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वंदे मातरम की 151वीं वर्षगांठ: राष्ट्रपति मुर्मु और नेताओं ने दी देशवासियों को बधाई

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वंदे मातरम की 151वीं वर्षगांठ: राष्ट्रपति मुर्मु और नेताओं ने दी देशवासियों को बधाई

सारांश

151 वर्ष पूर्व रचित 'वंदे मातरम' आज भी उतना ही प्रासंगिक है — राष्ट्रपति मुर्मु से लेकर मुख्यमंत्रियों तक सभी ने इसे राष्ट्रीय एकता और मातृभूमि समर्पण का जीवंत प्रतीक बताया। बंकिमचंद्र का यह गीत स्वतंत्रता संग्राम की विरासत को आज की पीढ़ी से जोड़ता है।

मुख्य बातें

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने 7 नवंबर 2026 को 'वंदे मातरम' की 151वीं वर्षगांठ पर देशवासियों को बधाई दी।
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और ज्योतिरादित्य सिंधिया सहित कई नेताओं ने एक्स पर शुभकामना संदेश साझा किए।
असम CM हिमंता बिस्वा सरमा , MP CM मोहन यादव और दिल्ली CM रेखा गुप्ता ने भी वर्षगांठ पर पोस्ट किए।
'वंदे मातरम' की रचना बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय ने 1875 में की थी; 24 जनवरी 1950 को इसे राष्ट्र गीत का दर्जा मिला।
नेताओं ने इसे स्वतंत्रता संग्राम की प्रेरणा और राष्ट्रीय एकता का प्रतीक बताया।

राष्ट्र गीत 'वंदे मातरम' की रचना के 151 वर्ष पूर्ण होने पर 7 नवंबर 2026 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु सहित देश के अनेक वरिष्ठ नेताओं ने देशवासियों को हार्दिक बधाई दी। यह वही गीत है जिसने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान करोड़ों भारतीयों में देशभक्ति और एकता की ज्वाला प्रज्वलित की थी।

राष्ट्रपति मुर्मु का संदेश

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के कार्यालय के आधिकारिक एक्स हैंडल पर उनका संदेश साझा किया गया। उन्होंने लिखा, "राष्ट्र गीत 'वंदे मातरम' की रचना के 151 वर्ष पूरे होने पर सभी देशवासियों को मैं हार्दिक बधाई देती हूं। स्वतन्त्रता आंदोलन के दौरान इस गीत ने देशभक्तों के लिए साहस, एकता और संकल्प के उद्घोष के रूप में कार्य किया। आज भी यह हमारी राष्ट्रीय अस्मिता, स्वाभिमान और मातृभूमि के प्रति समर्पण का प्रतीक है।" उन्होंने देशवासियों से 'राष्ट्र प्रथम' की भावना अपनाते हुए राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया।

केंद्रीय मंत्रियों की शुभकामनाएँ

केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने समस्त देशवासियों को राष्ट्रीय गीत की वर्षगांठ पर शुभकामनाएँ दीं। केंद्रीय संचार और पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि यह अमर गीत सदैव देशप्रेम, त्याग और समर्पण की भावना जागृत करता रहेगा। उन्होंने इसे "राष्ट्र भक्ति, राष्ट्रीय एकता और मातृभूमि के गौरव का प्रतीक" बताया।

मुख्यमंत्रियों की प्रतिक्रिया

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने एक्स पर अपनी पोस्ट में 'वंदे मातरम' को "भारत की राष्ट्रीय चेतना का अमर स्वर" करार दिया और कहा कि डेढ़ शताब्दी बाद भी इसकी गूंज यह स्मरण कराती है कि राष्ट्र सर्वोपरि है। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इसे "मां भारती के प्रति असीम श्रद्धा और राष्ट्र समर्पण का उद्घोष" बताया और कहा कि इस गीत ने स्वतंत्रता संग्राम के कठिन दौर में देशवासियों के हृदय में आजादी की अलख जगाई।

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस गीत के रचयिता बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय को नमन किया और कहा कि वंदे मातरम "भारत की आत्मा का उद्घोष" है। बिहार भाजपा (BJP) अध्यक्ष संजय सरावगी ने भी एक्स पर पोस्ट करते हुए इसे "भारत की आत्मा और असंख्य देशभक्तों के त्याग एवं बलिदान की अमर अभिव्यक्ति" निरूपित किया।

वंदे मातरम का ऐतिहासिक महत्व

गौरतलब है कि 'वंदे मातरम' की रचना महान साहित्यकार बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय ने 1875 में की थी और यह गीत पहली बार 1882 में उनके उपन्यास 'आनंदमठ' में प्रकाशित हुआ था। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान यह गीत राष्ट्रीय प्रतिरोध का प्रतीक बन गया और लाखों देशभक्तों की प्रेरणा का स्रोत रहा। 24 जनवरी 1950 को भारत की संविधान सभा ने इसे राष्ट्र गीत के रूप में मान्यता दी।

राष्ट्रीय एकता का संदेश

इस वर्षगांठ पर नेताओं के संदेशों में एक साझा स्वर यह था कि 'वंदे मातरम' केवल एक गीत नहीं, बल्कि राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक अस्मिता का जीवंत प्रतीक है। यह ऐसे समय में उल्लेखनीय है जब देश विविधता में एकता की भावना को और सुदृढ़ करने पर बल दे रहा है। आने वाली पीढ़ियों तक इस गीत की प्रेरणा को संजोए रखना राष्ट्र निर्माण का अभिन्न हिस्सा बना रहेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह भी ध्यान देने योग्य है कि यही गीत दशकों तक संवेदनशील बहस का विषय रहा है। आज जब सभी दलों के नेता इसे एकमत से राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक बता रहे हैं, तो यह भारत की सांस्कृतिक विरासत को लेकर बढ़ती सहमति का संकेत है। बंकिमचंद्र के इस गीत की सार्थकता सिर्फ शब्दों में नहीं, बल्कि यह हर पीढ़ी को राष्ट्र प्रथम की भावना से जोड़ने की उसकी क्षमता में निहित है।
RashtraPress
7 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वंदे मातरम की रचना कब और किसने की थी?
'वंदे मातरम' की रचना महान बांग्ला साहित्यकार बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय ने 1875 में की थी। यह गीत पहली बार 1882 में उनके उपन्यास 'आनंदमठ' में प्रकाशित हुआ और स्वतंत्रता संग्राम में राष्ट्रीय प्रतिरोध का प्रतीक बना।
वंदे मातरम को राष्ट्र गीत का दर्जा कब मिला?
24 जनवरी 1950 को भारत की संविधान सभा ने 'वंदे मातरम' को आधिकारिक रूप से राष्ट्र गीत के रूप में मान्यता दी। इसे राष्ट्रगान 'जन गण मन' के समकक्ष सम्मान प्राप्त है।
राष्ट्रपति मुर्मु ने वंदे मातरम की वर्षगांठ पर क्या कहा?
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि यह गीत स्वतंत्रता आंदोलन में साहस, एकता और संकल्प का उद्घोष था और आज भी राष्ट्रीय अस्मिता व मातृभूमि के प्रति समर्पण का प्रतीक है। उन्होंने देशवासियों से 'राष्ट्र प्रथम' की भावना अपनाते हुए राष्ट्र निर्माण में योगदान देने की कामना व्यक्त की।
7 नवंबर को वंदे मातरम की वर्षगांठ क्यों मनाई जाती है?
7 नवंबर 1875 को बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय ने 'वंदे मातरम' की रचना की थी, इसलिए इस तिथि को प्रतिवर्ष वर्षगांठ के रूप में मनाया जाता है। 2026 में इसके 151 वर्ष पूरे हुए।
किन नेताओं ने वंदे मातरम की 151वीं वर्षगांठ पर बधाई दी?
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी व ज्योतिरादित्य सिंधिया, असम CM हिमंता बिस्वा सरमा, MP CM मोहन यादव, दिल्ली CM रेखा गुप्ता और बिहार BJP अध्यक्ष संजय सरावगी ने बधाई संदेश दिए।
राष्ट्र प्रेस
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