22 जुलाई 2026
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मार्को रुबियो ने मनीला में जयशंकर से की मुलाकात, भारत-अमेरिका संबंधों को बताया 'बेहद महत्वपूर्ण'

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मार्को रुबियो ने मनीला में जयशंकर से की मुलाकात, भारत-अमेरिका संबंधों को बताया 'बेहद महत्वपूर्ण'

सारांश

मनीला में आसियान के मंच पर अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो और एस. जयशंकर की मुलाकात महज शिष्टाचार नहीं थी — व्यापार, टैरिफ, रक्षा, क्रिटिकल मिनरल्स और AI पर हुई चर्चा और रुबियो की संभावित भारत यात्रा के संकेत बताते हैं कि भारत-अमेरिका साझेदारी एक नए अध्याय में प्रवेश कर रही है।

मुख्य बातें

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने 22 जुलाई 2026 को मनीला में एस.
जयशंकर से द्विपक्षीय बैठक की।
रुबियो ने भारत-अमेरिका संबंधों को 'बेहद महत्वपूर्ण' बताया; व्यापार, रक्षा, क्वाड और क्षेत्रीय सुरक्षा पर चर्चा हुई।
भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने संकेत दिया कि रुबियो इस साल के अंत में भारत आ सकते हैं।
जयशंकर ने बताया कि बातचीत में व्यापार-टैरिफ, ऊर्जा, रक्षा, क्रिटिकल मिनरल्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर विचार-विमर्श हुआ।
क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक में भारत, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान ने स्वतंत्र इंडो-पैसिफिक के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई।

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने 22 जुलाई 2026 को मनीला में आसियान से जुड़े कार्यक्रमों के दौरान भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर से द्विपक्षीय बैठक की और भारत-अमेरिका संबंधों को 'बेहद महत्वपूर्ण' करार दिया। इस बैठक में क्षेत्रीय सुरक्षा, व्यापार, रक्षा समझौतों और क्वाड जैसे अहम विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई।

बैठक में क्या हुआ

मनीला में हुई इस द्विपक्षीय बैठक में अमेरिका की राजनीतिक मामलों की अंडर सेक्रेटरी एलिसन हूकर, भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर और दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल रहे। बैठक के बाद रुबियो ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, 'आसियान कार्यक्रम के दौरान अपने दोस्त और भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मिलकर अच्छा लगा। हमने क्षेत्रीय सुरक्षा, क्वाड, व्यापार और रक्षा समझौतों पर चर्चा की। भारत के साथ हमारा रिश्ता बेहद महत्वपूर्ण है।'

रुबियो की भारत यात्रा के संकेत

भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने इस बैठक को 'बेहद उपयोगी' बताया और एक्स पर संकेत दिया कि रुबियो इस साल के आखिर में भारत आ सकते हैं। गोर ने लिखा, 'आसियान कार्यक्रम के दौरान विदेश मंत्री मार्को रुबियो और एस. जयशंकर के बीच बहुत अच्छी द्विपक्षीय बैठक हुई। दरअसल, रुबियो इस साल के आखिर में फिर भारत आ सकते हैं... आगे की जानकारी का इंतजार कीजिए।' यह यात्रा, यदि होती है, तो भारत-अमेरिका व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी को और मजबूती देगी।

जयशंकर ने साझा किए चर्चा के बिंदु

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बताया कि दोनों नेताओं ने भारत-अमेरिका व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी के तहत कई अहम विषयों की समीक्षा की। जयशंकर ने एक्स पर लिखा, 'मनीला में अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो से मिलकर खुशी हुई। हमारी बातचीत में व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी से जुड़े कई अहम विषयों पर चर्चा हुई। इनमें व्यापार और टैरिफ, ऊर्जा, रक्षा और सुरक्षा, महत्वपूर्ण खनिज (क्रिटिकल मिनरल्स) और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) शामिल रहे। इसके अलावा क्षेत्रीय, वैश्विक और बहुपक्षीय मुद्दों पर भी हमने अपने विचार साझा किए।'

क्वाड बैठक और संयुक्त बयान

द्विपक्षीय वार्ता के बाद जयशंकर ने ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वोंग और जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोटेगी के साथ क्वाड देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में भी हिस्सा लिया। संयुक्त बयान में चारों देशों — भारत, ऑस्ट्रेलिया, जापान और अमेरिका — ने एक स्वतंत्र, खुले और सुरक्षित इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। बयान में यह भी कहा गया कि आसियान के इंडो-पैसिफिक दृष्टिकोण (एओआईपी) को जमीन पर बेहतर तरीके से लागू करने के लिए समुद्री सुरक्षा, आर्थिक समृद्धि, नई तकनीकों और मानवीय सहायता पर मिलकर काम किया जाएगा।

क्या होगा आगे

यह ऐसे समय में आया है जब भारत और अमेरिका के बीच व्यापार और टैरिफ को लेकर बातचीत जारी है। गौरतलब है कि क्वाड की यह बैठक इंडो-पैसिफिक में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच हुई है। रुबियो की संभावित भारत यात्रा दोनों देशों के बीच रक्षा, ऊर्जा और तकनीकी सहयोग को नई दिशा दे सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जब व्यापार और टैरिफ पर भारत-अमेरिका वार्ता अभी भी अधूरी है। संभावित रुबियो यात्रा का समय महत्वपूर्ण है: यह ऐसे दौर में आ रही है जब चीन के साथ अमेरिका के संबंध तनावपूर्ण हैं और वाशिंगटन इंडो-पैसिफिक में भारत को रणनीतिक धुरी के रूप में देख रहा है। हालाँकि, क्रिटिकल मिनरल्स और AI पर सहयोग की बात तो होती है, पर ठोस समझौतों की रफ्तार धीमी रही है। असली परीक्षा यह होगी कि क्या रुबियो की यात्रा केवल संबंधों की पुष्टि करेगी या व्यापार वार्ता में ठोस सफलता भी लाएगी।
RashtraPress
22 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मार्को रुबियो और एस. जयशंकर की मनीला बैठक में क्या हुआ?
22 जुलाई 2026 को मनीला में आसियान कार्यक्रम के दौरान दोनों विदेश मंत्रियों ने द्विपक्षीय बैठक की, जिसमें व्यापार-टैरिफ, ऊर्जा, रक्षा, क्रिटिकल मिनरल्स, AI और क्षेत्रीय सुरक्षा पर चर्चा हुई। रुबियो ने भारत-अमेरिका संबंधों को 'बेहद महत्वपूर्ण' बताया।
क्या मार्को रुबियो भारत आएंगे?
भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने एक्स पर संकेत दिया है कि रुबियो इस साल के अंत में भारत आ सकते हैं, हालाँकि तारीख की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। गोर ने कहा, 'आगे की जानकारी का इंतजार कीजिए।'
क्वाड विदेश मंत्रियों की मनीला बैठक में क्या तय हुआ?
भारत, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान के विदेश मंत्रियों ने एक स्वतंत्र, खुले और सुरक्षित इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई। संयुक्त बयान में आसियान के इंडो-पैसिफिक दृष्टिकोण (एओआईपी) को लागू करने के लिए समुद्री सुरक्षा, आर्थिक समृद्धि और नई तकनीकों पर मिलकर काम करने पर सहमति जताई गई।
क्वाड क्या है और इसमें कौन-से देश शामिल हैं?
क्वाड (Quad) भारत, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान का एक रणनीतिक समूह है, जिसका उद्देश्य एक खुले, स्वतंत्र और समृद्ध इंडो-पैसिफिक क्षेत्र को बढ़ावा देना है। यह समूह समुद्री सुरक्षा, तकनीकी सहयोग और मानवीय सहायता जैसे क्षेत्रों में मिलकर काम करता है।
जयशंकर-रुबियो बैठक में किन विषयों पर चर्चा हुई?
जयशंकर के अनुसार बातचीत में व्यापार और टैरिफ, ऊर्जा, रक्षा और सुरक्षा, क्रिटिकल मिनरल्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) शामिल रहे। इसके अलावा क्षेत्रीय, वैश्विक और बहुपक्षीय मुद्दों पर भी विचार-विमर्श हुआ।
राष्ट्र प्रेस
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