26 सितंबर 2026
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वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ: 'नमामि भारतम' कार्यक्रम में 1 करोड़ से अधिक लोगों ने किया सामूहिक गायन

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वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ: 'नमामि भारतम' कार्यक्रम में 1 करोड़ से अधिक लोगों ने किया सामूहिक गायन

सारांश

150 साल पहले बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की कलम से निकला एक गीत — और आज उसी गीत ने 25,000 संस्थानों और 1 करोड़ कंठों को एक सुर में बाँध दिया। विद्या भारती का 'नमामि भारतम' सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं, एक पीढ़ी को राष्ट्रचेतना से जोड़ने का प्रयास है।

मुख्य बातें

विद्या भारती के 'नमामि भारतम' अभियान के तहत 25 सितंबर 2026 को सुबह 11 बजे देशभर में एकसाथ सामूहिक वंदे मातरम गायन हुआ।
देशभर के 25,000 से अधिक संस्थानों ने भाग लिया; 1 करोड़ से अधिक लोगों की भागीदारी का लक्ष्य रखा गया था।
दिल्ली के 225 स्कूलों , नीमच में 3,000 लोगों, भुज (कच्छ) में 1,100 लोगों और अयोध्या के 60 स्थानों पर कार्यक्रम आयोजित हुए।
आयोजन का उद्देश्य गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड और एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में दर्ज होना था।
वंदे मातरम की रचना बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने 1875 में की और 1882 में 'आनंदमठ' में प्रकाशित की; 1896 में रवींद्रनाथ ठाकुर ने इसे राष्ट्रीय मंच पर गाया।

राष्ट्रगीत वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ के अवसर पर विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षण संस्थान के आह्वान पर शुक्रवार, 25 सितंबर 2026 को सुबह ठीक 11 बजे देशभर के 25,000 से अधिक विद्यालयों और संस्थानों में 'नमामि भारतम' कार्यक्रम के तहत एक साथ सामूहिक वंदे मातरम गायन का आयोजन हुआ। आयोजकों के अनुसार, इस राष्ट्रव्यापी अभियान में 1 करोड़ से अधिक लोगों ने भागीदारी की और गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड तथा एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में दर्ज होने का लक्ष्य रखा गया था।

दिल्ली से गुजरात तक: मुख्य आयोजन

पश्चिमी दिल्ली स्थित माता लीलावती सरस्वती स्कूल में आयोजित कार्यक्रम में विद्या भारती के अध्यक्ष सुखराज सेतिया मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। दिल्ली के कुल 225 स्कूलों में यह कार्यक्रम आयोजित किया गया। सेतिया ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा, 'जब हम वंदे मातरम गाएं, तो केवल शब्द मात्र ही न गाएं — वंदे मातरम हम इस प्रकार गाएं कि सुनने वाले लोगों को हमारी अंदर की राष्ट्रीय चेतना महसूस हो।'

गुजरात के कच्छ (भुज) में विद्या भारती, गुजरात प्रदेश और कच्छ कल्याण संघ से संबद्ध संस्थाओं द्वारा आयोजित 'नमामि भारतम' कार्यक्रम में 1,100 से अधिक लोगों ने एकसाथ वंदे मातरम गाया। कार्यक्रम का उद्घाटन कच्छ विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ. कनिष्क शाह ने किया, जबकि भुज नगरपालिका के महापौर शीतलभाई शाह विशेष अतिथि रहे।

उत्तराखंड और मध्य प्रदेश में भव्य आयोजन

उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल में राजमती देवी सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज तिमली में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में विधायक राजकुमार पोरी, कार्यक्रम अध्यक्ष जगत किशोर बर्थवाल और मुख्य वक्ता डॉ. केडी नारायण उपस्थित रहे। मसूरी में महात्मा योगेश्वर सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज में आयोजित कार्यक्रम में रिटायर्ड कर्नल अनिल कुमार, निधि बहुगुणा और मनोज रायल ने वंदे मातरम के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डाला।

मध्य प्रदेश के रायसेन में रामलीला मैदान स्थित सरस्वती शिशु विद्या मंदिर परिसर में 'एक स्वर, एक साथ, एक लय' की भावना के साथ सामूहिक गायन हुआ। नीमच के सरस्वती शिशु विद्या मंदिर में करीब 3,000 लोगों ने एकसाथ वंदे मातरम गाया, जिसमें नीमच विधायक दिलीप सिंह परिहार और जावद विधायक ओमप्रकाश सकलेचा भी शामिल रहे।

अयोध्या और अन्य शहरों में कार्यक्रम

अयोध्या में जिले के करीब 60 स्थानों पर सुबह 11 बजे सामूहिक वंदे मातरम गायन के कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें सरस्वती विद्या मंदिर और सरस्वती शिशु मंदिर के विद्यार्थी शामिल हुए।

विद्या भारती, मालवा प्रांत के विभाग समन्वयक राघवेन्द्र देराश्री ने बताया, 'हमारा संकल्प देशभर में एक करोड़ लोगों द्वारा इस गायन को संपन्न कराने का था और हमें विश्वास है कि हम इसे अवश्य पूर्ण करेंगे।'

वंदे मातरम का ऐतिहासिक संदर्भ

वक्ताओं ने कार्यक्रम के दौरान वंदे मातरम की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर प्रकाश डाला। बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने इस गीत की रचना 1875 में की थी और इसे 1882 में अपने उपन्यास आनंदमठ में प्रकाशित किया। 1896 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन में रवींद्रनाथ ठाकुर ने इसका सार्वजनिक सामूहिक गायन किया, जिसके बाद यह स्वतंत्रता आंदोलन की प्रेरणाशक्ति बन गया।

व्यवस्थापक विद्या भारती वनराजसिंह जडेजा ने कहा, 'वंदे मातरम सिर्फ एक गीत नहीं है — यह भारत की अंतरात्मा की आवाज है।' उन्होंने यह भी कहा कि संभवतः यह विश्व का पहला ऐसा गीत है जिसे गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में स्थान मिला है।

आगे क्या

विद्यालय समिति की सह-सचिव शिवा मित्तल ने बताया कि देशभर के 25,000 संस्थानों ने इस अभियान में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। आयोजकों के अनुसार गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड और एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में दर्ज होने की पुष्टि की प्रक्रिया जारी है। यह आयोजन भावी पीढ़ियों में राष्ट्रभावना जागृत करने की दिशा में विद्या भारती के दीर्घकालिक अभियान का हिस्सा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

000 संस्थानों की एकसाथ भागीदारी संगठनात्मक क्षमता का प्रमाण है, लेकिन यह सवाल भी उठता है कि गिनीज रिकॉर्ड की पुष्टि के लिए स्वतंत्र गणना का कोई ठोस तंत्र था या नहीं। इसके अलावा, इस आयोजन की व्यापकता यह दर्शाती है कि राष्ट्रगीत को लेकर जनमानस में कितनी गहरी भावनात्मक संलग्नता है — चाहे वह दिल्ली हो, कच्छ हो या पौड़ी गढ़वाल।
RashtraPress
26 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ क्यों मनाई जा रही है?
वंदे मातरम की रचना बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने 1875 में की थी, इसलिए 2025-26 में इसके 150 वर्ष पूर्ण हो रहे हैं। इस अवसर को चिह्नित करने के लिए विद्या भारती ने 'नमामि भारतम' कार्यक्रम के तहत देशव्यापी सामूहिक गायन का आयोजन किया।
'नमामि भारतम' कार्यक्रम क्या है?
यह विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षण संस्थान द्वारा आयोजित राष्ट्रव्यापी अभियान है, जिसके तहत 25 सितंबर 2026 को सुबह 11 बजे एकसाथ देशभर के 25,000 से अधिक संस्थानों में वंदे मातरम का सामूहिक गायन कराया गया। इसका लक्ष्य 1 करोड़ से अधिक लोगों को एक स्वर में जोड़ना और गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाना था।
वंदे मातरम का इतिहास क्या है?
वंदे मातरम की रचना बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने 1875 में की और 1882 में इसे अपने उपन्यास 'आनंदमठ' में प्रकाशित किया। 1896 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन में रवींद्रनाथ ठाकुर ने इसे सार्वजनिक रूप से गाया, जिसके बाद यह स्वतंत्रता आंदोलन की प्रमुख प्रेरणाशक्ति बन गया।
इस आयोजन में किन-किन शहरों ने भाग लिया?
दिल्ली (225 स्कूल), भुज-कच्छ (1,100 से अधिक प्रतिभागी), नीमच-मध्य प्रदेश (3,000 से अधिक लोग), पौड़ी गढ़वाल, मसूरी, रायसेन और अयोध्या (60 स्थान) सहित देशभर के 25,000 से अधिक संस्थानों ने इस अभियान में भाग लिया।
क्या वंदे मातरम सामूहिक गायन का कोई विश्व रिकॉर्ड बना?
आयोजकों के अनुसार इस अभियान का लक्ष्य गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड और एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में दर्ज होना था। रिकॉर्ड की औपचारिक पुष्टि की प्रक्रिया जारी बताई गई है; अंतिम घोषणा अभी नहीं हुई है।
राष्ट्र प्रेस
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