कल्याण में आवारा कुत्ते के काटने के बाद बैंक कर्मचारी ने आत्महत्या की
सारांश
Key Takeaways
- रेबीज एक जानलेवा बीमारी है जो आवारा कुत्तों के काटने से फैल सकती है।
- मानसिक तनाव आत्महत्या का एक बड़ा कारण हो सकता है।
- आवारा कुत्तों की संख्या पर नियंत्रण के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।
- स्थानीय प्रशासन को इस समस्या को गंभीरता से लेना होगा।
- समाज में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है।
कल्याण, 23 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। महाराष्ट्र के कल्याण पूर्व क्षेत्र में एक दुखद घटना सामने आई है, जहाँ एक बैंक कर्मचारी ने आवारा कुत्ते के काटने के बाद रेबीज के भय से आत्महत्या कर ली। इस घटना ने पूरे इलाके में हड़कंप मचा दिया है और स्थानीय निवासियों में भय का माहौल बन गया है।
मृतक की पहचान ऐस विश्वनाथ अमीन के तौर पर की गई है। वह कल्याण पूर्व के तिसगांव नाका स्थित सहजीवन सोसायटी में निवास करता था और एक निजी बैंक में वरिष्ठ पद पर कार्यरत था।
परिवारिक सूत्रों और स्थानीय लोगों के अनुसार, कुछ दिन पहले ऐस को एक आवारा कुत्ते ने उसके पैर में काट लिया था। इस घटना के बाद उसने चिकित्सकीय परामर्श लिया और रेबीज का टीका भी लगवाया। इसके बावजूद, वह मानसिक तनाव में रहने लगा और उसे यह डर सताने लगा कि कहीं उसे रेबीज न हो जाए। उसकी चिंता इस बात को लेकर भी थी कि यदि उसे यह बीमारी हो गई तो उसके परिवार के अन्य सदस्य भी प्रभावित हो सकते हैं। इसी भय के चलते उसने आत्महत्या करने का निर्णय लिया।
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को अपने कब्जे में लेकर आवश्यक कार्रवाई शुरू कर दी है। मामले को आकस्मिक मृत्यु के रूप में दर्ज कर जांच की जा रही है।
इस घटना के बाद स्थानीय स्तर पर आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या के प्रति लोगों में नाराजगी देखी जा रही है। शिवसेना (शिंदे गुट) के पार्षद महेश गायकवाड़ ने नगर निगम के अतिरिक्त आयुक्त हर्षल गायकवाड़ से चर्चा कर इस समस्या का समाधान निकालने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की है।