'साइंस' जैसी प्रतिष्ठित पत्रिका में इसका प्रकाशन इस बात का संकेत है कि यह खोज वैश्विक स्तर पर गंभीर वैज्ञानिक महत्व रखती है।