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सोनम वांगचुक का दर्द: 26 दिन भूखे रहने के बाद अनशन पर सवाल उठाने वालों को धिक्कारा

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सोनम वांगचुक का दर्द: 26 दिन भूखे रहने के बाद अनशन पर सवाल उठाने वालों को धिक्कारा

सारांश

26 दिन की भूख हड़ताल, 11 किलो वज़न की कमी और अस्पताल में भर्ती — सोनम वांगचुक का अनशन खत्म हुआ, लेकिन उनका दर्द नहीं। जेपी नड्डा से मुलाकात के बाद अनशन तोड़ने पर 'डील' के आरोप लगे, तो वांगचुक ने एक्स पर आक्रोश जताया।

मुख्य बातें

सोनम वांगचुक ने नीट पेपर लीक विरोध में 28 जून से शुरू किए 26 दिनों के अनशन के बाद 24 जुलाई की रात अनशन तोड़ा।
अनशन के दौरान वांगचुक का 11 किलो वज़न घटा; उन्हें सफदरजंग और मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया।
अनशन केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और राज्यमंत्री जितेंद्र सिंह की उपस्थिति में तोड़ा गया; 65 सांसदों ने पहले आग्रह किया था।
वांगचुक ने 'डील' के आरोपों को खारिज करते हुए अनशन पर सवाल उठाने वालों को धिक्कारा।
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग और नीट पेपर लीक मामले पर सरकार की स्थिति अभी स्पष्ट नहीं।

सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने नीट पेपर लीक विरोध और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर 26 दिनों तक चले अनशन के बाद शुक्रवार रात एक भावुक वीडियो साझा किया, जिसमें उन्होंने अपने अनशन की पवित्रता पर सवाल उठाने वालों पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। वांगचुक ने कहा कि इस लंबे उपवास में उनका 11 किलो वज़न घट गया, मांसपेशियाँ कमज़ोर पड़ गईं और शरीर के अंग तथा मस्तिष्क लगभग क्षतिग्रस्त हो गए।

मुख्य घटनाक्रम

सोनम वांगचुक ने 28 जून को जंतर-मंतर, नई दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नीट पेपर लीक विरोध आंदोलन के समर्थन में अनशन शुरू किया था। अनशन के दौरान तबीयत बिगड़ने पर उन्हें पहले सफदरजंग अस्पताल और फिर दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश पर मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया। 24 जुलाई की देर रात, केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और केंद्रीय राज्यमंत्री जितेंद्र सिंह तथा लेह-लद्दाख की सर्वोच्च समिति के वरिष्ठ नेताओं की उपस्थिति में वांगचुक ने अपना अनशन तोड़ा।

वांगचुक का दर्द और आक्रोश

अनशन समाप्त करने के बाद एक्स पर साझा किए गए वीडियो में वांगचुक ने कहा, 'दोस्तों, ये वीडियो मैं थोड़ा दुख और हैरानी के साथ बना रहा हूँ। अपने भाइयों-बहनों और छात्रों के लिए 26 दिन भूखा रहने के बाद, जिसमें मेरा 11 किलो शरीर खत्म हो गया है, मसल्स चले गए हैं, बॉडी के ऑर्गन्स और दिमाग लगभग डैमेज हो चुके हैं — क्या मुझे किसी से चरित्र प्रमाणपत्र लेना होगा?' उन्होंने यह भी बताया कि अनशन तोड़ने को लेकर उन पर 'डील' करने के आरोप लगाए जा रहे हैं।

वांगचुक ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा, 'अगर मुझे डील करनी होती तो 26 दिन भूखा रहने की क्या जरूरत थी? अगर मुझे सौदा करना होता तो एसी के कमरे में बैठकर नहीं करता?' उन्होंने ऐसी सोच रखने वालों पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, 'धिक्कार है ऐसे देश पर, जिसमें ऐसी सोच वाले लोग रहते हैं।'

अनशन तोड़ने की परिस्थितियाँ

वांगचुक ने एक्स पर लिखा कि अनशन तोड़ने से पहले विभिन्न राजनीतिक दलों के 65 सांसदों ने उनसे मुलाकात की थी या पत्र लिखकर अनशन समाप्त करने का आग्रह किया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह निर्णय 'देश में संभावित हिंसा को देखते हुए और विभिन्न शर्तों पर लंबी बातचीत के बाद' लिया गया। यह भी उल्लेखनीय है कि लद्दाख की कड़कड़ाती ठंड से निकलकर दिल्ली की तपती गर्मी में अनशन करना शारीरिक रूप से अत्यंत कठिन था।

आम जनता और छात्रों पर असर

नीट पेपर लीक मामला देशभर के लाखों छात्रों को प्रभावित करता है, जो चिकित्सा प्रवेश परीक्षा की निष्पक्षता को लेकर चिंतित हैं। वांगचुक का अनशन इस व्यापक जन-असंतोष का प्रतीक बन गया था। यह ऐसे समय में आया है जब शिक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर बहस तेज़ है।

आगे क्या होगा

वांगचुक ने संकेत दिया है कि अनशन के दौरान हुई बातचीत में कुछ शर्तें तय की गई हैं, हालाँकि उनका विस्तृत ब्यौरा अभी सामने नहीं आया है। नीट पेपर लीक मामले में सरकार की आगे की कार्रवाई और धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर स्थिति स्पष्ट होना अभी बाकी है। वांगचुक फिलहाल तरल पदार्थ लेकर स्वास्थ्य लाभ कर रहे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

वह भारतीय सार्वजनिक विमर्श की एक कड़वी सच्चाई उजागर करता है — जहाँ बलिदान भी संदेह से नहीं बचता। गौरतलब है कि शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग अभी भी अनुत्तरित है, और बातचीत की 'शर्तें' अभी सार्वजनिक नहीं हुई हैं — यह पारदर्शिता की कमी आंदोलन की विश्वसनीयता के लिए सबसे बड़ी चुनौती है।
RashtraPress
25 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सोनम वांगचुक ने अनशन क्यों किया था?
सोनम वांगचुक ने नीट पेपर लीक के विरोध और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर 28 जून से जंतर-मंतर पर अनशन शुरू किया था। वे कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के आंदोलन के समर्थन में उतरे थे।
सोनम वांगचुक का अनशन कब और कैसे टूटा?
24 जुलाई की देर रात केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा, राज्यमंत्री जितेंद्र सिंह और लेह-लद्दाख की सर्वोच्च समिति के वरिष्ठ नेताओं की उपस्थिति में वांगचुक ने 26 दिनों के बाद अनशन तोड़ा। इससे पहले 65 सांसदों ने उनसे अनशन समाप्त करने का आग्रह किया था।
वांगचुक के स्वास्थ्य पर अनशन का क्या असर पड़ा?
वांगचुक के अनुसार 26 दिनों के अनशन में उनका 11 किलो वज़न घट गया, मांसपेशियाँ कमज़ोर हो गईं और शरीर के अंग तथा मस्तिष्क लगभग क्षतिग्रस्त हो गए। तबीयत बिगड़ने पर उन्हें सफदरजंग अस्पताल और बाद में दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश पर मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
वांगचुक पर 'डील' के आरोप क्यों लगे?
अनशन तोड़ने के बाद कुछ लोगों ने सोशल मीडिया पर आरोप लगाए कि वांगचुक ने सरकार से कोई सौदा किया। वांगचुक ने इसे 'बेहुदगीभरी बात' बताते हुए खारिज किया और कहा कि अगर डील करनी होती तो 26 दिन भूखे रहने की ज़रूरत नहीं थी।
नीट पेपर लीक मामले में आगे क्या होगा?
अनशन के दौरान हुई बातचीत में कुछ शर्तें तय होने की बात कही गई है, लेकिन उनका विस्तृत ब्यौरा अभी सार्वजनिक नहीं हुआ है। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग और नीट सुधारों पर सरकार की आगे की कार्रवाई स्पष्ट होना बाकी है।
राष्ट्र प्रेस
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