मार्को रुबियो ने मनीला में जयशंकर से की मुलाकात, भारत-अमेरिका संबंधों को बताया 'बेहद महत्वपूर्ण'
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने 22 जुलाई 2026 को मनीला में आसियान से जुड़े कार्यक्रमों के दौरान भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर से द्विपक्षीय बैठक की और भारत-अमेरिका संबंधों को 'बेहद महत्वपूर्ण' करार दिया। इस बैठक में क्षेत्रीय सुरक्षा, व्यापार, रक्षा समझौतों और क्वाड जैसे अहम विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई।
बैठक में क्या हुआ
मनीला में हुई इस द्विपक्षीय बैठक में अमेरिका की राजनीतिक मामलों की अंडर सेक्रेटरी एलिसन हूकर, भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर और दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल रहे। बैठक के बाद रुबियो ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, 'आसियान कार्यक्रम के दौरान अपने दोस्त और भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मिलकर अच्छा लगा। हमने क्षेत्रीय सुरक्षा, क्वाड, व्यापार और रक्षा समझौतों पर चर्चा की। भारत के साथ हमारा रिश्ता बेहद महत्वपूर्ण है।'
रुबियो की भारत यात्रा के संकेत
भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने इस बैठक को 'बेहद उपयोगी' बताया और एक्स पर संकेत दिया कि रुबियो इस साल के आखिर में भारत आ सकते हैं। गोर ने लिखा, 'आसियान कार्यक्रम के दौरान विदेश मंत्री मार्को रुबियो और एस. जयशंकर के बीच बहुत अच्छी द्विपक्षीय बैठक हुई। दरअसल, रुबियो इस साल के आखिर में फिर भारत आ सकते हैं... आगे की जानकारी का इंतजार कीजिए।' यह यात्रा, यदि होती है, तो भारत-अमेरिका व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी को और मजबूती देगी।
जयशंकर ने साझा किए चर्चा के बिंदु
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बताया कि दोनों नेताओं ने भारत-अमेरिका व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी के तहत कई अहम विषयों की समीक्षा की। जयशंकर ने एक्स पर लिखा, 'मनीला में अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो से मिलकर खुशी हुई। हमारी बातचीत में व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी से जुड़े कई अहम विषयों पर चर्चा हुई। इनमें व्यापार और टैरिफ, ऊर्जा, रक्षा और सुरक्षा, महत्वपूर्ण खनिज (क्रिटिकल मिनरल्स) और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) शामिल रहे। इसके अलावा क्षेत्रीय, वैश्विक और बहुपक्षीय मुद्दों पर भी हमने अपने विचार साझा किए।'
क्वाड बैठक और संयुक्त बयान
द्विपक्षीय वार्ता के बाद जयशंकर ने ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वोंग और जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोटेगी के साथ क्वाड देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में भी हिस्सा लिया। संयुक्त बयान में चारों देशों — भारत, ऑस्ट्रेलिया, जापान और अमेरिका — ने एक स्वतंत्र, खुले और सुरक्षित इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। बयान में यह भी कहा गया कि आसियान के इंडो-पैसिफिक दृष्टिकोण (एओआईपी) को जमीन पर बेहतर तरीके से लागू करने के लिए समुद्री सुरक्षा, आर्थिक समृद्धि, नई तकनीकों और मानवीय सहायता पर मिलकर काम किया जाएगा।
क्या होगा आगे
यह ऐसे समय में आया है जब भारत और अमेरिका के बीच व्यापार और टैरिफ को लेकर बातचीत जारी है। गौरतलब है कि क्वाड की यह बैठक इंडो-पैसिफिक में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच हुई है। रुबियो की संभावित भारत यात्रा दोनों देशों के बीच रक्षा, ऊर्जा और तकनीकी सहयोग को नई दिशा दे सकती है।