18 जुलाई 2026
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सोनम वांगचुक अस्पताल में भर्ती: अन्ना हजारे की केंद्र से अपील — 'बातचीत से सुलझाएं विवाद'

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सोनम वांगचुक अस्पताल में भर्ती: अन्ना हजारे की केंद्र से अपील — 'बातचीत से सुलझाएं विवाद'

सारांश

20 दिन की भूख हड़ताल के बाद सोनम वांगचुक सफदरजंग अस्पताल में भर्ती, IV फ्लूइड से इनकार जारी। अन्ना हजारे ने केंद्र से संवाद की अपील की — 2011 के लोकपाल आंदोलन का अनुभव रखने वाले हजारे जानते हैं कि बातचीत के बिना ऐसे गतिरोध नहीं टूटते।

मुख्य बातें

सोनम वांगचुक को 20 दिनों की भूख हड़ताल के बाद सफदरजंग अस्पताल, नई दिल्ली में भर्ती कराया गया।
अन्ना हजारे ने 18 जुलाई को केंद्र सरकार से वांगचुक के साथ बातचीत करने की अपील की।
वांगचुक नीट पेपर लीक मामले पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की माँग कर रहे थे।
मेडिकल बुलेटिन में डिहाइड्रेशन , कंपन्सेटेड एसिडोसिस , यूरिनरी कीटोन 3 प्लस और 78 एमजी/डीएल ब्लड शुगर की पुष्टि हुई।
वांगचुक ने IV फ्लूइड और दवा लेने से इनकार जारी रखा; उनकी पत्नी ने पारदर्शिता की कमी का हवाला देते हुए डिस्चार्ज की माँग की।

सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने शनिवार, 18 जुलाई को केंद्र सरकार से अनुरोध किया कि वह सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के साथ संवाद स्थापित करे। 20 दिनों की लगातार भूख हड़ताल के बाद स्वास्थ्य बिगड़ने पर वांगचुक को नई दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया था। हजारे ने स्पष्ट किया कि किसी भी विवाद का स्थायी हल केवल आपसी बातचीत और समझ से ही निकाला जा सकता है।

अन्ना हजारे का बयान

मीडिया से बात करते हुए अन्ना हजारे ने कहा, 'समस्या का समाधान बातचीत और आपसी समझ से ही हो सकता है।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि जहाँ तक संभव हो, संवाद के ज़रिये ही इस मुद्दे को सुलझाने की कोशिश होनी चाहिए। हजारे के अनुसार, यदि समाज को साथ लेकर चलना है तो आपसी सहमति से विवाद सुलझाना अनिवार्य है — और यदि मामला बेवजह लंबा खिंचा, तो कोई ठोस नतीजा नहीं निकलेगा।

वांगचुक का आंदोलन और माँगें

वांगचुक नीट पेपर लीक मामले को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की माँग करते हुए जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल पर बैठे थे। इस आंदोलन का नेतृत्व कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) कर रही थी। लगातार 20 दिनों तक अनशन जारी रखने के बाद उनकी सेहत बिगड़ी, जिसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया।

सफदरजंग अस्पताल का मेडिकल बुलेटिन

सफदरजंग अस्पताल ने एक नया मेडिकल बुलेटिन जारी करते हुए बताया कि वांगचुक में डिहाइड्रेशन, कंपन्सेटेड एसिडोसिस, सीरम पोटेशियम की कमी, 78 एमजी/डीएल ब्लड शुगर और यूरिनरी कीटोन बढ़ने के लक्षण पाए गए हैं। अस्पताल के अनुसार, भर्ती के समय वांगचुक होश में थे और उनकी पल्स, ब्लड प्रेशर व ऑक्सीजन सैचुरेशन स्थिर थे। हालाँकि, यूरिनरी कीटोन का स्तर भर्ती के समय 1 प्लस था, जो दिन में बाद में बढ़कर 3 प्लस हो गया। वांगचुक अभी भी IV फ्लूइड, ओरल रिहाइड्रेशन और दवा लेने से इनकार कर रहे हैं।

परिवार की प्रतिक्रिया

वांगचुक की पत्नी ने अस्पताल को पत्र लिखकर जल्द से जल्द डिस्चार्ज की औपचारिकताएँ पूरी करने का अनुरोध किया, ताकि उन्हें अपनी पसंद के मेडिकल सेंटर में स्थानांतरित किया जा सके। उन्होंने इलाज में पारदर्शिता की कमी का हवाला दिया।

अन्ना हजारे का अनुभव और संदर्भ

गौरतलब है कि अन्ना हजारे ने 2011 में दिल्ली के जंतर-मंतर और रामलीला मैदान में 13 दिन की भूख हड़ताल की थी, जो 'इंडिया अगेंस्ट करप्शन' आंदोलन के रूप में इतिहास में दर्ज है। तत्कालीन कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार के लोकपाल विधेयक हेतु संयुक्त ड्राफ्टिंग कमेटी बनाने पर सहमत होने के बाद ही उन्होंने अपना अनशन समाप्त किया था। इसी अनुभव के आधार पर हजारे वांगचुक के मामले में भी संवाद की वकालत कर रहे हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि केंद्र सरकार इस अपील पर क्या रुख अपनाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह सवाल उठाती है कि क्या केंद्र सरकार नीट पेपर लीक जैसे संवेदनशील मुद्दे पर किसी आंदोलनकारी से संवाद को राजनीतिक रूप से व्यावहारिक मानती है। 2011 में लोकपाल आंदोलन के दौरान सरकार ने तब बातचीत की थी जब जन-दबाव चरम पर था — आज की स्थिति में वही दबाव कितना प्रभावी है, यह देखना बाकी है। वांगचुक का IV फ्लूइड तक से इनकार यह दर्शाता है कि यह महज़ प्रतीकात्मक अनशन नहीं, बल्कि गहरी वैचारिक प्रतिबद्धता है। मुख्यधारा की कवरेज स्वास्थ्य बुलेटिन पर केंद्रित है, जबकि असली प्रश्न यह है कि सरकार की चुप्पी कितनी देर टिकेगी।
RashtraPress
18 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सोनम वांगचुक को अस्पताल में क्यों भर्ती कराया गया?
सोनम वांगचुक को 20 दिनों की लगातार भूख हड़ताल के बाद स्वास्थ्य बिगड़ने पर नई दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया। मेडिकल बुलेटिन के अनुसार उनमें डिहाइड्रेशन, कंपन्सेटेड एसिडोसिस और यूरिनरी कीटोन बढ़ने के लक्षण पाए गए।
सोनम वांगचुक किस मुद्दे पर भूख हड़ताल कर रहे थे?
वांगचुक नीट पेपर लीक मामले को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की माँग करते हुए जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल पर बैठे थे। इस आंदोलन का नेतृत्व कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) कर रही थी।
अन्ना हजारे ने इस मामले में क्या कहा?
अन्ना हजारे ने 18 जुलाई को केंद्र सरकार से सोनम वांगचुक के साथ बातचीत करने की अपील की। उन्होंने कहा कि समस्या का समाधान बातचीत और आपसी समझ से ही हो सकता है, और यदि मामला बेवजह खिंचता रहा तो कोई नतीजा नहीं निकलेगा।
वांगचुक की मौजूदा स्वास्थ्य स्थिति क्या है?
सफदरजंग अस्पताल के मेडिकल बुलेटिन के अनुसार, भर्ती के समय वांगचुक होश में थे और उनके महत्वपूर्ण पैरामीटर स्थिर थे। हालाँकि, यूरिनरी कीटोन का स्तर 1 प्लस से बढ़कर 3 प्लस हो गया और वे अभी भी IV फ्लूइड व दवा लेने से इनकार कर रहे हैं।
वांगचुक की पत्नी ने अस्पताल से क्या माँग की?
वांगचुक की पत्नी ने सफदरजंग अस्पताल को पत्र लिखकर जल्द से जल्द डिस्चार्ज की औपचारिकताएँ पूरी करने का अनुरोध किया, ताकि वे अपने पति को पसंद के मेडिकल सेंटर में स्थानांतरित कर सकें। उन्होंने इलाज में पारदर्शिता की कमी का हवाला दिया।
राष्ट्र प्रेस
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