26 जून 2026
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बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय जयंती: PM मोदी और अमित शाह ने दी श्रद्धांजलि, वंदे मातरम के 150 वर्ष पूर्ण

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बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय जयंती: PM मोदी और अमित शाह ने दी श्रद्धांजलि, वंदे मातरम के 150 वर्ष पूर्ण

सारांश

वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ के ऐतिहासिक मौके पर PM मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय को श्रद्धांजलि अर्पित की। मोदी ने उनकी रचनाओं को पीढ़ियों की देशभक्ति का स्रोत बताया, जबकि शाह ने 'आनंदमठ' और 'वंदे मातरम' को स्वतंत्रता संग्राम की वैचारिक नींव करार दिया।

मुख्य बातें

PM नरेंद्र मोदी ने 26 जून 2026 को बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की जयंती पर एक्स पर श्रद्धांजलि पोस्ट की।
इस वर्ष 'वंदे मातरम' की रचना के 150 वर्ष पूर्ण हो रहे हैं, जिसे मोदी ने विशेष रूप से रेखांकित किया।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी एक्स पर पोस्ट कर बंकिम चंद्र की कृति 'आनंदमठ' और 'वंदे मातरम' को स्वतंत्रता संग्राम का वैचारिक आधार बताया।
PM मोदी ने राजर्षि छत्रपति शाहूजी महाराज की जयंती पर भी श्रद्धांजलि अर्पित की, उन्हें सामाजिक न्याय का प्रतीक बताया।
बंकिम चंद्र की रचना 'वंदे मातरम' सर्वप्रथम उपन्यास 'आनंदमठ' (1882) में प्रकाशित हुई थी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 26 जून 2026 को राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' के रचयिता बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की जयंती पर उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने बंकिम चंद्र को एक ऐसे महान साहित्यिक व्यक्तित्व के रूप में स्मरण किया, जिनकी कालजयी रचनाओं ने भारतीयों की अनेक पीढ़ियों में देशभक्ति और सांस्कृतिक गौरव की ज्योति प्रज्वलित की। यह अवसर इसलिए भी विशेष है क्योंकि इस वर्ष 'वंदे मातरम' की रचना के 150 वर्ष पूर्ण हो रहे हैं।

PM मोदी की श्रद्धांजलि और संदेश

प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी भावनाएँ साझा करते हुए लिखा, 'बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि। एक महान साहित्यकार के रूप में, उनकी रचनाओं ने पीढ़ियों से भारतीयों में देशभक्ति और सांस्कृतिक गौरव की भावना को जागृत किया है। उनका समृद्ध साहित्यिक कार्य आज भी हमारी चेतना को प्रकाशित करता है और राष्ट्र निर्माण के प्रति हमारे सामूहिक संकल्प को मजबूत करता है।'

उन्होंने आगे लिखा कि यह वह समय है जब हम 'वंदे मातरम' की 150वीं वर्षगांठ मना रहे हैं। उनके अनुसार, 'वंदे मातरम' के माध्यम से बंकिम चंद्र ने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन और राष्ट्र को सबसे स्थायी प्रेरणाओं में से एक का उपहार दिया।

गृह मंत्री अमित शाह की श्रद्धांजलि

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी एक्स पर पोस्ट कर बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय को नमन किया। उन्होंने लिखा, 'महान साहित्यकार एवं सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के प्रणेता बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय जी की जयंती पर उनका स्मरण कर उन्हें नमन करता हूँ। बंकिमचंद्र जी ने अपनी अमर कृति 'आनंदमठ' के माध्यम से मातृभूमि के प्रति समर्पण, त्याग व राष्ट्रीय चेतना का संदेश दिया।'

शाह ने आगे कहा कि 'वंदे मातरम' की रचना कर बंकिम चंद्र ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम को नई ऊर्जा, प्रेरणा व वैचारिक आधार प्रदान किया। उन्होंने रेखांकित किया कि 'वंदे मातरम' के 150 वर्ष पूर्ण होने पर यह गीत अपने आदि स्वरूप में संपूर्ण देश में राष्ट्रीय एकता और आत्मगौरव का संदेश दे रहा है।

राजर्षि छत्रपति शाहूजी महाराज को भी श्रद्धांजलि

इसी अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने राजर्षि छत्रपति शाहूजी महाराज की जयंती पर भी उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि शाहूजी महाराज सामाजिक न्याय और समानता के प्रबल समर्थक थे, जिन्होंने अपना संपूर्ण जीवन वंचित, शोषित एवं पिछड़े वर्गों के उत्थान के लिए समर्पित कर दिया। मोदी के अनुसार, उनके महान कार्य और आदर्श युगों-युगों तक राष्ट्र का मार्गदर्शन करते रहेंगे।

बंकिम चंद्र की विरासत और 'वंदे मातरम' का महत्त्व

गौरतलब है कि बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय 19वीं सदी के महान बंगाली उपन्यासकार, कवि और पत्रकार थे। उनकी रचना 'वंदे मातरम' सर्वप्रथम उनके उपन्यास 'आनंदमठ' (1882) में प्रकाशित हुई थी और बाद में यह भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का प्रेरणागीत बनी। स्वतंत्रता के बाद इसे भारत के राष्ट्रीय गीत का दर्जा प्राप्त हुआ। इस वर्ष इस कालजयी रचना के 150 वर्ष पूर्ण होने पर देशभर में विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के एक सुनियोजित राजनीतिक विमर्श का हिस्सा है। बंकिम चंद्र की विरासत को केंद्र में रखना उस व्यापक प्रवृत्ति को दर्शाता है जिसमें 19वीं सदी के सांस्कृतिक नायकों को समकालीन राष्ट्रीय पहचान की राजनीति से जोड़ा जा रहा है। हालाँकि, यह उल्लेखनीय है कि 'वंदे मातरम' की सार्वभौमिक स्वीकार्यता पर ऐतिहासिक रूप से विविध मत रहे हैं — इस पहलू पर मुख्यधारा की कवरेज प्रायः मौन रहती है। 150वीं वर्षगांठ को राष्ट्रीय एकता के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत करने की इस कोशिश की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि क्या यह उत्सव समावेशी संवाद को प्रोत्साहित करता है।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय कौन थे और उनकी जयंती क्यों मनाई जाती है?
बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय 19वीं सदी के महान बंगाली साहित्यकार, उपन्यासकार और पत्रकार थे, जिन्होंने राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' की रचना की। उनकी जयंती पर देशभर में उनके साहित्यिक और राष्ट्रीय योगदान को याद किया जाता है।
वंदे मातरम के 150 वर्ष का क्या महत्त्व है?
'वंदे मातरम' सर्वप्रथम 1882 में बंकिम चंद्र के उपन्यास 'आनंदमठ' में प्रकाशित हुआ था। 2026 में इस रचना के 150 वर्ष पूर्ण हो रहे हैं, जिसे PM मोदी और गृह मंत्री शाह ने राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक गौरव के प्रतीक के रूप में रेखांकित किया है।
PM मोदी ने बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय को श्रद्धांजलि कहाँ दी?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 26 जून 2026 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर बंकिम चंद्र को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने उनकी रचनाओं को पीढ़ियों की देशभक्ति और सांस्कृतिक चेतना का स्रोत बताया।
गृह मंत्री अमित शाह ने बंकिम चंद्र के बारे में क्या कहा?
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक्स पर पोस्ट कर बंकिम चंद्र को 'सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के प्रणेता' बताया। उन्होंने 'आनंदमठ' को मातृभूमि के प्रति समर्पण और राष्ट्रीय चेतना का संदेश देने वाली अमर कृति कहा और 'वंदे मातरम' को स्वतंत्रता संग्राम का वैचारिक आधार बताया।
राजर्षि छत्रपति शाहूजी महाराज कौन थे, जिन्हें PM मोदी ने श्रद्धांजलि दी?
राजर्षि छत्रपति शाहूजी महाराज सामाजिक न्याय और समानता के प्रबल समर्थक थे, जिन्होंने वंचित, शोषित एवं पिछड़े वर्गों के उत्थान के लिए अपना जीवन समर्पित किया। PM मोदी ने 26 जून 2026 को उनकी जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
राष्ट्र प्रेस
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