बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय जयंती: PM मोदी और अमित शाह ने दी श्रद्धांजलि, वंदे मातरम के 150 वर्ष पूर्ण
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 26 जून 2026 को राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' के रचयिता बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की जयंती पर उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने बंकिम चंद्र को एक ऐसे महान साहित्यिक व्यक्तित्व के रूप में स्मरण किया, जिनकी कालजयी रचनाओं ने भारतीयों की अनेक पीढ़ियों में देशभक्ति और सांस्कृतिक गौरव की ज्योति प्रज्वलित की। यह अवसर इसलिए भी विशेष है क्योंकि इस वर्ष 'वंदे मातरम' की रचना के 150 वर्ष पूर्ण हो रहे हैं।
PM मोदी की श्रद्धांजलि और संदेश
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी भावनाएँ साझा करते हुए लिखा, 'बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि। एक महान साहित्यकार के रूप में, उनकी रचनाओं ने पीढ़ियों से भारतीयों में देशभक्ति और सांस्कृतिक गौरव की भावना को जागृत किया है। उनका समृद्ध साहित्यिक कार्य आज भी हमारी चेतना को प्रकाशित करता है और राष्ट्र निर्माण के प्रति हमारे सामूहिक संकल्प को मजबूत करता है।'
उन्होंने आगे लिखा कि यह वह समय है जब हम 'वंदे मातरम' की 150वीं वर्षगांठ मना रहे हैं। उनके अनुसार, 'वंदे मातरम' के माध्यम से बंकिम चंद्र ने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन और राष्ट्र को सबसे स्थायी प्रेरणाओं में से एक का उपहार दिया।
गृह मंत्री अमित शाह की श्रद्धांजलि
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी एक्स पर पोस्ट कर बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय को नमन किया। उन्होंने लिखा, 'महान साहित्यकार एवं सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के प्रणेता बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय जी की जयंती पर उनका स्मरण कर उन्हें नमन करता हूँ। बंकिमचंद्र जी ने अपनी अमर कृति 'आनंदमठ' के माध्यम से मातृभूमि के प्रति समर्पण, त्याग व राष्ट्रीय चेतना का संदेश दिया।'
शाह ने आगे कहा कि 'वंदे मातरम' की रचना कर बंकिम चंद्र ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम को नई ऊर्जा, प्रेरणा व वैचारिक आधार प्रदान किया। उन्होंने रेखांकित किया कि 'वंदे मातरम' के 150 वर्ष पूर्ण होने पर यह गीत अपने आदि स्वरूप में संपूर्ण देश में राष्ट्रीय एकता और आत्मगौरव का संदेश दे रहा है।
राजर्षि छत्रपति शाहूजी महाराज को भी श्रद्धांजलि
इसी अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने राजर्षि छत्रपति शाहूजी महाराज की जयंती पर भी उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि शाहूजी महाराज सामाजिक न्याय और समानता के प्रबल समर्थक थे, जिन्होंने अपना संपूर्ण जीवन वंचित, शोषित एवं पिछड़े वर्गों के उत्थान के लिए समर्पित कर दिया। मोदी के अनुसार, उनके महान कार्य और आदर्श युगों-युगों तक राष्ट्र का मार्गदर्शन करते रहेंगे।
बंकिम चंद्र की विरासत और 'वंदे मातरम' का महत्त्व
गौरतलब है कि बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय 19वीं सदी के महान बंगाली उपन्यासकार, कवि और पत्रकार थे। उनकी रचना 'वंदे मातरम' सर्वप्रथम उनके उपन्यास 'आनंदमठ' (1882) में प्रकाशित हुई थी और बाद में यह भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का प्रेरणागीत बनी। स्वतंत्रता के बाद इसे भारत के राष्ट्रीय गीत का दर्जा प्राप्त हुआ। इस वर्ष इस कालजयी रचना के 150 वर्ष पूर्ण होने पर देशभर में विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।