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क्या भारत के पेंट उद्योग का आकार 2030 तक 16.5 अरब डॉलर पहुंचने वाला है?

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क्या भारत के पेंट उद्योग का आकार 2030 तक 16.5 अरब डॉलर पहुंचने वाला है?

सारांश

भारत का पेंट और कोटिंग्स उद्योग 2030 तक 16.5 अरब डॉलर तक पहुँचने की संभावना के साथ तेजी से विकसित हो रहा है। इस वृद्धि का मुख्य कारण शहरीकरण, आय में वृद्धि और नए निर्माण हैं। जानें इस क्षेत्र की वर्तमान स्थिति और भविष्य की संभावनाएँ।

मुख्य बातें

भारत का पेंट उद्योग 2030 तक 16.5 अरब डॉलर तक पहुँच सकता है।
उद्योग की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर 9.4% है।
शहरीकरण और आय में वृद्धि इस उद्योग के लिए महत्वपूर्ण हैं।
बड़ी कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है।
लोग अब पर्यावरण अनुकूल पेंट को प्राथमिकता दे रहे हैं।

नई दिल्ली, 16 दिसंबर (राष्ट्र प्रेस)। भारत का पेंट और कोटिंग्स उद्योग 2030 तक उल्लेखनीय गति से बढ़ने वाला है। एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, इस उद्योग की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (सीएजीआर) लगभग 9.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है। वर्ष 2024 में इसका आकार 9.6 अरब डॉलर था, जो अगले 5 वर्षों में बढ़कर 16.5 अरब डॉलर तक पहुँच सकता है।

रुबिक्स डेटा साइंसेज (रुबिक्स) द्वारा जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि इस उद्योग की वृद्धि के लिए अनेक कारण जिम्मेदार हैं। शहरीकरण, लोगों की आय में वृद्धि, नई इमारतों और सड़कों का निर्माण, तथा घरों की संख्या में वृद्धि इसके मुख्य कारण हैं।

भारत, जो दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ऑटोमोबाइल मार्केट है, सरकार इसे अगले 5 वर्षों में शीर्ष पर लाने की योजना बना रही है, जिससे कारों और फैक्ट्रियों में उपयोग होने वाले पेंट और कोटिंग्स की मांग में वृद्धि हो रही है।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि सरकार की प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी और ग्रामीण) जैसी योजनाओं के कारण पेंट उद्योग को लाभ हो रहा है। इन योजनाओं के तहत लाखों नए घर बन रहे हैं, जिससे पेंट की मांग बढ़ रही है।

हालांकि, इस क्षेत्र में तेजी से वृद्धि के बावजूद, वित्त वर्ष 2025 में कई चुनौतियाँ सामने आईं। बड़ी पेंट कंपनियों का लाभ कम हुआ, शहरों में मांग में कमी आई, और कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ गई।

भारत में लगभग 3,000 छोटे और असंगठित पेंट कंपनियाँ हैं, जिन्हें सरकारी नियमों का पालन, नई तकनीक में निवेश और मार्केटिंग में समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है, जिससे उनका अस्तित्व संकट में है।

नए खिलाड़ियों के आगमन से प्रतिस्पर्धा और बढ़ गई है। बड़ी कंपनियाँ आपस में मिलकर अधिक मजबूत हो रही हैं, जिससे छोटे खिलाड़ियों पर दबाव बढ़ रहा है। भारत मुख्यतः पेंट विकासशील देशों को निर्यात करता है, जबकि उन्नत और विशेष पेंट तथा कच्चा माल (जैसे टाइटेनियम डाइऑक्साइड) विकसित देशों से आयात करता है।

वित्त वर्ष 2026 के पहले छह महीनों में भारत ने 219 मिलियन डॉलर का पेंट आयात किया, जबकि निर्यात केवल 61 मिलियन डॉलर का रहा।

भारत के पेंट व्यापार में सॉल्वेंट आधारित पेंट का सबसे बड़ा हिस्सा है। यह पेंट उद्योग और वाहनों में अधिकतर उपयोग होते हैं, जिससे निर्यात का 84 प्रतिशत और आयात का 75 प्रतिशत इन्हीं का है।

रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि अब लोग पर्यावरण अनुकूल यानी कम वीओसी वाले और उच्च गुणवत्ता वाले पेंट को प्राथमिकता देने लगे हैं। भविष्य में नई तकनीक, नैनोटेक्नोलॉजी और उच्च गुणवत्ता वाले पेंट इस उद्योग की दिशा को बदल सकते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह स्पष्ट है कि भारत का पेंट उद्योग तेजी से विकसित हो रहा है, लेकिन इसके साथ ही चुनौतियाँ भी हैं। बड़े और छोटे खिलाड़ियों के बीच प्रतिस्पर्धा और सरकार की योजनाएँ इस उद्योग को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
RashtraPress
17 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत के पेंट उद्योग की वृद्धि दर कितनी है?
भारत के पेंट उद्योग की वृद्धि दर लगभग 9.4% है।
भारत में पेंट उद्योग के लिए प्रमुख कारण क्या हैं?
शहरीकरण, आय में वृद्धि और नए निर्माण इसके प्रमुख कारण हैं।
क्या भारत पेंट का निर्यात करता है?
हाँ, भारत पेंट का निर्यात करता है, विशेष रूप से विकासशील देशों को।
भारत में पेंट उद्योग की चुनौतियाँ क्या हैं?
बड़ी कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा, छोटे कंपनियों की समस्याएँ और मार्केटिंग में दिक्कतें मुख्य चुनौतियाँ हैं।
क्या लोग पर्यावरण अनुकूल पेंट पसंद कर रहे हैं?
हाँ, लोग अब कम वीओसी वाले और उच्च गुणवत्ता वाले पेंट को प्राथमिकता देने लगे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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