17 जुलाई 2026
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चीन का अमेरिकी राज्यों पर साइबर हमला और जासूसी अभियान, सीनेट सुनवाई में गंभीर चेतावनी

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चीन का अमेरिकी राज्यों पर साइबर हमला और जासूसी अभियान, सीनेट सुनवाई में गंभीर चेतावनी

सारांश

अमेरिकी संसद की इंटेलिजेंस कमेटी की सुनवाई में सामने आया कि चीन अब केवल वाशिंगटन को नहीं, बल्कि अमेरिकी राज्यों, विश्वविद्यालयों और निजी कंपनियों को साइबर घुसपैठ, जासूसी और आर्थिक दबाव से निशाना बना रहा है — और स्थानीय सरकारें अब राष्ट्रीय सुरक्षा की पहली दीवार बन चुकी हैं।

मुख्य बातें

हाउस इंटेलिजेंस कमेटी की 17 जुलाई की सुनवाई में सीनेटरों ने चेतावनी दी कि चीन अमेरिकी राज्यों को जासूसी, साइबर घुसपैठ और आर्थिक दबाव से निशाना बना रहा है।
कमेटी अध्यक्ष रिक क्रॉफर्ड ने कहा कि बीजिंग 'पूरे समाज को शामिल करने वाली रणनीति' के तहत काम करता है, जो सशस्त्र संघर्ष की सीमा से जानबूझकर नीचे रहती है।
देशभर के 80 फ्यूजन सेंटर्स में 3,200 से अधिक विश्लेषक काम करते हैं, लेकिन वर्गीकरण बाधाओं और असमान फंडिंग से तंत्र कमज़ोर है।
माइक सेना ने राष्ट्रीय काउंटर-इंटेलिजेंस सूचना-साझाकरण ढाँचे की माँग की।
फ्लोरिडा के प्रतिनिधि डैनियल अल्वारेज़ ने कहा कि राज्य गृह सुरक्षा के लिए संघीय सरकार का इंतज़ार नहीं करेगा।
नेब्रास्का सीनेटर एलियट बोस्टार ने राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरनाक दूरसंचार उपकरणों पर रोक और कांग्रेस-राज्य तालमेल की माँग की।

अमेरिकी संसद की हाउस परमानेंट सेलेक्ट कमेटी ऑन इंटेलिजेंस की सुनवाई में 17 जुलाई को सीनेटरों और राज्य स्तरीय सुरक्षा अधिकारियों ने सामूहिक रूप से चेतावनी दी कि चीन जासूसी, साइबर घुसपैठ, प्रभाव अभियान और आर्थिक दबाव के ज़रिए अमेरिकी राज्यों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढाँचे को व्यवस्थित रूप से निशाना बना रहा है। अधिकारियों ने कहा कि स्थानीय सरकारें अब अमेरिका के काउंटर-इंटेलिजेंस प्रयासों की अग्रिम पंक्ति बन चुकी हैं।

मुख्य घटनाक्रम

कमेटी के अध्यक्ष रिक क्रॉफर्ड ने कहा कि चीन ने 'पूरे समाज को शामिल करने वाली रणनीति' अपनाई है, जो पारंपरिक जासूसी की सीमाओं से कहीं आगे जाती है। उन्होंने कहा, 'बीजिंग किसी भी पारंपरिक लड़ाई के शुरू होने से बहुत पहले ही — कानूनी निवेश, सप्लाई चेन, रिसर्च साझेदारी, साइबर घुसपैठ, प्रभाव अभियान और आर्थिक दबाव का फायदा उठाकर — खुद को तैयार कर लेता है।' क्रॉफर्ड ने आगाह किया कि चीन की ये गतिविधियाँ जानबूझकर सशस्त्र संघर्ष की सीमा से नीचे रहने के लिए डिज़ाइन की गई हैं।

रैंकिंग मेंबर जिम हाइम्स ने कहा कि काउंटर-इंटेलिजेंस अब केवल संघीय एजेंसियों की जिम्मेदारी नहीं रह सकती। उन्होंने नीति-निर्माताओं से विदेशी खुफिया खतरों से मुकाबले और नागरिक स्वतंत्रता की रक्षा के बीच उचित संतुलन बनाए रखने की अपील की, और यह भी कहा कि नागरिकों के साथ उनकी जाति, नस्ल या राष्ट्रीयता के आधार पर भेदभाव नहीं होना चाहिए।

फ्यूजन सेंटर्स की भूमिका और चुनौतियाँ

नेशनल फ्यूजन सेंटर एसोसिएशन के अध्यक्ष माइक सेना ने सुनवाई में बताया कि विदेशी खुफिया सेवाएँ — विशेष रूप से चीन (PRC), रूस, ईरान — राज्य और स्थानीय सरकारों, विश्वविद्यालयों, ज़रूरी बुनियादी ढाँचे के संचालकों और निजी उद्योग को तेज़ी से निशाना बना रही हैं। उन्होंने कहा, 'राज्य और स्थानीय साझेदार अक्सर जासूसी, साइबर गतिविधियों, विदेशी प्रभाव, सप्लाई चेन में समझौते और आर्थिक निशानेबाज़ी से जुड़े संकेत सबसे पहले देखते हैं।'

सेना ने बताया कि देशभर के 80 फ्यूजन सेंटर्स में 3,200 से अधिक विश्लेषक संघीय, राज्य और स्थानीय साझेदारों के साथ खुफिया जानकारी साझा करते हैं। हालाँकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि वर्गीकरण की बाधाएँ, अलग-अलग डेटाबेस, असमान फंडिंग और सुरक्षा मंजूरी में देरी इस तंत्र को कमज़ोर करती हैं। उन्होंने कांग्रेस से एक राष्ट्रीय काउंटर-इंटेलिजेंस सूचना-साझाकरण ढाँचा बनाने, फ्यूजन सेंटर्स में अधिक संघीय कर्मियों की तैनाती और प्रशिक्षण संसाधनों को बेहतर करने की माँग की।

राज्य सरकारों की प्रतिक्रिया

अलबामा फ्यूजन सेंटर के निदेशक जे मोस्ले ने ज़ोर देकर कहा कि स्थानीय, राज्य और संघीय एजेंसियों के बीच विश्वसनीय सहयोग संदिग्ध गतिविधियों की समय रहते पहचान के लिए अनिवार्य है — इससे पहले कि वे राष्ट्रीय सुरक्षा के बड़े खतरे में बदल जाएँ।

फ्लोरिडा के राज्य प्रतिनिधि डैनियल अल्वारेज़ ने स्पष्ट किया कि उनका राज्य गृह सुरक्षा के मामले में संघीय सरकार का इंतजार नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि राज्य स्तरीय काउंटर-इंटेलिजेंस प्रयास संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करते हुए किसी व्यक्ति के व्यवहार पर केंद्रित होने चाहिए, न कि उसकी जातीयता, धर्म या राजनीतिक विचारों पर।

नेब्रास्का के राज्य सीनेटर एलियट बोस्टार ने राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरनाक दूरसंचार उपकरणों के उपयोग पर रोक लगाने और विदेशी दुश्मनों से जुड़ी कमज़ोरियों को कम करने के लिए कानूनी प्रयासों का उल्लेख किया। उन्होंने कांग्रेस और राज्य सरकारों के बीच बेहतर तालमेल की माँग की।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं

सुनवाई में उभरी सबसे बड़ी चिंता यह है कि विदेशी खुफिया खतरे अब केवल वाशिंगटन या संघीय संस्थाओं तक सीमित नहीं हैं। राज्य, नगर, विश्वविद्यालय और निजी व्यवसाय — सभी अब अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए बाध्य हैं। यह ऐसे समय में आया है जब अमेरिका-चीन संबंध पहले से ही व्यापार, तकनीक और सैन्य क्षेत्रों में तनावपूर्ण हैं।

आगे क्या होगा

कमेटी के सदस्यों ने संकेत दिया कि इस सुनवाई के निष्कर्षों के आधार पर नए काउंटर-इंटेलिजेंस कानून और संसाधन आवंटन पर विचार किया जाएगा। राज्य-संघीय सूचना-साझाकरण तंत्र को मजबूत करना और फ्यूजन सेंटर्स की क्षमता बढ़ाना निकट भविष्य की प्राथमिकताओं में शामिल बताया जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो केवल संघीय एजेंसियों पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। गौरतलब है कि फ्यूजन सेंटर्स की फंडिंग और वर्गीकरण की बाधाओं की समस्या वर्षों से उठाई जा रही है, फिर भी ठोस सुधार नहीं हुए। असली परीक्षा यह है कि क्या यह सुनवाई केवल राजनीतिक बयानबाज़ी तक सीमित रहेगी या इससे वास्तविक संसाधन आवंटन और कानूनी ढाँचे में बदलाव आएगा।
RashtraPress
17 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चीन अमेरिकी राज्यों को किस तरह निशाना बना रहा है?
अमेरिकी सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार, चीन जासूसी, साइबर घुसपैठ, प्रभाव अभियान, सप्लाई चेन में हस्तक्षेप और आर्थिक दबाव जैसे तरीकों से राज्य सरकारों, विश्वविद्यालयों और निजी कंपनियों को निशाना बना रहा है। ये गतिविधियाँ जानबूझकर सशस्त्र संघर्ष की सीमा से नीचे रखी जाती हैं ताकि सीधी प्रतिक्रिया से बचा जा सके।
हाउस इंटेलिजेंस कमेटी की यह सुनवाई क्यों महत्वपूर्ण है?
यह सुनवाई पहली बार स्पष्ट रूप से स्वीकार करती है कि विदेशी खुफिया खतरे अब केवल संघीय स्तर तक सीमित नहीं हैं। राज्य, शहर, विश्वविद्यालय और निजी व्यवसाय अब अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा की पहली पंक्ति बन चुके हैं, और इस सुनवाई के आधार पर नए कानून और संसाधन आवंटन पर विचार किया जाएगा।
अमेरिका के फ्यूजन सेंटर्स क्या हैं और उनकी क्या भूमिका है?
फ्यूजन सेंटर्स राज्य और स्थानीय स्तर पर खुफिया जानकारी एकत्र और साझा करने वाले केंद्र हैं। देशभर में 80 ऐसे केंद्र हैं जिनमें 3,200 से अधिक विश्लेषक काम करते हैं, लेकिन वर्गीकरण बाधाओं, अलग-अलग डेटाबेस और असमान फंडिंग के कारण इनकी क्षमता सीमित है।
चीन के अलावा कौन-से देश अमेरिकी राज्यों को निशाना बना रहे हैं?
नेशनल फ्यूजन सेंटर एसोसिएशन के अध्यक्ष माइक सेना के अनुसार, चीन (PRC) के अलावा रूस और ईरान भी राज्य व स्थानीय सरकारों, विश्वविद्यालयों और निजी उद्योग को तेज़ी से निशाना बना रहे हैं।
इस खतरे से निपटने के लिए क्या कदम उठाने की माँग की गई है?
सुनवाई में एक राष्ट्रीय काउंटर-इंटेलिजेंस सूचना-साझाकरण ढाँचा बनाने, फ्यूजन सेंटर्स में अधिक संघीय कर्मियों की तैनाती, प्रशिक्षण संसाधनों में सुधार और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरनाक दूरसंचार उपकरणों पर प्रतिबंध की माँग की गई। कांग्रेस और राज्य सरकारों के बीच बेहतर तालमेल को भी प्राथमिकता बताया गया।
राष्ट्र प्रेस
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