अंतरराष्ट्रीय न्याय दिवस 2025: भजनलाल शर्मा, सम्राट चौधरी समेत नेताओं ने दोहराई न्याय की प्रतिबद्धता
सारांश
मुख्य बातें
17 जुलाई को मनाए जाने वाले अंतरराष्ट्रीय न्याय दिवस के अवसर पर देशभर के राजनेताओं ने सोशल मीडिया पर संदेश साझा करते हुए निष्पक्ष, समान और सुलभ न्याय व्यवस्था के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की। राजस्थान, बिहार सहित कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों ने इस अवसर पर संवैधानिक मूल्यों को लोकतंत्र की आत्मा बताया।
मुख्य संदेश और नेताओं की प्रतिक्रियाएँ
राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने प्रदेशवासियों को शुभकामनाएँ देते हुए कहा, 'न्याय लोकतंत्र की सबसे सशक्त नींव और अधिकारों की रक्षा का महत्वपूर्ण माध्यम है। आइए, हम सभी समानता, निष्पक्षता और सुलभ न्याय व्यवस्था के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को और मजबूत करें, ताकि प्रत्येक नागरिक सम्मान और विश्वास के साथ आगे बढ़ सके।'
बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा, 'न्याय तभी सार्थक है, जब वह सभी के लिए समान और सुलभ हो। समान न्याय, समान अधिकार और न्यायपूर्ण समाज के निर्माण का संकल्प ही एक सशक्त, समरस और लोकतांत्रिक राष्ट्र की आधारशिला है।'
उपमुख्यमंत्री और मंत्रियों के संदेश
राजस्थान के उपमुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा ने अपने एक्स पोस्ट में लिखा, 'अंतर्राष्ट्रीय न्याय दिवस पर हम सभी न्याय एवं समानता के प्रति जागरूक रहकर एक आदर्श समाज की स्थापना करने का संकल्प लें, ताकि हर व्यक्ति को निष्पक्षता और सम्मान मिल सके।'
बिहार सरकार में मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि इस दिवस पर न्याय, समानता और कानून के शासन के महत्व के प्रति समाज में जागरूकता फैलाने का संकल्प लेना आवश्यक है। उन्होंने नागरिकों से न्यायपूर्ण समाज निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
राजस्थान के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने कहा, 'एक न्यायपूर्ण व्यवस्था केवल अधिकारों की रक्षा ही नहीं करती, बल्कि समाज में विश्वास, समरसता और उत्तरदायित्व की भावना को भी सशक्त बनाती है। न्याय, समानता और संवैधानिक मूल्यों के प्रति हमारी प्रतिबद्धता ही विकसित, समरस और सशक्त भारत की सबसे बड़ी शक्ति है।'
अंतरराष्ट्रीय न्याय दिवस का महत्व
प्रत्येक वर्ष 17 जुलाई को अंतरराष्ट्रीय न्याय दिवस मनाया जाता है। यह दिन 1998 में रोम संविधि को अपनाने की वर्षगाँठ के रूप में चिह्नित है, जिसने अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) की स्थापना का मार्ग प्रशस्त किया। गौरतलब है कि यह दिवस वैश्विक स्तर पर जवाबदेही, पीड़ित अधिकारों और न्यायिक स्वतंत्रता के प्रति जागरूकता बढ़ाने का अवसर माना जाता है।
आम जनता पर असर और आगे की राह
नेताओं के इन संदेशों का व्यापक संदर्भ यह है कि भारत में न्यायिक सुधार और त्वरित न्याय की माँग लंबे समय से चली आ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि राजनीतिक इच्छाशक्ति के साथ-साथ संस्थागत सुधार भी उतने ही ज़रूरी हैं। इस दिवस पर व्यक्त प्रतिबद्धताएँ तभी सार्थक होंगी जब नीतिगत स्तर पर ठोस कदम उठाए जाएँ और न्यायपालिका को संसाधन एवं स्वायत्तता सुनिश्चित की जाए।