मध्य प्रदेश सुगम परिवहन सेवा पर जीतू पटवारी का हमला: '10 साल पुरानी बसें डेंटिंग-पेंटिंग कर उतारी सड़क पर'
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार द्वारा शुरू की गई मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने 25 सितंबर 2026 को तीखा हमला बोला। पटवारी का आरोप है कि सरकार कबाड़खाने से निकाली गई 10-10 साल पुरानी बसों को महज डेंटिंग-पेंटिंग कराकर सड़क पर उतार रही है और इसे बड़ी उपलब्धि के रूप में प्रचारित किया जा रहा है। उनका कहना है कि यात्रियों की सुरक्षा और बसों की वास्तविक फिटनेस पर कोई ठोस जवाब सरकार की ओर से नहीं आया है।
क्या है मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा
राज्य सरकार ने मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा की शुरुआत बेहतर कनेक्टिविटी के उद्देश्य से की है। सरकार का दावा है कि इस सेवा से शहरी क्षेत्रों के साथ-साथ ग्रामीण इलाकों को भी जोड़ा जाएगा और यात्रियों को सुविधाजनक परिवहन उपलब्ध होगा। सरकार की ओर से इसे राज्य की परिवहन व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण कदम बताया गया है।
पटवारी के आरोप: रंग बदला, बस नहीं
जीतू पटवारी ने कहा कि किसी भी नई सेवा की शुरुआत सकारात्मक सोच के साथ होना अच्छी बात है, लेकिन 'कुछ बसें शुरू करके उसे बड़ी उपलब्धि बताना और लगातार बड़े-बड़े आँकड़े गिनाना सिर्फ प्रचार का हिस्सा नहीं होना चाहिए।' उन्होंने स्पष्ट कहा कि सिर्फ डेंटिंग-पेंटिंग और रंग बदलने से 10 साल पुरानी बस नई बस नहीं बन जाती।
पटवारी ने यह भी तर्क दिया कि सरकार और BJP से जुड़े लोग बसों के रंग को लेकर बहस कर रहे हैं, जबकि असली सवाल बसों की उम्र, फिटनेस, सुरक्षा और यात्रियों को मिलने वाली सुविधाओं का है। उन्होंने माँग की कि सरकार जनता को यह बताए कि सड़क पर उतारी जा रही बसों की वास्तविक स्थिति क्या है और यात्रियों की सुरक्षा के लिए क्या इंतज़ाम किए गए हैं।
BJP पर 25 साल के शासन की जिम्मेदारी का सवाल
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने BJP को घेरते हुए कहा कि मध्य प्रदेश में पिछले करीब 25 वर्षों से BJP की ही सरकार रही है। उनका कहना था कि यदि प्रदेश की परिवहन व्यवस्था में कमियाँ हैं तो उनकी जिम्मेदारी से सरकार बच नहीं सकती। गौरतलब है कि यह बयान ऐसे समय में आया है जब सरकार नई बस सेवा का श्रेय लेने में जुटी है।
पटवारी ने कहा कि यदि पूर्व की सुगम सेवा समाप्त हुई है तो उसकी जिम्मेदारी भी पिछली BJP सरकार की नीतियों और फैसलों पर तय होनी चाहिए। उनका कहना था कि सरकार को नई शुरुआत का श्रेय लेने के साथ-साथ पुरानी व्यवस्था की विफलताओं की जिम्मेदारी भी स्वीकार करनी चाहिए।
आम यात्रियों पर असर
विशेषज्ञों और परिवहन विश्लेषकों के अनुसार, पुरानी बसों की फिटनेस का मसला केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि सुरक्षा का भी है। यदि बसों की आयु अधिक है और उनका रखरखाव उचित नहीं हुआ है, तो दुर्घटनाओं का जोखिम बढ़ सकता है — विशेषकर ग्रामीण और पहाड़ी मार्गों पर जहाँ यह सेवा पहुँचाने का दावा किया जा रहा है। यात्रियों को उम्मीद है कि सरकार बसों की फिटनेस रिपोर्ट सार्वजनिक करे।
आगे क्या
पटवारी के इस बयान के बाद राज्य सरकार और BJP की प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा है। अब देखना होगा कि सरकार बसों की फिटनेस और उनकी वास्तविक आयु से जुड़े सवालों का जवाब देती है या नहीं। मध्य प्रदेश में परिवहन सुधार का यह विवाद आने वाले दिनों में और गहरा हो सकता है।