वंदे मातरम की 151वीं वर्षगांठ: राष्ट्रपति मुर्मु और नेताओं ने दी देशवासियों को बधाई
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्र गीत 'वंदे मातरम' की रचना के 151 वर्ष पूर्ण होने पर 7 नवंबर 2026 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु सहित देश के अनेक वरिष्ठ नेताओं ने देशवासियों को हार्दिक बधाई दी। यह वही गीत है जिसने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान करोड़ों भारतीयों में देशभक्ति और एकता की ज्वाला प्रज्वलित की थी।
राष्ट्रपति मुर्मु का संदेश
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के कार्यालय के आधिकारिक एक्स हैंडल पर उनका संदेश साझा किया गया। उन्होंने लिखा, "राष्ट्र गीत 'वंदे मातरम' की रचना के 151 वर्ष पूरे होने पर सभी देशवासियों को मैं हार्दिक बधाई देती हूं। स्वतन्त्रता आंदोलन के दौरान इस गीत ने देशभक्तों के लिए साहस, एकता और संकल्प के उद्घोष के रूप में कार्य किया। आज भी यह हमारी राष्ट्रीय अस्मिता, स्वाभिमान और मातृभूमि के प्रति समर्पण का प्रतीक है।" उन्होंने देशवासियों से 'राष्ट्र प्रथम' की भावना अपनाते हुए राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया।
केंद्रीय मंत्रियों की शुभकामनाएँ
केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने समस्त देशवासियों को राष्ट्रीय गीत की वर्षगांठ पर शुभकामनाएँ दीं। केंद्रीय संचार और पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि यह अमर गीत सदैव देशप्रेम, त्याग और समर्पण की भावना जागृत करता रहेगा। उन्होंने इसे "राष्ट्र भक्ति, राष्ट्रीय एकता और मातृभूमि के गौरव का प्रतीक" बताया।
मुख्यमंत्रियों की प्रतिक्रिया
असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने एक्स पर अपनी पोस्ट में 'वंदे मातरम' को "भारत की राष्ट्रीय चेतना का अमर स्वर" करार दिया और कहा कि डेढ़ शताब्दी बाद भी इसकी गूंज यह स्मरण कराती है कि राष्ट्र सर्वोपरि है। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इसे "मां भारती के प्रति असीम श्रद्धा और राष्ट्र समर्पण का उद्घोष" बताया और कहा कि इस गीत ने स्वतंत्रता संग्राम के कठिन दौर में देशवासियों के हृदय में आजादी की अलख जगाई।
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस गीत के रचयिता बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय को नमन किया और कहा कि वंदे मातरम "भारत की आत्मा का उद्घोष" है। बिहार भाजपा (BJP) अध्यक्ष संजय सरावगी ने भी एक्स पर पोस्ट करते हुए इसे "भारत की आत्मा और असंख्य देशभक्तों के त्याग एवं बलिदान की अमर अभिव्यक्ति" निरूपित किया।
वंदे मातरम का ऐतिहासिक महत्व
गौरतलब है कि 'वंदे मातरम' की रचना महान साहित्यकार बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय ने 1875 में की थी और यह गीत पहली बार 1882 में उनके उपन्यास 'आनंदमठ' में प्रकाशित हुआ था। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान यह गीत राष्ट्रीय प्रतिरोध का प्रतीक बन गया और लाखों देशभक्तों की प्रेरणा का स्रोत रहा। 24 जनवरी 1950 को भारत की संविधान सभा ने इसे राष्ट्र गीत के रूप में मान्यता दी।
राष्ट्रीय एकता का संदेश
इस वर्षगांठ पर नेताओं के संदेशों में एक साझा स्वर यह था कि 'वंदे मातरम' केवल एक गीत नहीं, बल्कि राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक अस्मिता का जीवंत प्रतीक है। यह ऐसे समय में उल्लेखनीय है जब देश विविधता में एकता की भावना को और सुदृढ़ करने पर बल दे रहा है। आने वाली पीढ़ियों तक इस गीत की प्रेरणा को संजोए रखना राष्ट्र निर्माण का अभिन्न हिस्सा बना रहेगा।