पीएम स्वनिधि योजना से मध्य प्रदेश के 9.92 लाख स्ट्रीट वेंडर बने आत्मनिर्भर, इंदौर को मिला देश में पहला स्थान
सारांश
Key Takeaways
- मध्य प्रदेश में 9.92 लाख से अधिक पथ-विक्रेताओं को पीएम स्वनिधि योजना का लाभ मिला है।
- 15.69 लाख ऋण प्रकरणों के माध्यम से 2,632 करोड़ रुपये की ऋण राशि सीधे लाभार्थियों तक पहुँचाई गई।
- इंदौर नगर निगम ने 33,332 ऋण प्रकरणों के वितरण के साथ देशभर के नगरीय निकायों में प्रथम स्थान प्राप्त किया।
- 10-40 लाख जनसंख्या श्रेणी में भोपाल द्वितीय और जबलपुर तृतीय स्थान पर रहे।
- प्रदेश के 7 लाख से अधिक स्ट्रीट वेंडर डिजिटल लेन-देन अपना चुके हैं और उन्हें 47 करोड़ रुपये से अधिक का कैशबैक मिला।
- योजना 31 मार्च, 2030 तक विस्तारित है और इसमें 15,000 से 50,000 रुपये तक की क्रमिक ऋण सहायता उपलब्ध है।
भोपाल, 23 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस): मध्य प्रदेश में प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना के जरिए 9.92 लाख से अधिक पथ-विक्रेताओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव आया है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 23 अप्रैल को बताया कि इस योजना ने रेहड़ी-पटरी वाले छोटे व्यापारियों को आत्मनिर्भरता की राह दिखाई है। इंदौर नगर निगम ने देशभर में पहला स्थान हासिल कर प्रदेश का नाम रोशन किया है।
मध्य प्रदेश ने पीएम स्वनिधि योजना में देशभर में कौन सा स्थान पाया?
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि पीएम स्वनिधि योजना के सफल क्रियान्वयन में मध्य प्रदेश ने राष्ट्रीय स्तर पर अग्रणी भूमिका निभाई है। यह उपलब्धि अंत्योदय और समावेशी विकास के प्रति राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
इंदौर को राष्ट्रीय रैंकिंग में पहला स्थान कैसे मिला?
इंदौर नगर निगम ने नवीन पीएम स्वनिधि योजना के अंतर्गत 33,332 ऋण प्रकरणों के वितरण के साथ देश के सभी नगरीय निकायों में प्रथम स्थान प्राप्त किया। यह उपलब्धि पूरे प्रदेश के लिए गौरव का विषय है।
भोपाल और जबलपुर की रैंकिंग क्या रही?
10 लाख से 40 लाख की जनसंख्या वाली श्रेणी में भोपाल ने देशभर में द्वितीय स्थान और जबलपुर ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। इन शहरों ने विकास के मानकों पर अपनी श्रेष्ठता राष्ट्रीय स्तर पर सिद्ध की है।
योजना के तहत कितनी ऋण राशि वितरित की गई?
मध्य प्रदेश में अब तक 15.69 लाख ऋण प्रकरणों के माध्यम से 2,632 करोड़ रुपये की ऋण राशि सीधे लाभार्थियों तक पहुँचाई गई है। पुनर्गठित योजना में अब 15,000 रुपये, 25,000 रुपये और 50,000 रुपये की क्रमिक ऋण सहायता उपलब्ध है।
इसके अतिरिक्त 30,000 रुपये की सीमा वाला यूपीआई-लिंक्ड क्रेडिट कार्ड भी प्रदान किया जा रहा है, जिससे विक्रेताओं की कार्यशील पूंजी की जरूरतें आसानी से पूरी हो रही हैं।
कितने स्ट्रीट वेंडर डिजिटल लेन-देन से जुड़े?
मुख्यमंत्री यादव ने बताया कि प्रदेश के 7 लाख से अधिक पथ-विक्रेता डिजिटल लेन-देन अपना चुके हैं। इन्हें 47 करोड़ रुपये से अधिक का कैशबैक प्राप्त हुआ है, जो डिजिटल साक्षरता की बड़ी सफलता है।
छोटे नगरीय निकायों का प्रदर्शन कैसा रहा?
एक लाख से कम आबादी वाले निकायों में सारणी नगर पालिका ने देशभर में प्रथम स्थान प्राप्त किया। इसी श्रेणी में बालाघाट (5वें), टीकमगढ़ (7वें) और हरदा (9वें) स्थान पर रहे, जिन्हें मुख्यमंत्री ने अनुकरणीय बताया।
योजना कब तक चलेगी?
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने विश्वास जताया कि 31 मार्च, 2030 तक विस्तारित यह योजना मध्य प्रदेश के नगरीय अर्थतंत्र को नई गति देगी। यह समाज की अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने का सबसे प्रभावी माध्यम बनेगी।