सोनम वांगचुक अस्पताल में भर्ती: राहुल गांधी ने केंद्र पर साधा निशाना, 'असत्य और हिंसा' का लगाया आरोप
सारांश
मुख्य बातें
सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को 20 दिनों की भूख हड़ताल के बाद तबीयत बिगड़ने पर दिल्ली पुलिस ने अस्पताल में भर्ती कराया। इस घटनाक्रम के बाद 18 जुलाई को लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए उस पर 'असत्य' और 'हिंसा' को अपना मूल सिद्धांत बनाने का आरोप लगाया। वांगचुक को नई दिल्ली के जंतर-मंतर से हटाए जाने की यह घटना उस समय सामने आई जब वे अहिंसक विरोध-प्रदर्शन पर बैठे थे।
राहुल गांधी का सीधा हमला
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने 'छात्रों की गूंज' हैशटैग के साथ एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा, 'केंद्र सरकार के मुख्य सिद्धांत 'असत्य' और 'हिंसा' हैं। सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से हटाना, जब वे अहिंसक भूख हड़ताल पर थे, गलत है।' उन्होंने यह भी जोर दिया कि पेपर लीक, शिक्षा की बढ़ती लागत और छात्रों की आत्महत्या भारत के भविष्य के लिए गंभीर मुद्दे हैं।
गांधी ने आगे कहा, 'कोई भी ताकत भारत के छात्रों और हममें से उन लोगों को, जो उनसे प्यार करते हैं और उनमें विश्वास रखते हैं, इन मुद्दों को उठाने से नहीं रोक सकती।'
आंदोलन की पृष्ठभूमि
नीट पेपर लीक मामले में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर 'कॉकरोच जनता पार्टी' (सीजेपी) आंदोलन का नेतृत्व कर रही है। गौरतलब है कि यह विरोध-प्रदर्शन तब और तेज हो गया जब वांगचुक को उनकी अहिंसक हड़ताल के दौरान जंतर-मंतर से हटाया गया।
विपक्षी एकजुटता
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा और कई विपक्षी नेताओं ने पुलिस की इस कार्रवाई की कड़ी निंदा की। पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख ममता बनर्जी ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा, 'सोनम वांगचुक की सेहत और भलाई को लेकर बहुत चिंता है। उन्होंने सिर्फ बातचीत की मांग की थी, फिर भी सप्ताह तक उनकी अपील पर कोई जवाब नहीं मिला। लोकतंत्र में शांतिपूर्ण असहमति पर बातचीत होनी चाहिए, न कि चुप्पी साधी जानी चाहिए।'
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी-एसपी (NCP-SP) प्रमुख शरद पवार ने पत्रकारों से कहा, 'हमें अंदाजा था कि वे उन्हें पाँच या छह दिन में गिरफ्तार कर लेंगे, और ठीक वैसा ही हुआ... बढ़ते विरोध-प्रदर्शनों के बावजूद केंद्र सरकार मूकदर्शक बनी रही है, इसीलिए अन्य राजनीतिक दल इस आंदोलन के समर्थन में आगे आए हैं।'
शिवसेना-यूबीटी सांसद संजय राउत ने दिल्ली पुलिस के इस कदम को 'सरासर तानाशाही' बताते हुए इसे महाराष्ट्र में 'राम रक्षा' विरोध-प्रदर्शन से ध्यान भटकाने की चाल करार दिया।
संविधान और असहमति का सवाल
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने केंद्र सरकार की आलोचना करते हुए कहा, 'हमारा संविधान असहमति का अधिकार देता है। गृह मंत्रालय इसे नकारने पर आमादा दिखता है।' यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा पारदर्शिता को लेकर छात्र आंदोलन तेज हो रहे हैं।
आगे क्या
वांगचुक के अस्पताल में भर्ती होने के बाद उनकी स्वास्थ्य स्थिति पर सबकी नजर है। विपक्षी दलों ने सरकार से वांगचुक की माँगों पर बातचीत करने की अपील की है। यह मामला संसद के मानसून सत्र में भी गूँजने की संभावना है, जहाँ विपक्ष इसे शिक्षा नीति और नागरिक स्वतंत्रता दोनों के मोर्चे पर उठा सकता है।